कारगिल विजय दिवस: सीएम शिवकुमार बोले — सैनिकों का बलिदान देश के साहस और गौरव की अमर नींव
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कहा कि भारतीय सैनिकों का बलिदान इस देश के साहस, स्वतंत्रता और गौरव की अटल नींव है। बेंगलुरु स्थित नेशनल मिलिट्री मेमोरियल में आयोजित स्मृति समारोह में उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों के कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री का संबोधन
शिवकुमार ने कार्यक्रम में कहा, 'हमारे सैनिकों की कुर्बानी हमारी हिम्मत, हमारी आजादी और हमारा गर्व है। सत्ताईस साल पहले, हमारे बहादुर योद्धाओं ने हिमालय में दुश्मन को हराया और तिरंगा फहराया। हमारे हीरो भले ही शहीद हो गए हों, लेकिन उनकी विरासत हमेशा रहेगी। मैं देश के लिए अपनी जान देने वाले सभी बहादुर सैनिकों को दिल से श्रद्धांजलि देता हूँ।'
उन्होंने कारगिल युद्ध की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए बताया कि उस संघर्ष में 527 सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कर्नाटक के 13 जवान भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'चाहे भारत-पाकिस्तान युद्ध हो, भारत-चीन की लड़ाई हो, या सीमा पर घुसपैठ की घटनाएँ हों — हमारे सैनिक हमेशा, हर दिन, हर पल, हिम्मत और पक्के इरादे के साथ देश की रक्षा के लिए तैयार रहे हैं।'
कर्नाटक और रक्षा क्षेत्र में योगदान
शिवकुमार ने कर्नाटक के रक्षा परितंत्र में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य देश के डिफेंस सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है, जहाँ बीईएमएल (BEML), डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) जैसे प्रमुख संस्थान कार्यरत हैं। उन्होंने भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के अमूल्य योगदान को भी नमन किया।
उन्होंने एक सशक्त उपमा का सहारा लेते हुए कहा कि सैनिक, युवा, महिलाएँ, किसान और करदाता — ये पाँचों हाथ की पाँच उँगलियों की तरह हैं, जो मिलकर एक मज़बूत मुट्ठी बनाते हैं।
पूर्व सैनिक परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लाखों सैनिकों के परिवार निवास करते हैं और कर्नाटक सरकार उनकी भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से सुझाव लेने और उनके हित में नीतियाँ बनाने का आश्वासन दिया।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का संदेश
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी कारगिल के वीर नायकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, 'इन महान सैनिकों की बेमिसाल बहादुरी, हिम्मत और देशभक्ति हमारे दिलों में हमेशा के लिए बसी रहेगी। उनका बलिदान हर भारतीय को प्रेरणा देता रहेगा। देश हमारे गर्वित सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।'
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में कारगिल की विजयगाथा की प्रासंगिकता और भी गहरी हो जाती है। 26 जुलाई को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह दिवस उन जवानों की याद में समर्पित है जिन्होंने 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर भारतीय भूमि पर पुनः तिरंगा लहराया था।