पाकिस्तानी हैंडलर 'राणा' ने कर्नाटक के युवकों को 50-60 सदस्यों का ग्रुप बनाने का दिया था आदेश: तुमकुरु पुलिस जांच
सारांश
मुख्य बातें
तुमकुरु पुलिस द्वारा उजागर किए गए कथित आतंक-संबद्ध सोशल मीडिया नेटवर्क की जांच में सोमवार को बड़ा खुलासा हुआ — पाकिस्तान में बैठे हैंडलर 'राणा' ने गिरफ्तार युवकों को 50 से 60 सदस्यों का एक संगठित ग्रुप तैयार करने और उन्हें प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, इसके बदले असीमित आर्थिक सहायता का भी वादा किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
इस मामले में तुमकुरु निवासी अल्लाबकाश (23 वर्ष) और दावणगेरे निवासी जमीर खान (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को पाकिस्तान में मौजूद एक व्यक्ति से कथित संबंध के आरोप में गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले आरोपियों में से एक फरार था और केंद्रीय खुफिया सूचना के आधार पर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर दोनों को पकड़ा गया।
कैसे हुआ कट्टरपंथीकरण
जांचकर्ताओं के अनुसार, हैंडलर 'राणा' ने कथित तौर पर करीब एक महीने पहले इंस्टाग्राम के जरिए दोनों युवकों से अलग-अलग संपर्क साधा। शुरुआत में इस्लाम और धार्मिक शिक्षाओं से जुड़ी सामग्री साझा की गई, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत को एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप पर स्थानांतरित कर दिया गया। लगभग 20 दिनों तक चली इस बातचीत में राणा ने कथित तौर पर भड़काऊ नैरेटिव, बदले की भावना और सामुदायिक एकजुटता के नाम पर युवकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।
पुणे हत्याकांड का संदर्भ और बड़े नेटवर्क का संदेह
जांच में यह भी सामने आया है कि राणा ने कथित तौर पर पुणे में एक धर्मगुरु की हत्या का उल्लेख करते हुए बदले की बात कही और ऐसी घटनाओं के लिए 'तैयारी' पर चर्चा की। पुलिस को संदेह है कि राणा के देशभर में फॉलोअर्स हैं और उसने गिरफ्तार युवकों को एक बड़े नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की थी।
डिजिटल साक्ष्य और जांच का विस्तार
अधिकारी अब मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रहे हैं ताकि बातचीत की पूरी श्रृंखला का पुनर्निर्माण किया जा सके। जांच का दायरा यह पता लगाने के लिए भी बढ़ाया गया है कि क्या कथित नेटवर्क के तहत अन्य युवकों को भी निशाना बनाया गया या भर्ती की गई।
आगे की राह
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्रीय प्रश्न यह है कि 50-60 सदस्यों का ग्रुप बनाने का निर्देश किसी बड़ी सुनियोजित योजना का हिस्सा था या नहीं, और क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कोशिशें की गई थीं। यह मामला सोशल मीडिया के जरिए सीमापार कट्टरपंथीकरण के बढ़ते खतरे की ओर एक गंभीर संकेत है।