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कच्चा तेल ₹99/बैरल से नीचे, फिर भी पेट्रोल ₹102 — खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा तीखा निशाना

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कच्चा तेल ₹99/बैरल से नीचे, फिर भी पेट्रोल ₹102 — खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा तीखा निशाना

सारांश

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के दिन कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने सरकार के अपने आँकड़ों से पूछा — कच्चा तेल 2014 से सस्ता, फिर पेट्रोल 42.8% और डीजल 67.9% महंगा क्यों? साथ ही IGL ने दो हफ्ते में चौथी बार सीएनजी के दाम बढ़ाए।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 26 मई 2025 को एक्स पर पोस्ट कर मोदी सरकार पर ईंधन महंगाई को लेकर हमला बोला।
खड़गे के अनुसार, 2014 में कच्चा तेल 108.05 डॉलर/बैरल था, अब 99 डॉलर/बैरल से कम — फिर भी पेट्रोल 71.51 से बढ़कर ₹102.12 और डीजल 56.71 से ₹95.20 हो गया।
कांग्रेस का दावा — पेट्रोल करीब 42.8% और डीजल करीब 67.9% महंगा हुआ, जबकि कच्चा तेल सस्ता हुआ।
IGL ने दिल्ली में सीएनजी ₹2/किलो बढ़ाई; नई कीमत ₹83.09/किलो — दो हफ्तों में चौथी बढ़ोतरी ।
खड़गे ने सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए जनता को राहत न देने पर सवाल उठाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 26 मई 2025 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह सवाल उठाते हुए कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल 2014 के मुकाबले सस्ता हो चुका है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम जनता के लिए और महंगी क्यों हो गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने की 12वीं वर्षगाँठ के दिन यह हमला बोला, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे उपलब्धियों के उत्सव के रूप में मना रही थी।

खड़गे के आँकड़े और दावे

खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो के आँकड़ों का हवाला दिया। उनके अनुसार, 26 मई 2014 को जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, उस समय भारतीय बास्केट का कच्चा तेल 108.05 डॉलर प्रति बैरल था और डॉलर-रुपया विनिमय दर 58.59 रुपए थी। तब पेट्रोल 71.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल 56.71 रुपए प्रति लीटर पर उपलब्ध था।

खड़गे ने आगे कहा कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 99 डॉलर प्रति बैरल से कम है, बावजूद इसके पेट्रोल बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर पर पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल करीब 42.8 प्रतिशत और डीजल करीब 67.9 प्रतिशत महंगा हो चुका है।

महंगाई का व्यापक असर

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हर अर्थशास्त्री जानता है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता — यह परिवहन लागत से लेकर खाद्य वस्तुओं तक हर क्षेत्र को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब कच्चा तेल सस्ता हुआ है, तो जनता को राहत क्यों नहीं दी गई।

सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी

इस बीच, गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने मंगलवार को सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का ऐलान किया। यह पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की वृद्धि की गई है, जिसके बाद अब दिल्ली में सीएनजी 83.09 रुपए प्रति किलो मिलेगी, जो पहले 81.09 रुपए प्रति किलो थी।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में आया है जब BJP मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मना रही है। कांग्रेस ने इस अवसर को सरकार की नीतियों की समीक्षा के मंच के रूप में इस्तेमाल किया है। खड़गे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या!' — यह कहावत उन्होंने सरकार के आँकड़ों को ही उसके विरुद्ध प्रस्तुत करते हुए इस्तेमाल की।

ईंधन मूल्य निर्धारण पर यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, खासकर तब जब IGL की ओर से सीएनजी दरों में लगातार बढ़ोतरी से दिल्ली-NCR के लाखों वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ईंधन मूल्य निर्धारण की असल जटिलता इससे कहीं गहरी है — केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य VAT, और तेल विपणन कंपनियों के पुराने घाटे की भरपाई जैसे कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं, जिनका उल्लेख इस बहस में अक्सर नहीं होता। यह सच है कि सरकार ने 2022 में उत्पाद शुल्क में कटौती की थी, लेकिन कच्चे तेल की गिरती कीमतों का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया गया — यह सवाल वैध है। IGL की लगातार चौथी सीएनजी बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि ईंधन महंगाई केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि दिल्ली-NCR के आम नागरिक की रोज़मर्रा की वास्तविकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़गे ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि 2014 की तुलना में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल करीब 42.8% और डीजल करीब 67.9% महंगा हो गया है। उन्होंने सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए जनता को राहत न देने पर सवाल उठाए।
2014 और अभी की ईंधन कीमतों में क्या फर्क है?
26 मई 2014 को पेट्रोल 71.51 रुपए/लीटर और डीजल 56.71 रुपए/लीटर था, जबकि तब कच्चा तेल 108.05 डॉलर/बैरल था। अब कच्चा तेल 99 डॉलर/बैरल से कम है, लेकिन पेट्रोल 102.12 रुपए/लीटर और डीजल 95.20 रुपए/लीटर पर पहुँच गया है।
IGL ने दिल्ली में सीएनजी कितनी बढ़ाई है?
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली में सीएनजी ₹2 प्रति किलो बढ़ाई है, जिसके बाद नई कीमत ₹83.09 प्रति किलो हो गई है। यह पिछले दो हफ्तों से कम समय में चौथी बढ़ोतरी है।
क्या सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई प्रतिक्रिया दी?
खड़गे के हमले के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP नेता मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल की महंगाई का आम जनता पर क्या असर होता है?
खड़गे के अनुसार, ईंधन महंगाई का असर परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं तक हर क्षेत्र पर पड़ता है। इससे आम आदमी पर महंगाई का समग्र बोझ बढ़ता है, क्योंकि माल ढुलाई और उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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