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काशी भीड़ प्रबंधन: 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' से तैयार होगा स्मार्ट मोबिलिटी रोडमैप

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काशी भीड़ प्रबंधन: 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' से तैयार होगा स्मार्ट मोबिलिटी रोडमैप

सारांश

काशी की संकरी गलियाँ और बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ — यह टकराव अब नीतिगत मंच पर आ गया है। 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' के ज़रिए विशेषज्ञ, स्टार्टअप और प्रशासन मिलकर वह रोडमैप तैयार करेंगे जो विरासत को बचाते हुए आधुनिक शहर की माँग पूरी करे।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री ए.के.
शर्मा ने 19 जुलाई को वाराणसी में 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' कार्यक्रम को संबोधित किया।
काशी में 2014 के बाद से बुनियादी ढाँचे के विस्तार के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे भीड़ प्रबंधन की चुनौती बढ़ी है।
यह पहल विशेषज्ञों, स्टार्टअप, नीति-निर्माताओं और प्रशासन को एक मंच पर लाएगी।
राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने नवाचार-आधारित शहरी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
पहल से प्राप्त सुझाव काशी के भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सतत शहरी विकास की भविष्य की नीति का आधार बनेंगे।

उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने 19 जुलाई को वाराणसी में आयोजित 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' कार्यक्रम में कहा कि काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक भीड़ प्रबंधन, स्मार्ट मोबिलिटी और डेटा-आधारित शहरी समाधान विकसित करना अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल से प्राप्त सुझाव काशी के भविष्य की शहरी नीति का आधार बनेंगे।

काशी की बढ़ती भीड़ और नई चुनौतियाँ

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने के बाद शहर में आधारभूत संरचना, सड़कों, घाटों, पर्यटन और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इसके परिणामस्वरूप देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे भीड़ प्रबंधन और सुगम आवागमन जैसी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का समाधान अब केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है।

सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज: एक साझा मंच

शर्मा ने बताया कि 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, स्टार्टअप और प्रशासन को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा, जहाँ नवाचार, तकनीक और डेटा-आधारित प्रबंधन के ज़रिए काशी के यातायात, भीड़ नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएँगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विकास का हर मॉडल विरासत संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करने वाला होना चाहिए, क्योंकि काशी की संकरी गलियाँ और प्राचीन स्वरूप उसकी वैश्विक पहचान हैं।

प्रशासन की राय: नवाचार अनिवार्य

कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने भी विचार रखे। दोनों अधिकारियों ने कहा कि बनारस की तंग गलियों, घनी आबादी और लगातार बढ़ते श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दबाव को देखते हुए नवाचार-आधारित शहरी समाधान विकसित करना समय की माँग है। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए जो विरासत संरक्षण, नागरिक सुविधा और आधुनिक शहरी प्रबंधन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर सके।

आगे की राह

इस पहल से प्राप्त सुझाव भविष्य में काशी के भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सतत शहरी विकास की दीर्घकालिक रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई धार्मिक और पर्यटन नगर बढ़ती आबादी और पर्यटक दबाव के बीच आधुनिक शहरी प्रबंधन की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि काशी इस दिशा में एक मॉडल शहर के रूप में उभर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि काशी जैसे शहरों के लिए 'स्मार्ट सिटी मिशन' के तहत पहले भी कई योजनाएँ बनी हैं जो ज़मीन पर पूरी तरह नहीं उतर पाईं। विरासत और आधुनिकता के बीच संतुलन का नारा नया नहीं है, लेकिन काशी की संकरी गलियों में ड्रोन-निगरानी या डेटा-आधारित यातायात प्रबंधन जैसे समाधान व्यावहारिक रूप से कितने कारगर होंगे, यह स्पष्ट नहीं है। सरकार को चाहिए कि इस चैलेंज के नतीजों की समयबद्ध और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह भी महज एक नीतिगत संगोष्ठी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' क्या है और इसका काशी से क्या संबंध है?
'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' एक नवाचार-केंद्रित पहल है जिसे वाराणसी में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य काशी के भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सतत शहरी विकास के लिए डेटा-आधारित समाधान तैयार करना है। यह विशेषज्ञों, स्टार्टअप और प्रशासन को एक साझा मंच देता है।
काशी में भीड़ प्रबंधन की समस्या क्यों बढ़ी है?
2014 के बाद वाराणसी में आधारभूत संरचना, घाट, सड़क और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। शहर की संकरी गलियाँ और घनी आबादी इस बढ़े हुए दबाव को पारंपरिक तरीकों से संभालने में अक्षम साबित हो रही हैं।
इस पहल में कौन-कौन शामिल हैं?
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, वाराणसी मंडल के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने भाग लिया। इसके अलावा विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और स्टार्टअप भी इस मंच का हिस्सा हैं।
क्या इस पहल से काशी की विरासत प्रभावित होगी?
मंत्री ए.के. शर्मा ने स्पष्ट किया कि विकास का हर मॉडल विरासत संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने वाला होगा। काशी की संकरी गलियाँ और प्राचीन स्वरूप उसकी पहचान हैं और इन्हें बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
इस चैलेंज के सुझावों का उपयोग कैसे होगा?
इस पहल से प्राप्त सुझाव भविष्य में काशी की भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सतत शहरी विकास की दीर्घकालिक रणनीति तय करने में उपयोग किए जाएँगे। ये सुझाव नीति-निर्माण का आधार बनेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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