4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संविधान में समानता का संकल्प, पर ज़मीनी हकीकत का आकलन ज़रूरी: उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संविधान में समानता का संकल्प, पर ज़मीनी हकीकत का आकलन ज़रूरी: उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने तुमकुरु के दीक्षांत समारोह में संविधान की समानता और लोकतंत्र की ज़मीनी हकीकत पर सवाल उठाया। साक्षरता दर 12% से 80% तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने नए वकीलों को न्याय का प्रहरी बनने की प्रेरणा दी।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 4 जुलाई 2026 को तुमकुरु के शेट्टिहल्ली लॉ कॉलेज के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता पर जोर देती है, लेकिन समाज में इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन ज़रूरी है।
भारत की साक्षरता दर आज़ादी के समय लगभग 12% से बढ़कर आज लगभग 80% हो गई है।
देश में 1,500 से अधिक लॉ कॉलेज हैं, फिर भी अदालतों में लंबित मामलों की संख्या न्यायिक सुधारों की माँग करती है।
परमेश्वर ने साइबर अपराध को उभरती बड़ी चुनौती बताते हुए कानूनों को मज़बूत करने का आह्वान किया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 4 जुलाई 2026 को तुमकुरु के शेट्टिहल्ली स्थित एक लॉ कॉलेज के दीक्षांत समारोह में कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना समानता के आदर्श को केंद्र में रखती है, लेकिन समाज और कानूनी व्यवस्था में यह समानता किस हद तक साकार हुई है — इसका गंभीर और ईमानदार मूल्यांकन अपरिहार्य है। उन्होंने नए कानून स्नातकों से आग्रह किया कि वे अपने पेशे को महज आजीविका का साधन नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना का माध्यम मानें।

साक्षरता से संविधान तक: भारत की यात्रा

परमेश्वर ने स्वतंत्रता के बाद से देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि आज़ादी के समय भारत की साक्षरता दर मात्र लगभग 12 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने इस उपलब्धि को लोकतांत्रिक संस्थाओं की मज़बूती का प्रमाण बताया।

उन्होंने डॉ. बी. आर. अंबेडकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को एक सुदृढ़ संवैधानिक ढाँचा दिया, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। उनके शब्दों में, 'अगर संविधान कमज़ोर होता है तो लोकतंत्र भी कमज़ोर हो जाएगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

अधिकार और कर्तव्य: दोनों पक्षों की समझ ज़रूरी

उपमुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 का संदर्भ देते हुए मौलिक अधिकारों की व्याख्या की और अनुच्छेद 51ए के तहत नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लोकतंत्र तभी प्रभावशाली ढंग से कार्य कर सकता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग हों।

कानूनी पेशे में उत्कृष्टता की दरकार

परमेश्वर ने बताया कि भारत में 1,500 से अधिक लॉ कॉलेज हैं जो प्रतिवर्ष हज़ारों स्नातक तैयार करते हैं। इसके बावजूद अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या न्यायिक सुधारों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में मुवक्किल बार-बार उन्हीं चुनिंदा वकीलों पर भरोसा करते हैं जिन्होंने गहरे कानूनी ज्ञान और प्रभावी वकालत से जनता का विश्वास अर्जित किया है।

उन्होंने युवा वकीलों को प्रेरित किया कि निरंतर अध्ययन और समर्पण के ज़रिए वे भी उसी स्तर की विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कानूनी सेवाओं की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और वैश्विक मंचों पर भारतीय कानूनी विशेषज्ञों की उपस्थिति भी विस्तृत हो रही है।

साइबर अपराध: उभरती चुनौती

परमेश्वर ने चेतावनी दी कि साइबर अपराध एक गंभीर और बढ़ती हुई चुनौती के रूप में सामने आया है। उन्होंने इस क्षेत्र में कानूनों को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि डिजिटल युग में नागरिकों को प्रभावी कानूनी सुरक्षा मिल सके। गौरतलब है कि भारत वैश्विक कानूनी क्षेत्र में अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है और भारतीय कानूनी विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

आगे चलकर नए स्नातकों की भूमिका न केवल अदालती कमरों तक सीमित रहेगी, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुँचाने में भी निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 से अधिक लॉ कॉलेजों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण कानूनी प्रतिनिधित्व की खाई पाटना अभी बाकी है। साइबर अपराध पर उनकी चेतावनी समय पर है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि नीति-निर्माण में यह चिंता कानूनी सुधारों में कितनी तेज़ी से तब्दील होती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी. परमेश्वर ने तुमकुरु में क्या कहा?
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 4 जुलाई 2026 को तुमकुरु के शेट्टिहल्ली लॉ कॉलेज के दीक्षांत समारोह में कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता पर जोर देती है, लेकिन समाज और कानूनी व्यवस्था में इसकी वास्तविक स्थिति का गंभीरता से आकलन ज़रूरी है। उन्होंने नए स्नातकों को न्याय की स्थापना को अपना लक्ष्य बनाने की प्रेरणा दी।
परमेश्वर ने भारत की साक्षरता दर के बारे में क्या बताया?
उन्होंने कहा कि आज़ादी के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 12 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक ढाँचे की सफलता का प्रतीक बताया।
संविधान के किन अनुच्छेदों का उल्लेख किया गया?
परमेश्वर ने अनुच्छेद 12 से 35 के तहत मौलिक अधिकारों और अनुच्छेद 51ए के तहत नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी प्रभावी रूप से कार्य करता है जब नागरिक दोनों को स्पष्ट रूप से समझें।
भारत में लंबित अदालती मामलों पर परमेश्वर ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि भारत में 1,500 से अधिक लॉ कॉलेज प्रतिवर्ष हज़ारों स्नातक तैयार करते हैं, फिर भी अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। यह स्थिति और अधिक न्यायिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
साइबर अपराध पर उपमुख्यमंत्री की क्या चेतावनी थी?
परमेश्वर ने साइबर अपराध को एक बड़ी और उभरती चुनौती बताया और कहा कि इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानूनों को और मज़बूत करना ज़रूरी है। उन्होंने युवा वकीलों से इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर का ऐलान: किसानों और भूमि अधिकारों को मिलेगा न्याय, गृह मंत्री कार्यकाल में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी उपलब्धि
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले