झारखंड विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल मिलने पर BDDS टीम ने रांची में चलाया सर्च अभियान
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा को 21 अगस्त 2026 को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला ई-मेल मिलने के बाद रांची में सुरक्षा एजेंसियाँ तत्काल हरकत में आ गईं। विधानसभा के एक अधिकारी को यह धमकी भरा संदेश प्राप्त होते ही पुलिस और सुरक्षा बलों को सूचित किया गया, जिसके बाद झारखंड जगुआर के बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वॉड (BDDS) को परिसर में भेजा गया।
सर्च अभियान और तलाशी का ब्यौरा
सूचना मिलते ही BDDS टीम ने विधानसभा परिसर के सभी भवनों, आसपास के क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों की गहन तलाशी शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान परिसर में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने विधानसभा की समग्र सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की।
प्रवेश-निकास और सुरक्षा मानकों की जाँच
विधानसभा परिसर में प्रवेश और निकास की व्यवस्था के साथ-साथ अन्य सुरक्षा मानकों का भी मूल्यांकन किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। धमकी भरे ई-मेल के संबंध में विधानसभा के संबंधित अधिकारी की ओर से रांची के विधानसभा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
डिजिटल जाँच और साइबर ट्रेसिंग
पुलिस ने मामला दर्ज कर ई-मेल की तकनीकी जाँच शुरू कर दी है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी वाला ई-मेल किस स्थान और किस डिजिटल माध्यम से भेजा गया। ई-मेल के तकनीकी विवरण, भेजने वाले के डिजिटल फुटप्रिंट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। पुलिस यह भी निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि धमकी के पीछे किसी व्यक्ति या संगठित समूह का हाथ है अथवा यह केवल दहशत फैलाने की कोशिश है।
रांची में बम धमकियों का बढ़ता सिलसिला
गौरतलब है कि पिछले करीब छह महीनों में रांची के कई महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को इसी प्रकार की बम धमकियाँ मिल चुकी हैं। रांची कलेक्ट्रेट, सिविल कोर्ट और पासपोर्ट कार्यालय को भी पहले ऐसी धमकियाँ दी जा चुकी हैं, जिनके बाद संबंधित परिसरों में सुरक्षा एजेंसियों ने तलाशी अभियान चलाए थे। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इन सभी घटनाओं के बीच किसी संभावित कड़ी की जाँच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन धमकियों के पीछे एक ही व्यक्ति या समूह है अथवा अलग-अलग स्रोतों से ये ई-मेल भेजे जा रहे हैं।
साइबर जाँच के नतीजे और संभावित गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होगा कि रांची के सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने का यह सिलसिला कहाँ से संचालित हो रहा है।