11 अक्टूबर 2026
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कटनी के 200 साल पुराने मां जालपा देवी मंदिर में 64 योगिनियाँ, नवरात्र पर उमड़ा आस्था का सैलाब

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कटनी के 200 साल पुराने मां जालपा देवी मंदिर में 64 योगिनियाँ, नवरात्र पर उमड़ा आस्था का सैलाब

सारांश

कटनी के 200 साल पुराने मां जालपा देवी मंदिर में नवरात्र 2026 के पहले दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। बांस के घने जंगल में शिला रूप में प्रकट हुईं मां जालपा देवी के इस मंदिर में 64 योगिनियाँ समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं और अखंड ज्योति वर्षों से प्रज्वलित है।

मुख्य बातें

मां जालपा देवी मंदिर, कटनी लगभग 200 वर्ष पुराना है और मध्य प्रदेश में आस्था का प्रमुख केंद्र है।
नवरात्र 2026 के पहले दिन रविवार, 11 अक्टूबर को कटनी व आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
मंदिर परिसर में मां जालपा, मां कालका, मां शारदा सहित 64 योगिनियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
करीब 250 वर्ष पहले रीवा के बिहारीलाल पंडा को शिला रूप में मां जालपा देवी की प्रतिमा मिली थी।
लगभग 50 वर्ष पहले मंदिर समिति ने जयपुर से नई प्रतिमाएं मंगवाकर 64 योगिनियों की भी स्थापना कराई।
मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है और यह मनोकामना पूर्ति व विवाह मन्नत के लिए प्रसिद्ध है।

मध्य प्रदेश के कटनी शहर के मध्य स्थित मां जालपा देवी मंदिर में नवरात्र 2026 के पहले दिन रविवार को श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। लगभग 200 वर्ष पुराना यह मंदिर न केवल कटनी शहर, बल्कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में मां जालपा देवी के साथ 64 योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व प्रदान करती हैं।

मंदिर का इतिहास और स्थापना

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, लगभग 250 वर्ष पहले रीवा जिले के एक छोटे से गांव से बिहारीलाल पंडा कटनी पहुंचे थे। उस समय जिसे आज जालपा वार्ड के नाम से जाना जाता है, वहां दूर-दूर तक घना बांस का जंगल था। मान्यता है कि स्वयं मां जालपा देवी ने उन्हें वहाँ आने के लिए प्रेरित किया था।

जब बिहारीलाल पंडा ने उस वन-स्थल की सफाई आरंभ की, तो वहाँ एक शिला के रूप में मां जालपा देवी की प्रतिमा प्रकट हुई। तत्पश्चात विधि-विधान से प्रतिष्ठा कराई गई और एक छोटी-सी मढ़िया में मां को विराजमान किया गया। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं की भावनाओं का बड़ा केंद्र बनता चला गया।

मंदिर का विस्तार और वर्तमान स्वरूप

मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने बताया, 'पहले यहां जंगल हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां लगातार विस्तार होता जा रहा है और मंदिर का निर्माण होता जा रहा है।' उन्होंने जानकारी दी कि यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है।

करीब 50 वर्ष पहले मंदिर समिति ने जयपुर से मां जालपा, मां कालका और मां शारदा की प्रतिमाएं मंगवाकर स्थापित कराईं। साथ ही परिसर में 64 योगिनियों की भी स्थापना की गई। मंदिर में मां काली, भगवान हनुमान और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। वर्षों से यहाँ अखंड ज्योति प्रज्वलित है।

नवरात्र पर श्रद्धालुओं का उत्साह

नवरात्र के प्रथम दिन मंदिर में कटनी शहर सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। दर्शन के लिए आए निखिल ने बताया कि मंदिर में मां जालपा, मां कालका और मां शारदा समेत कुल 64 योगिनियाँ स्थापित हैं तथा शाम की आरती के समय यहाँ का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है।

पहली बार मंदिर पहुंचीं कशिश वर्मा ने कहा, 'यहां कटनी के मंदिर में मेरे माता-पिता लगातार दर्शन के लिए आते रहे हैं। मैं पहली बार यहां आई हूं। यहां बहुत अच्छा लग रहा है।' पुजारी लालजी पंडा के अनुसार नवरात्र के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से परिवार सहित श्रद्धालु मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं।

आम जनता पर असर और मान्यताएं

यह मंदिर विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और विवाह संबंधी मन्नतों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। नवरात्र ही नहीं, पूरे वर्ष भर यहाँ श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में है जब मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों पर नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मां जालपा देवी मंदिर उस परंपरा की एक जीवंत कड़ी है जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र के लोगों की आस्था को जोड़े हुए है।

मंदिर का विस्तार जारी है और आने वाले नवरात्र पर्व के शेष दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मध्य प्रदेश के उस विशाल धार्मिक पर्यटन तंत्र की एक झलक है जो नवरात्र के नौ दिनों में लाखों करोड़ रुपये की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गतिशील करता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष जोर दे रही है, लेकिन छोटे शहरों के ऐतिहासिक मंदिरों के अवसंरचना विकास और श्रद्धालु प्रबंधन की व्यवस्था अभी भी असंगठित बनी हुई है। 200 साल पुराने इस मंदिर की विरासत और 64 योगिनियों की दुर्लभ स्थापना इसे पुरातात्त्विक व सांस्कृतिक संरक्षण के लायक बनाती है — जिस पर ध्यान देना अभी बाकी है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां जालपा देवी मंदिर कटनी कहाँ स्थित है और कितना पुराना है?
मां जालपा देवी मंदिर मध्य प्रदेश के कटनी शहर के मध्य, जालपा वार्ड में स्थित है। मंदिर के पुजारी लालजी पंडा के अनुसार यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है, जबकि स्थानीय बुजुर्गों की मान्यता के अनुसार इसका इतिहास करीब 250 वर्ष पुराना है।
कटनी के मां जालपा देवी मंदिर में 64 योगिनियाँ क्यों विशेष हैं?
कटनी के इस मंदिर में मां जालपा, मां कालका और मां शारदा के साथ-साथ 64 योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इसे एक विशिष्ट शक्तिपीठ स्वरूप देती हैं। लगभग 50 वर्ष पहले मंदिर समिति ने जयपुर से ये प्रतिमाएं मंगवाकर विधि-विधान से स्थापित कराई थीं।
मां जालपा देवी मंदिर कटनी की स्थापना कैसे हुई?
स्थानीय मान्यता के अनुसार करीब 250 वर्ष पहले रीवा जिले के बिहारीलाल पंडा मां जालपा देवी की प्रेरणा से कटनी पहुंचे और घने बांस के जंगल की सफाई करने पर उन्हें वहाँ एक शिला के रूप में मां की प्रतिमा मिली। तत्पश्चात विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा कर एक छोटी मढ़िया में मां को विराजमान किया गया, जो धीरे-धीरे भव्य मंदिर के रूप में विकसित हुई।
नवरात्र 2026 पर कटनी के मां जालपा देवी मंदिर में कैसा माहौल रहा?
नवरात्र 2026 के पहले दिन, 11 अक्टूबर रविवार को मंदिर में कटनी शहर सहित मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से परिवार सहित श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। शाम की आरती के समय मंदिर में विशेष रूप से भक्तिमय वातावरण रहता है।
मां जालपा देवी मंदिर कटनी किस चीज़ के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है?
यह मंदिर विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और विवाह संबंधी मन्नतों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है और नवरात्र के अलावा पूरे वर्ष भर यहाँ श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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