केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल की वकील ने सबूतों को बताया कमज़ोर, कस्टडी विस्तार का करेंगे विरोध
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल की पैरवी कर रहे अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने 28 जून 2026 को स्पष्ट किया कि वे अपनी मुवक्किल की पुलिस कस्टडी बढ़ाए जाने का पुरज़ोर विरोध करेंगे। उनका तर्क है कि अब तक प्रस्तुत साक्ष्य हत्या की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और आरोपों को विधिसम्मत जाँच तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सिद्ध किया जाना चाहिए।
कस्टडी विस्तार पर बचाव पक्ष का रुख
सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन की पुलिस कस्टडी की अवधि समाप्त होने के अवसर पर अधिवक्ता श्रीवास्तव ने कहा, 'मेरी कोशिश रहेगी कि कस्टडी न बढ़े। आरोपी ने हर तरह से पुलिस का सहयोग किया है और सभी सवालों के जवाब दिए हैं। परिवार के सदस्यों ने भी अपना बयान दर्ज करवा दिया है। पुलिस को पूछताछ के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है।' उन्होंने यह भी कहा कि 20 वर्षीया सिया की उम्र को देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि न्यायालय उसे न्यायिक हिरासत में भेजेगा, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
साक्ष्यों की मज़बूती पर सवाल
श्रीवास्तव ने मामले के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, 'इस मामले में तथ्य कोई साफ संकेत नहीं देते। पहली नज़र में ऐसा कोई बयान नहीं है जो हत्या की दिशा में इशारा करता हो। कुछ शक के अलावा मुझे इसमें ऐसा कुछ नहीं दिखता जो ऐसे नतीजे का समर्थन करता हो।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि सिया वास्तव में किसी को नुकसान पहुँचाना चाहती, तो वह उसी व्यक्ति को एक ही स्थान पर चार बार नहीं ले जाती — यह बात उन्हें 'मुमकिन नहीं लगती।'
दुर्घटना के नज़रिए से देख रहे हैं बचाव पक्ष
अधिवक्ता श्रीवास्तव ने घटना को दुर्घटना के दृष्टिकोण से देखने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मीम्स का भी उल्लेख किया, जिनमें पहाड़ी चोटी पर जाने को लेकर चुटकी ली जा रही है, और कहा कि वे इस मामले को उसी नज़रिए से देखते हैं।
एफआईआर में दोस्ती का ज़िक्र — बचाव का अहम बिंदु
बचाव पक्ष के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने स्वयं एफआईआर में उल्लेख किया है कि चेतन और सिया दोस्त थे। श्रीवास्तव के अनुसार, 'अगर शिकायतकर्ता और परिजनों को उनकी दोस्ती के बारे में जानकारी थी और यह एक सामान्य दोस्ती थी, तो उस पर कोई आपत्ति नहीं की गई। यदि यह सामान्य दोस्ती नहीं होती, तो संभव है कि इस पर आपत्ति जताई जाती।' यह बिंदु बचाव की रणनीति का केंद्रीय तर्क बन सकता है।
परिवार की पूछताछ और आगे की रणनीति
पुलिस द्वारा सिया के भाई और माता-पिता को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर अधिवक्ता ने कहा कि परिवार ने सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी रणनीति आरोपी के बचाव के हर पहलू को अदालत के सामने रखना है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके। मामले में आगे की सुनवाई और न्यायालय का फैसला यह तय करेगा कि पुलिस की जाँच किस दिशा में जाती है।