25 जुलाई 2026
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कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक: 27 वर्षों में भारत की आतंकरोधी रणनीति कैसे बनी सटीक और निर्णायक

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कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक: 27 वर्षों में भारत की आतंकरोधी रणनीति कैसे बनी सटीक और निर्णायक

सारांश

कारगिल की उन चोटियों से ऑपरेशन सिंदूर के सटीक हमलों तक — 27 वर्षों में भारत की आतंकरोधी रणनीति ने करवट ली है। सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और मई 2025 में नौ ठिकानों को ध्वस्त करने वाले ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत अब प्रतीक्षा नहीं करता — सटीक और निर्णायक जवाब देता है।

मुख्य बातें

कारगिल विजय की 27वीं वर्षगांठ पर भारत की विकसित होती आतंकरोधी रणनीति की समीक्षा।
28–29 सितंबर 2016 की रात सर्जिकल स्ट्राइक में नियंत्रण रेखा पार आतंकी लॉन्च पैड नष्ट किए गए।
26 फरवरी 2019 को बालाकोट हवाई कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया; पुलवामा हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए थे।
ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) में पाकिस्तान और PoJK में नौ आतंकी ठिकाने ध्वस्त; 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
मारे गए आतंकियों में IC-814 अपहरण और पुलवामा से जुड़े यूसुफ अजहर , अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद शामिल।
7–8 मई 2025 को पाकिस्तान के ड्रोन-मिसाइल हमलों को भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया।

कारगिल विजय की 27वीं वर्षगांठ पर भारत उन वीर सैनिकों को नमन कर रहा है, जिन्होंने 1999 में अपने प्राणों की आहुति देकर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की। उस ऐतिहासिक विजय के बाद से भारत की सुरक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन आया है — आज देश की आतंकरोधी रणनीति केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय, सटीक और निर्णायक हो चुकी है। सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट हवाई कार्रवाई (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) इस बदलती रणनीति के तीन सशक्त प्रमाण हैं।

कारगिल विजय: नींव जो आज भी मज़बूत है

1999 के कारगिल युद्ध में पुनः अधिकृत की गई हर चोटी इस बात की गवाह है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी मूल्य चुकाने को तैयार है। इस युद्ध ने भारतीय सशस्त्र बलों को न केवल युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से परिचित कराया, बल्कि रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण और खुफिया समन्वय की अनिवार्यता को भी रेखांकित किया। कारगिल के बाद से भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ किया है।

सर्जिकल स्ट्राइक 2016: सीमापार आतंकवाद का करारा जवाब

उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 28–29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकवादी लॉन्च पैडों पर सर्जिकल स्ट्राइक की और उन्हें नष्ट किया। इस कार्रवाई में आतंकवादियों और उनके समर्थन ढाँचे को भारी क्षति पहुँचाई गई। यह अभियान सीमापार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सक्रिय और दृढ़ नीति का पहला स्पष्ट संकेत था।

बालाकोट हवाई कार्रवाई 2019: आतंकी शिविर तक पहुँची भारतीय वायुसेना

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को खुफिया सूचनाओं के आधार पर बालाकोट में हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया। यह ठिकाना नागरिक आबादी से दूर स्थित था और इसका संचालन मौलाना यूसुफ अजहर — जो जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का बहनोई है — की ओर से किया जाता था। इन दोनों निर्णायक कार्रवाइयों ने विश्व को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद और छद्म युद्ध को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर मई 2025: नौ आतंकी ठिकाने ध्वस्त

मई 2025 में संचालित ऑपरेशन सिंदूर भारत की विकसित होती सैन्य नीति का सबसे आधुनिक उदाहरण बना। यह अभियान पहलगाम में आम नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया।

इस अभियान में सटीक खुफिया जानकारी, ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन तथा बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया गया। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ठिकाने और कमांड सेंटर नष्ट किए गए। इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें IC-814 विमान अपहरण और पुलवामा हमले से जुड़े यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे प्रमुख नाम भी शामिल थे।

गौरतलब है कि 7 और 8 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से जवाबी हमलों का प्रयास किया गया, जिन्हें भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई ने भारत की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता और एकीकृत ड्रोन-रोधी रक्षा तंत्र की प्रभावशीलता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।

कारगिल की विरासत और भविष्य की दिशा

कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक की यात्रा यह बताती है कि भारत की आतंकरोधी रणनीति अब प्रतीक्षा और प्रतिक्रिया की नीति से आगे बढ़कर पूर्व-सक्रिय और सटीक कार्रवाई की नीति बन चुकी है। आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उच्च स्तरीय खुफिया समन्वय और त्वरित कार्रवाई की क्षमता ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मज़बूत बनाया है। हर वर्ष कारगिल विजय दिवस न केवल 1999 के वीरों के बलिदान को सम्मान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को साहस, कर्तव्य और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित भी करता है। यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जब भारत की सुरक्षा नीति एक नए और निर्णायक अध्याय में प्रवेश कर चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार की समीक्षा केवल स्मृति तक सीमित नहीं — यह रणनीतिक परिपक्वता का दस्तावेज़ है। सर्जिकल स्ट्राइक से बालाकोट और फिर ऑपरेशन सिंदूर तक, हर कदम पर भारत ने अपनी कार्रवाई की सीमा और तकनीकी परिष्कार को बढ़ाया है — यह सकारात्मक बदलाव है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या इन अभियानों के दीर्घकालिक प्रभाव — आतंकी संगठनों के पुनर्गठन की रोकथाम और कूटनीतिक दबाव — को पर्याप्त रूप से मापा और सार्वजनिक किया गया है। ऑपरेशन सिंदूर में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध और ड्रोन-रोधी क्षमता का प्रदर्शन भारत की तकनीकी छलांग को रेखांकित करता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या इन कार्रवाइयों ने सीमापार आतंकी ढाँचे को स्थायी रूप से कमज़ोर किया है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या था और यह कब चलाया गया?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में पहलगाम में आम नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया सैन्य अभियान था। इसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया गया और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
बालाकोट हवाई कार्रवाई क्यों की गई थी?
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हवाई कार्रवाई की, जिसका संचालन मौलाना यूसुफ अजहर की ओर से किया जाता था।
सर्जिकल स्ट्राइक 2016 किसके जवाब में की गई थी?
उरी आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 28–29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादी लॉन्च पैडों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। इस कार्रवाई में आतंकवादियों और उनके समर्थन ढाँचे को भारी क्षति पहुँचाई गई।
ऑपरेशन सिंदूर में किन आतंकी संगठनों के ठिकाने निशाना बने?
ऑपरेशन सिंदूर में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ठिकानों और कमांड सेंटरों को नष्ट किया गया। मारे गए आतंकियों में IC-814 अपहरण और पुलवामा हमले से जुड़े यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे नाम शामिल थे।
कारगिल युद्ध से ऑपरेशन सिंदूर तक भारत की रणनीति में क्या बदलाव आया?
1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत की आतंकरोधी रणनीति प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय और सटीक हो गई है। आधुनिक ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और उच्च स्तरीय खुफिया समन्वय ने भारत को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता से लैस किया है।
राष्ट्र प्रेस
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