9 अगस्त 2026
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जम्मू-कश्मीर: दुबई में नौकरी का झांसा देकर ठगी, क्राइम ब्रांच ने दर्ज की एफआईआर

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जम्मू-कश्मीर: दुबई में नौकरी का झांसा देकर ठगी, क्राइम ब्रांच ने दर्ज की एफआईआर

सारांश

जम्मू-कश्मीर में विदेश में रोजगार के नाम पर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच की EOW ने दुबई में बैठे आरोपी बिलाल अहमद सहित तीन अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। डोडा के पीड़ितों से ₹1-1.5 लाख तक की ठगी का आरोप है — और यह इस साल का तीसरा ऐसा बड़ा मामला है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच EOW ने 8 अगस्त 2026 को दुबई में नौकरी-वीजा के नाम पर ठगी के मामले में एफआईआर दर्ज की।
मुख्य आरोपी बिलाल अहमद (किश्तवाड़, डच्छन क्षेत्र) वर्तमान में दुबई में है; तीन अन्य — यासिर अराफात, आशिक हुसैन, मोइन खान — भी आरोपी हैं।
पीड़ित डोडा जिले के निवासी हैं जिन्होंने संयुक्त शिकायत दर्ज कराई।
ठग आमतौर पर ₹1 लाख से ₹1.5 लाख अग्रिम राशि वसूलते हैं, बिना किसी आधिकारिक रसीद के।
यह जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष का तीसरा बड़ा विदेशी रोजगार घोटाला है — इससे पहले कंबोडिया साइबर स्कैम और बहरीन-कतर फर्जी भर्ती मामले सामने आ चुके हैं।
EOW अब पूरी मनी ट्रेल की जांच करेगी।

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की स्पेशल क्राइम विंग और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW), जम्मू ने 8 अगस्त 2026 को विदेश में वीजा और रोजगार दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की है। यह मामला डोडा जिले के कई पीड़ितों की संयुक्त लिखित शिकायत पर आधारित है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दुबई में नौकरी दिलाने का वादा कर बड़ी रकम ठग ली गई।

मुख्य आरोपी और घटनाक्रम

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मुख्य आरोपी बिलाल अहमद — जो किश्तवाड़ के डच्छन क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में दुबई में रह रहा है — ने पीड़ितों को दुबई में वीजा और रोजगार दिलाने का झांसा दिया। आरोपी के आश्वासनों पर भरोसा करते हुए पीड़ितों ने उसके निर्देश पर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह धनराशि यासिर अराफात, आशिक हुसैन और मोइन खान के बैंक खातों के ज़रिए भेजी गई। जांच एजेंसी के अनुसार, ये तीनों मुख्य आरोपी के साथ मिलकर काम कर रहे थे।

सुनियोजित आपराधिक साजिश के संकेत

EOW के बयान के अनुसार, प्रारंभिक साक्ष्य एक सुनियोजित आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं, जिसमें विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाया गया। संबंधित कानूनी धाराओं के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसी अब पूरी मनी ट्रेल की जांच करेगी और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का पता लगाएगी।

जम्मू-कश्मीर में पहले के ऐसे मामले

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जुलाई 2026 में सामने आए कंबोडिया साइबर स्कैम मामले में EOW कश्मीर ने पट्टन के एक संचालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। उस मामले में एक व्यक्ति को कंबोडिया में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी और ₹90 हजार मासिक वेतन का लालच देकर बंधक बनाया गया था और अवैध ऑनलाइन ठगी के काम में लगाया गया था।

इसी तरह, श्रीनगर के करणनगर स्थित एम/एस एचआर चॉइस इंटरनेशनल एजुकेशन कंसल्टेंसी के संचालक के खिलाफ बहरीन और कतर फर्जी भर्ती मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया था। आरोपी फर्जी ऑनलाइन इंटरव्यू, नकली मेडिकल जांच और नकली नौकरी के ऑफर लेटर के ज़रिए लोगों से लाखों रुपए वसूलते थे। कतर और मालदीव के नाम पर भी इसी तरह की ठगी के मामले सामने आए थे।

ठगों का तरीका और आम जनता पर असर

अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में ठग आमतौर पर पीड़ितों से ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक अग्रिम राशि वसूलते हैं और अक्सर भुगतान की कोई आधिकारिक रसीद भी नहीं देते। गौरतलब है कि यह वर्ग आर्थिक रूप से कमज़ोर और रोजगार की तलाश में बेहद संवेदनशील होता है, जिससे ठगों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।

EOW की सलाह और आगे की जांच

EOW ने आम नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी या वीजा दिलाने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी से सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले अधिकृत सरकारी माध्यमों से संबंधित एजेंसी की विश्वसनीयता की जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन पर दें। जांच एजेंसी मनी ट्रेल को पूरी तरह खंगालकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रयास में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बहरीन, कतर और अब दुबई — एक स्पष्ट पैटर्न उजागर करती है: जांच एजेंसियां आरोपपत्र तो दाखिल कर रही हैं, लेकिन ठगी रोकने का कोई ठोस पूर्व-चेतावनी तंत्र अब तक नहीं बना। मुख्य आरोपी विदेश में बैठकर ऑपरेट कर रहा है, जो प्रत्यर्पण की जटिलताओं को देखते हुए न्याय को और लंबा खींच सकता है। EOW की सलाहें तब तक पर्याप्त नहीं हैं जब तक सरकार प्रमाणित विदेशी भर्ती एजेंसियों की सार्वजनिक सूची और वास्तविक समय शिकायत पोर्टल नहीं बनाती।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने किस मामले में एफआईआर दर्ज की है?
क्राइम ब्रांच की EOW जम्मू ने दुबई में नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर डोडा जिले के कई निवासियों से धोखाधड़ी के मामले में 8 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की है। मुख्य आरोपी बिलाल अहमद किश्तवाड़ के डच्छन क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में दुबई में है।
इस ठगी में कितने लोग आरोपी हैं और उनकी क्या भूमिका है?
कुल चार लोग आरोपी हैं — मुख्य आरोपी बिलाल अहमद और उसके तीन सहयोगी यासिर अराफात, आशिक हुसैन और मोइन खान। पीड़ितों की रकम इन तीनों के बैंक खातों के ज़रिए भेजी गई, जो मुख्य आरोपी के निर्देश पर काम कर रहे थे।
पीड़ितों से कितनी रकम ठगी गई?
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में ठग आमतौर पर ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक अग्रिम राशि वसूलते हैं और कोई आधिकारिक रसीद नहीं देते। इस विशेष मामले में कुल ठगी की सटीक राशि जांच के दौरान स्पष्ट होगी।
जम्मू-कश्मीर में इससे पहले भी ऐसे मामले हुए हैं?
हाँ, जुलाई 2026 में कंबोडिया साइबर स्कैम और श्रीनगर की एचआर चॉइस इंटरनेशनल एजुकेशन कंसल्टेंसी से जुड़े बहरीन-कतर फर्जी भर्ती मामले में भी EOW आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। कतर और मालदीव के नाम पर भी इसी तरह की ठगी के मामले सामने आ चुके हैं।
विदेशी नौकरी के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
EOW ने सलाह दी है कि किसी भी एजेंसी या व्यक्ति को भुगतान करने से पहले अधिकृत सरकारी माध्यमों से उसकी विश्वसनीयता जांचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन पर दें और बिना रसीद के कोई भी अग्रिम राशि न दें।
राष्ट्र प्रेस
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