जम्मू-कश्मीर: दुबई में नौकरी का झांसा देकर ठगी, क्राइम ब्रांच ने दर्ज की एफआईआर
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की स्पेशल क्राइम विंग और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW), जम्मू ने 8 अगस्त 2026 को विदेश में वीजा और रोजगार दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की है। यह मामला डोडा जिले के कई पीड़ितों की संयुक्त लिखित शिकायत पर आधारित है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दुबई में नौकरी दिलाने का वादा कर बड़ी रकम ठग ली गई।
मुख्य आरोपी और घटनाक्रम
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मुख्य आरोपी बिलाल अहमद — जो किश्तवाड़ के डच्छन क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में दुबई में रह रहा है — ने पीड़ितों को दुबई में वीजा और रोजगार दिलाने का झांसा दिया। आरोपी के आश्वासनों पर भरोसा करते हुए पीड़ितों ने उसके निर्देश पर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह धनराशि यासिर अराफात, आशिक हुसैन और मोइन खान के बैंक खातों के ज़रिए भेजी गई। जांच एजेंसी के अनुसार, ये तीनों मुख्य आरोपी के साथ मिलकर काम कर रहे थे।
सुनियोजित आपराधिक साजिश के संकेत
EOW के बयान के अनुसार, प्रारंभिक साक्ष्य एक सुनियोजित आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं, जिसमें विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाया गया। संबंधित कानूनी धाराओं के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसी अब पूरी मनी ट्रेल की जांच करेगी और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का पता लगाएगी।
जम्मू-कश्मीर में पहले के ऐसे मामले
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जुलाई 2026 में सामने आए कंबोडिया साइबर स्कैम मामले में EOW कश्मीर ने पट्टन के एक संचालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। उस मामले में एक व्यक्ति को कंबोडिया में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी और ₹90 हजार मासिक वेतन का लालच देकर बंधक बनाया गया था और अवैध ऑनलाइन ठगी के काम में लगाया गया था।
इसी तरह, श्रीनगर के करणनगर स्थित एम/एस एचआर चॉइस इंटरनेशनल एजुकेशन कंसल्टेंसी के संचालक के खिलाफ बहरीन और कतर फर्जी भर्ती मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया था। आरोपी फर्जी ऑनलाइन इंटरव्यू, नकली मेडिकल जांच और नकली नौकरी के ऑफर लेटर के ज़रिए लोगों से लाखों रुपए वसूलते थे। कतर और मालदीव के नाम पर भी इसी तरह की ठगी के मामले सामने आए थे।
ठगों का तरीका और आम जनता पर असर
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में ठग आमतौर पर पीड़ितों से ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक अग्रिम राशि वसूलते हैं और अक्सर भुगतान की कोई आधिकारिक रसीद भी नहीं देते। गौरतलब है कि यह वर्ग आर्थिक रूप से कमज़ोर और रोजगार की तलाश में बेहद संवेदनशील होता है, जिससे ठगों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
EOW की सलाह और आगे की जांच
EOW ने आम नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी या वीजा दिलाने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी से सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले अधिकृत सरकारी माध्यमों से संबंधित एजेंसी की विश्वसनीयता की जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन पर दें। जांच एजेंसी मनी ट्रेल को पूरी तरह खंगालकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रयास में जुटी है।