कटनी के 200 साल पुराने मां जालपा देवी मंदिर में 64 योगिनियाँ, नवरात्र पर उमड़ा आस्था का सैलाब
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के कटनी शहर के मध्य स्थित मां जालपा देवी मंदिर में नवरात्र 2026 के पहले दिन रविवार को श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। लगभग 200 वर्ष पुराना यह मंदिर न केवल कटनी शहर, बल्कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में मां जालपा देवी के साथ 64 योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व प्रदान करती हैं।
मंदिर का इतिहास और स्थापना
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, लगभग 250 वर्ष पहले रीवा जिले के एक छोटे से गांव से बिहारीलाल पंडा कटनी पहुंचे थे। उस समय जिसे आज जालपा वार्ड के नाम से जाना जाता है, वहां दूर-दूर तक घना बांस का जंगल था। मान्यता है कि स्वयं मां जालपा देवी ने उन्हें वहाँ आने के लिए प्रेरित किया था।
जब बिहारीलाल पंडा ने उस वन-स्थल की सफाई आरंभ की, तो वहाँ एक शिला के रूप में मां जालपा देवी की प्रतिमा प्रकट हुई। तत्पश्चात विधि-विधान से प्रतिष्ठा कराई गई और एक छोटी-सी मढ़िया में मां को विराजमान किया गया। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं की भावनाओं का बड़ा केंद्र बनता चला गया।
मंदिर का विस्तार और वर्तमान स्वरूप
मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने बताया, 'पहले यहां जंगल हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां लगातार विस्तार होता जा रहा है और मंदिर का निर्माण होता जा रहा है।' उन्होंने जानकारी दी कि यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है।
करीब 50 वर्ष पहले मंदिर समिति ने जयपुर से मां जालपा, मां कालका और मां शारदा की प्रतिमाएं मंगवाकर स्थापित कराईं। साथ ही परिसर में 64 योगिनियों की भी स्थापना की गई। मंदिर में मां काली, भगवान हनुमान और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। वर्षों से यहाँ अखंड ज्योति प्रज्वलित है।
नवरात्र पर श्रद्धालुओं का उत्साह
नवरात्र के प्रथम दिन मंदिर में कटनी शहर सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। दर्शन के लिए आए निखिल ने बताया कि मंदिर में मां जालपा, मां कालका और मां शारदा समेत कुल 64 योगिनियाँ स्थापित हैं तथा शाम की आरती के समय यहाँ का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है।
पहली बार मंदिर पहुंचीं कशिश वर्मा ने कहा, 'यहां कटनी के मंदिर में मेरे माता-पिता लगातार दर्शन के लिए आते रहे हैं। मैं पहली बार यहां आई हूं। यहां बहुत अच्छा लग रहा है।' पुजारी लालजी पंडा के अनुसार नवरात्र के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से परिवार सहित श्रद्धालु मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं।
आम जनता पर असर और मान्यताएं
यह मंदिर विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और विवाह संबंधी मन्नतों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। नवरात्र ही नहीं, पूरे वर्ष भर यहाँ श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में है जब मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों पर नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मां जालपा देवी मंदिर उस परंपरा की एक जीवंत कड़ी है जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र के लोगों की आस्था को जोड़े हुए है।
मंदिर का विस्तार जारी है और आने वाले नवरात्र पर्व के शेष दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।