कमलनाथ का BJP सरकार पर हमला: ₹30 लाख करोड़ के निवेश दावे, असल FDI सिर्फ ₹708 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार, 17 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार के निवेश दावों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के आधिकारिक आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश को घोषित ₹30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों के मुकाबले वास्तविक एफडीआई इक्विटी इनफ्लो मात्र ₹708.06 करोड़ रहा।
निवेश दावे और ज़मीनी हकीकत
कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने दावा किया था कि मध्य प्रदेश को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ₹30 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। लेकिन DPIIT के एफडीआई इक्विटी इनफ्लो डेटा के अनुसार, इस पूरे वर्ष के दौरान राज्य में वास्तविक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश केवल ₹708.06 करोड़ रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह संभव है कि ₹30 लाख करोड़ के प्रस्ताव आएँ और वास्तविक निवेश ₹1,000 करोड़ भी न हो?
पड़ोसी राज्यों से भी पीछे मध्य प्रदेश
कमलनाथ के अनुसार, निवेश इनफ्लो के मामले में मध्य प्रदेश अपने पड़ोसी राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भी पिछड़ा रहा। 2025-26 के दौरान देश में आए कुल विदेशी निवेश में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 0.14 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा राज्य की निवेश आकर्षण क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
BJP पर इवेंट्स और प्रचार का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BJP सरकार वास्तविक निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने की बजाय इवेंट्स और प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, "निवेश भरोसे से आता है। निवेश अपने-आप नहीं आता; उसे आकर्षित करना पड़ता है।" उनका कहना था कि निवेश प्रस्तावों को तब तक आर्थिक गतिविधि का पैमाना नहीं माना जा सकता, जब तक उनसे परियोजनाएँ, पूँजी का प्रवाह और रोज़गार सृजन न हो।
राजनीतिक संदर्भ
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार निरंतर मध्य प्रदेश को निवेशकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक निवेशक सम्मेलनों का आयोजन किया है, जिनमें बड़े निवेश प्रस्तावों की घोषणाएँ हुई हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रस्तावों और वास्तविक निवेश के बीच की यह खाई नीतिगत क्रियान्वयन की कमज़ोरी को उजागर करती है।
आगे की स्थिति
कमलनाथ की इस चुनौती के बाद अब राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BJP सरकार DPIIT के आँकड़ों और अपने निवेश दावों के बीच के अंतर का स्पष्टीकरण किस तरह देती है, और क्या वह वास्तविक निवेश रूपांतरण के ठोस प्रमाण सामने रख पाती है।