कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक: 27 वर्षों में भारत की आतंकरोधी रणनीति कैसे बनी सटीक और निर्णायक
सारांश
मुख्य बातें
कारगिल विजय की 27वीं वर्षगांठ पर भारत उन वीर सैनिकों को नमन कर रहा है, जिन्होंने 1999 में अपने प्राणों की आहुति देकर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की। उस ऐतिहासिक विजय के बाद से भारत की सुरक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन आया है — आज देश की आतंकरोधी रणनीति केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय, सटीक और निर्णायक हो चुकी है। सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट हवाई कार्रवाई (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) इस बदलती रणनीति के तीन सशक्त प्रमाण हैं।
कारगिल विजय: नींव जो आज भी मज़बूत है
1999 के कारगिल युद्ध में पुनः अधिकृत की गई हर चोटी इस बात की गवाह है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी मूल्य चुकाने को तैयार है। इस युद्ध ने भारतीय सशस्त्र बलों को न केवल युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से परिचित कराया, बल्कि रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण और खुफिया समन्वय की अनिवार्यता को भी रेखांकित किया। कारगिल के बाद से भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ किया है।
सर्जिकल स्ट्राइक 2016: सीमापार आतंकवाद का करारा जवाब
उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 28–29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकवादी लॉन्च पैडों पर सर्जिकल स्ट्राइक की और उन्हें नष्ट किया। इस कार्रवाई में आतंकवादियों और उनके समर्थन ढाँचे को भारी क्षति पहुँचाई गई। यह अभियान सीमापार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सक्रिय और दृढ़ नीति का पहला स्पष्ट संकेत था।
बालाकोट हवाई कार्रवाई 2019: आतंकी शिविर तक पहुँची भारतीय वायुसेना
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को खुफिया सूचनाओं के आधार पर बालाकोट में हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया। यह ठिकाना नागरिक आबादी से दूर स्थित था और इसका संचालन मौलाना यूसुफ अजहर — जो जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का बहनोई है — की ओर से किया जाता था। इन दोनों निर्णायक कार्रवाइयों ने विश्व को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद और छद्म युद्ध को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025: नौ आतंकी ठिकाने ध्वस्त
मई 2025 में संचालित ऑपरेशन सिंदूर भारत की विकसित होती सैन्य नीति का सबसे आधुनिक उदाहरण बना। यह अभियान पहलगाम में आम नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया।
इस अभियान में सटीक खुफिया जानकारी, ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन तथा बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया गया। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ठिकाने और कमांड सेंटर नष्ट किए गए। इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें IC-814 विमान अपहरण और पुलवामा हमले से जुड़े यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे प्रमुख नाम भी शामिल थे।
गौरतलब है कि 7 और 8 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से जवाबी हमलों का प्रयास किया गया, जिन्हें भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई ने भारत की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता और एकीकृत ड्रोन-रोधी रक्षा तंत्र की प्रभावशीलता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।
कारगिल की विरासत और भविष्य की दिशा
कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक की यात्रा यह बताती है कि भारत की आतंकरोधी रणनीति अब प्रतीक्षा और प्रतिक्रिया की नीति से आगे बढ़कर पूर्व-सक्रिय और सटीक कार्रवाई की नीति बन चुकी है। आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उच्च स्तरीय खुफिया समन्वय और त्वरित कार्रवाई की क्षमता ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मज़बूत बनाया है। हर वर्ष कारगिल विजय दिवस न केवल 1999 के वीरों के बलिदान को सम्मान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को साहस, कर्तव्य और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित भी करता है। यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जब भारत की सुरक्षा नीति एक नए और निर्णायक अध्याय में प्रवेश कर चुकी है।