राजू वाघमारे का आईपीएल टिकट विवाद पर तंज: कांग्रेस का पुराना वीआईपी कल्चर
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक में आईपीएल टिकट विवाद बढ़ता जा रहा है।
- राजू वाघमारे ने कांग्रेस के वीआईपी कल्चर पर हमला किया है।
- महाराष्ट्र में विधायक खुद टिकट लेते हैं।
- यूबीटी कांग्रेस के खिलाफ अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
- आदित्य ठाकरे का मोहित कंबोज की पार्टी में जाना विवादास्पद है।
मुंबई, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में आईपीएल वीआईपी टिकटों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस संदर्भ में शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी का वीआईपी कल्चर से पुराना संबंध है।
राजू वाघमारे ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा, "आईपीएल अब भारत में अत्यधिक लोकप्रिय हो चुका है। जिस राज्य में आईपीएल के मैच होते हैं, वहां की टीम होती है। विधायक जो टिकट की मांग कर रहे हैं, उन्हें भी मैच देखने का अधिकार है, लेकिन यह केवल सरकार का निर्णय है कि उन्हें टिकट देना चाहिए या नहीं।"
उन्होंने यह भी कहा, "महाराष्ट्र में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। महाराष्ट्र के विधायक अपने आप ही टिकट लेकर मैच देखते हैं। वहीं, कांग्रेस का जो कल्चर है, वो हमेशा से ही वीआईपी कल्चर रहा है। कांग्रेस के लोग इस वीआईपी कल्चर के तहत मांग करते हैं। हमारे लोग महाराष्ट्र में ऐसी किसी मांग को नहीं उठाते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने ऐसी किसी चीज को स्वीकार नहीं किया है।"
भाजपा नेता मोहित कंबोज की बेटी के जन्मदिन पार्टी में शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे के शामिल होने पर उन्होंने कहा, "मेरे ख्याल में उद्धव ठाकरे को भाजपा का सहारा है। मोहित कंबोज के अलावा कोई अन्य नेता या व्यक्ति जो देवेंद्र फडणवीस के करीब हो, यूबीटी के नजर में नहीं आ रहा है। इसलिए आदित्य ठाकरे के माध्यम से उन्हें वहां भेजकर भाजपा की दिशा में रास्ता बनाने का प्रयास यूबीटी कर रही है।"
उन्होंने आगे कहा, "यूबीटी के सामने कोई अन्य विकल्प नहीं है। उनके पास लोग नहीं हैं। महाराष्ट्र के लोग उन्हें नकार चुके हैं। सभी लोग हमारी शिवसेना के पास आ रहे हैं। ऐसे में यूबीटी के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। अगर यूबीटी ऐसा प्रयास नहीं करेगी, तो उनके पास कोई अन्य सहारा नहीं है। वहीं, मोहित कंबोज ने ठाकरे परिवार के खिलाफ जितनी कड़वी बातें की हैं, उसके बाद आदित्य ठाकरे का अचानक वहां जाना बहुत ही आश्चर्यजनक है। मेरा मानना है कि आदित्य ठाकरे का वहां जाना संजय राउत को पसंद नहीं आया है।