मिलेट्स से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की रक्षा संभव: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 22 सितंबर 2026 को जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में आयोजित 'मिलेट्स फॉर हेल्थ' संगोष्ठी को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रकृति का संदेश एकदम साफ है — यदि मानव जाति को पृथ्वी और स्वयं को बचाना है, तो प्राकृतिक सीमाओं का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। उन्होंने मिलेट्स को इस चुनौती का एक विश्वसनीय और टिकाऊ समाधान बताया। इससे पहले उन्होंने SKUAST जम्मू द्वारा आयोजित मिलेट्स मिशन पर एक राष्ट्रीय संवाद में भी भाग लिया।
संगोष्ठी का संदेश और व्यापक उद्देश्य
उपराज्यपाल सिन्हा ने GMC की इस संगोष्ठी को केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी, जल, किसान परिवारों, गाँवों और प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य के प्रति साझा जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला अवसर बताया। उन्होंने चिकित्सा जगत, वैज्ञानिकों, किसानों और आम नागरिकों से मिलेट्स को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने रेखांकित किया कि बाजरा भारतीय सभ्यता जितना ही प्राचीन है। बाजरा, ज्वार, रागी, कोडो, कुटकी, कांगनी और सनवा जैसी मिलेट फसलें पीढ़ियों से उगाई जाती रही हैं, कठोर जलवायु में कम पानी से फलती-फूलती हैं और इन्हें न्यूनतम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है।
गंभीर स्वास्थ्य आँकड़े और मिलेट्स की भूमिका
2018 की आईसीएमआर रिपोर्ट का हवाला देते हुए उपराज्यपाल ने बताया कि 2016 में देश में कुल मौतों का 61.8 प्रतिशत गैर-संक्रामक रोगों के कारण हुआ, जो 1990 में 37.09 प्रतिशत था। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के हवाले से बताया कि 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 11 प्रतिशत महिलाओं और 15 प्रतिशत पुरुषों में उच्च रक्तचाप दर्ज किया गया है।
सिन्हा ने कहा कि ये केवल चिकित्सीय समस्याएँ नहीं हैं — ये सीधे पारिवारिक आर्थिक स्थिति, सामाजिक जीवन और राष्ट्रीय उत्पादकता को प्रभावित करती हैं। उनके अनुसार पारंपरिक भोजन में बाजरे को अधिक स्थान देना रोग निवारण और स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मिलेट्स के पोषण गुण: शोध क्या कहता है
उपराज्यपाल ने बताया कि मिलेट्स फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। उन्होंने कहा कि अनेक शोध-पत्रों से पता चलता है कि मिलेट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है और यह हृदय स्वास्थ्य, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण तथा वजन प्रबंधन में सहायक होता है। उन्होंने कहा, 'शोध अध्ययनों को देखते हुए मैं कह सकता हूँ कि मिलेट्स व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा से लेकर प्रकृति संरक्षण तक, संपूर्ण चक्र को प्रभावित करता है।'
किसानों, वैज्ञानिकों और डॉक्टरों से अपील
उपराज्यपाल ने चर्चा से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से फसलों में विविधता लाने, वैज्ञानिकों से अधिक उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित करने, तथा डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों से संतुलित आहार में बाजरे की भूमिका के बारे में साक्ष्य-आधारित जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के समस्त नागरिकों से अपील की कि वे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की जगह बाजरे जैसे पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें। सिन्हा ने कहा, 'यदि हम सब मिलकर आगे बढ़ें, तो हम एक ऐसे जम्मू-कश्मीर का निर्माण कर सकते हैं जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करे, नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करे और जल, मिट्टी तथा पर्यावरण का संरक्षण करे।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत में मोटे अनाज को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय मुहिम तेज हो रही है।