कच्चा तेल ₹99/बैरल से नीचे, फिर भी पेट्रोल ₹102 — खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा तीखा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 26 मई 2025 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह सवाल उठाते हुए कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल 2014 के मुकाबले सस्ता हो चुका है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम जनता के लिए और महंगी क्यों हो गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने की 12वीं वर्षगाँठ के दिन यह हमला बोला, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे उपलब्धियों के उत्सव के रूप में मना रही थी।
खड़गे के आँकड़े और दावे
खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो के आँकड़ों का हवाला दिया। उनके अनुसार, 26 मई 2014 को जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, उस समय भारतीय बास्केट का कच्चा तेल 108.05 डॉलर प्रति बैरल था और डॉलर-रुपया विनिमय दर 58.59 रुपए थी। तब पेट्रोल 71.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल 56.71 रुपए प्रति लीटर पर उपलब्ध था।
खड़गे ने आगे कहा कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 99 डॉलर प्रति बैरल से कम है, बावजूद इसके पेट्रोल बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर पर पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल करीब 42.8 प्रतिशत और डीजल करीब 67.9 प्रतिशत महंगा हो चुका है।
महंगाई का व्यापक असर
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हर अर्थशास्त्री जानता है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता — यह परिवहन लागत से लेकर खाद्य वस्तुओं तक हर क्षेत्र को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब कच्चा तेल सस्ता हुआ है, तो जनता को राहत क्यों नहीं दी गई।
सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी
इस बीच, गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने मंगलवार को सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का ऐलान किया। यह पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की वृद्धि की गई है, जिसके बाद अब दिल्ली में सीएनजी 83.09 रुपए प्रति किलो मिलेगी, जो पहले 81.09 रुपए प्रति किलो थी।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में आया है जब BJP मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मना रही है। कांग्रेस ने इस अवसर को सरकार की नीतियों की समीक्षा के मंच के रूप में इस्तेमाल किया है। खड़गे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या!' — यह कहावत उन्होंने सरकार के आँकड़ों को ही उसके विरुद्ध प्रस्तुत करते हुए इस्तेमाल की।
ईंधन मूल्य निर्धारण पर यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, खासकर तब जब IGL की ओर से सीएनजी दरों में लगातार बढ़ोतरी से दिल्ली-NCR के लाखों वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।