26 जुलाई 2026
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कारगिल विजय दिवस: सीएम शिवकुमार बोले — सैनिकों का बलिदान देश के साहस और गौरव की अमर नींव

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कारगिल विजय दिवस: सीएम शिवकुमार बोले — सैनिकों का बलिदान देश के साहस और गौरव की अमर नींव

सारांश

कारगिल विजय दिवस पर बेंगलुरु में सीएम शिवकुमार ने 527 शहीदों — जिनमें कर्नाटक के 13 जवान शामिल — को नमन किया। उन्होंने कर्नाटक को देश के रक्षा तंत्र की रीढ़ बताया और पूर्व सैनिक परिवारों के कल्याण की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बातें

कारगिल विजय दिवस पर 26 जुलाई 2025 को बेंगलुरु के नेशनल मिलिट्री मेमोरियल में स्मृति समारोह आयोजित हुआ।
शिवकुमार ने 1999 के कारगिल युद्ध के 527 शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिनमें कर्नाटक के 13 जवान शामिल थे।
शिवकुमार ने कर्नाटक को भारत के डिफेंस सेक्टर की रीढ़ बताया — बीईएमएल , डीआरडीओ और इसरो का उल्लेख किया।
केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने भी कारगिल के वीर जवानों को नमन किया।
राज्य सरकार ने लाखों पूर्व सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कहा कि भारतीय सैनिकों का बलिदान इस देश के साहस, स्वतंत्रता और गौरव की अटल नींव है। बेंगलुरु स्थित नेशनल मिलिट्री मेमोरियल में आयोजित स्मृति समारोह में उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों के कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री का संबोधन

शिवकुमार ने कार्यक्रम में कहा, 'हमारे सैनिकों की कुर्बानी हमारी हिम्मत, हमारी आजादी और हमारा गर्व है। सत्ताईस साल पहले, हमारे बहादुर योद्धाओं ने हिमालय में दुश्मन को हराया और तिरंगा फहराया। हमारे हीरो भले ही शहीद हो गए हों, लेकिन उनकी विरासत हमेशा रहेगी। मैं देश के लिए अपनी जान देने वाले सभी बहादुर सैनिकों को दिल से श्रद्धांजलि देता हूँ।'

उन्होंने कारगिल युद्ध की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए बताया कि उस संघर्ष में 527 सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कर्नाटक के 13 जवान भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'चाहे भारत-पाकिस्तान युद्ध हो, भारत-चीन की लड़ाई हो, या सीमा पर घुसपैठ की घटनाएँ हों — हमारे सैनिक हमेशा, हर दिन, हर पल, हिम्मत और पक्के इरादे के साथ देश की रक्षा के लिए तैयार रहे हैं।'

कर्नाटक और रक्षा क्षेत्र में योगदान

शिवकुमार ने कर्नाटक के रक्षा परितंत्र में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य देश के डिफेंस सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है, जहाँ बीईएमएल (BEML), डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) जैसे प्रमुख संस्थान कार्यरत हैं। उन्होंने भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के अमूल्य योगदान को भी नमन किया।

उन्होंने एक सशक्त उपमा का सहारा लेते हुए कहा कि सैनिक, युवा, महिलाएँ, किसान और करदाता — ये पाँचों हाथ की पाँच उँगलियों की तरह हैं, जो मिलकर एक मज़बूत मुट्ठी बनाते हैं।

पूर्व सैनिक परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लाखों सैनिकों के परिवार निवास करते हैं और कर्नाटक सरकार उनकी भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से सुझाव लेने और उनके हित में नीतियाँ बनाने का आश्वासन दिया।

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का संदेश

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी कारगिल के वीर नायकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, 'इन महान सैनिकों की बेमिसाल बहादुरी, हिम्मत और देशभक्ति हमारे दिलों में हमेशा के लिए बसी रहेगी। उनका बलिदान हर भारतीय को प्रेरणा देता रहेगा। देश हमारे गर्वित सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।'

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में कारगिल की विजयगाथा की प्रासंगिकता और भी गहरी हो जाती है। 26 जुलाई को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह दिवस उन जवानों की याद में समर्पित है जिन्होंने 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर भारतीय भूमि पर पुनः तिरंगा लहराया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शिवकुमार का संबोधन केवल औपचारिकता से आगे गया — उन्होंने पूर्व सैनिक परिवारों से सुझाव माँगने की बात कही, जो नीतिगत संवाद का संकेत है। गौरतलब है कि कर्नाटक में पूर्व सैनिकों की संख्या लाखों में है और उनकी पेंशन व पुनर्वास संबंधी माँगें वर्षों से लंबित हैं। रक्षा उद्योग में कर्नाटक के योगदान का उल्लेख राज्य की औद्योगिक पहचान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने की राजनीतिक रणनीति भी दर्शाता है। असली कसौटी यह होगी कि ये प्रतिबद्धताएँ ठोस नीतिगत कदमों में कब और कैसे बदलती हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कारगिल विजय दिवस क्यों मनाया जाता है?
कारगिल विजय दिवस प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की चोटियों से खदेड़कर भारतीय भूमि पर पुनः तिरंगा फहराया था। इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
बेंगलुरु में कारगिल विजय दिवस समारोह में क्या हुआ?
26 जुलाई 2025 को बेंगलुरु के नेशनल मिलिट्री मेमोरियल में आयोजित समारोह में सीएम डी.के. शिवकुमार ने 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
कारगिल युद्ध में कर्नाटक के कितने सैनिक शहीद हुए थे?
1999 के कारगिल युद्ध में कुल 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कर्नाटक के 13 जवान शामिल थे। सीएम शिवकुमार ने इन सभी वीरों को विशेष रूप से याद किया।
कर्नाटक सरकार पूर्व सैनिकों के लिए क्या करने की बात कह रही है?
सीएम शिवकुमार ने कहा कि राज्य में लाखों सैनिकों के परिवार रहते हैं और सरकार उनकी भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से सुझाव लेने और उनके हित में काम करने का आश्वासन दिया।
रक्षा क्षेत्र में कर्नाटक की क्या भूमिका है?
कर्नाटक को भारत के रक्षा उद्योग की रीढ़ माना जाता है। बीईएमएल, डीआरडीओ और इसरो जैसे प्रमुख संस्थान राज्य से संचालित होते हैं। सीएम शिवकुमार ने भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के योगदान का भी उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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