केरल CM वी.डी. सतीशन ने तिरुवनंतपुरम में फहराया तिरंगा, राज्य समारोह में वंदे मातरम अनुपस्थित
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 15 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस की सलामी ली और राष्ट्रगान की धुन पर तिरंगा फहराया। इस तरह वे पिनराई विजयन के बाद एक दशक में केरल के मुख्य 15 अगस्त समारोह की अध्यक्षता करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने। हालांकि, इस राज्य स्तरीय आयोजन में वंदे मातरम का गायन नहीं हुआ — जो इस समारोह का सबसे चर्चित पहलू बन गया।
नई सरकार, नया समारोह
अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत के बाद सतीशन ने पदभार संभाला था, जिससे विजयन का लंबा कार्यकाल समाप्त हुआ। सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित औपचारिक परेड का निरीक्षण करने के बाद सतीशन ने एक विस्तृत भाषण दिया, जिसे राज्य सरकार ने महज औपचारिकता नहीं, बल्कि नई सरकार के संवैधानिक और राजनीतिक मूल्यों की घोषणा बताया।
वंदे मातरम विवाद: दो समारोह, दो स्वर
राज्य स्तरीय समारोह में वंदे मातरम का गायन नहीं हुआ। यह गीत राज्य भर में सरकार द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों और स्कूली समारोहों में भी अनुपस्थित रहा। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित तिरुवनंतपुरम नगर निगम में उसी दिन आयोजित समारोह में वंदे मातरम गाया गया — जो राजधानी में एक साथ हुए दो आयोजनों के अलग-अलग राजनीतिक स्वरूप को उजागर करता है।
कोझिकोड में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। जहाँ UDF पार्षदों ने राष्ट्रगान में भाग लिया, वहीं BJP सदस्यों ने वंदे मातरम गाया। यह विभाजन उस राज्य में और अधिक उजागर हुआ, जहाँ दोनों मोर्चों और BJP के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है।
सतीशन के भाषण के मुख्य बिंदु
सतीशन ने अपने भाषण में हाल ही में हुई आपदाओं में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घोषणा की कि उनकी सरकार बाढ़ से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक प्रणाली लागू करेगी तथा पीड़ितों के परिवारों को सहायता प्रदान करेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1947 के ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस संदेश का हवाला दिया — विशेष रूप से उस प्रतिज्ञा का, कि जब तक लोग कष्ट झेलते रहेंगे, देश का काम समाप्त नहीं हो सकता। सतीशन ने इस संदेश को केरल की मौजूदा चुनौतियों — बेरोज़गारी, गरीबी, कृषि संकट, श्रमिकों और तटीय समुदायों की समस्याओं तथा हाशिए पर पड़े वर्गों की कठिनाइयों — से जोड़ा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हालिया विवाद का स्पष्ट संदर्भ देते हुए सतीशन ने जातिगत पूर्वाग्रह और अस्पृश्यता की वापसी के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर आसीन एक वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को भी जाति के आधार पर अपमानित किया गया। उन्होंने कल्याणकारी उपायों को दान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकार बताया।
युवाओं और राज्यव्यापी समारोहों पर जोर
सतीशन ने केरल के युवाओं को राजनीतिक रूप से जागरूक और देश के लिए सुधारक शक्ति बनने में सक्षम बताया। शेष 13 जिला मुख्यालयों में उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने स्वतंत्रता दिवस परेड में सलामी ली — जो नई UDF सरकार के तहत पहले राज्यव्यापी समारोहों का प्रतीक है।
आगे क्या
वंदे मातरम के गायन को लेकर उठा विवाद राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। BJP ने इसे राष्ट्रीय भावना के प्रति उदासीनता बताया है, जबकि UDF सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा केरल की राजनीति में केंद्रीय बहस का विषय बन सकता है।