पेट्रोल-डीजल 10 दिनों में चौथी बार महंगा: राहुल गांधी और खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 25 मई 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर मोदी सरकार को महंगाई के मुद्दे पर घेरा। कांग्रेस के अनुसार, 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इज़ाफा किया गया है।
राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला। पेट्रोल-डीज़ल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे।' उन्होंने दावा किया कि चुनाव समाप्त होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम ₹8 रुपए बढ़ा दिए गए। राहुल ने आरोप लगाया कि यह बढ़ोतरी आगे भी जारी रहेगी और सरकार का एकमात्र काम 'चुनाव में वादे और बाकी समय जनता की जेब पर वार' है।
खड़गे के दावे और आँकड़े
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि ताज़ा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल में ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल में ₹7.53 प्रति लीटर की कुल वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में पेट्रोल ₹71.41 प्रति लीटर था, जो 2026 में बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गया — यानी 43.01% की वृद्धि। डीजल की कीमत ₹56.71 से बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर पहुँची, जो 67.87% की बढ़ोतरी है।
खड़गे ने यह भी दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने ईंधन के ज़रिए ₹43 लाख करोड़ की वसूली की है, जो उनके अनुसार प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ के बराबर है। उन्होंने यूपीए शासनकाल (2004–2014) से तुलना करते हुए तर्क दिया कि उस दौर में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 175% से अधिक बढ़ी थीं, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में क्रूड ऑयल में वैसी बढ़त नहीं हुई।
शेयर बाज़ार पर असर
खड़गे ने यह भी रेखांकित किया कि पेट्रोल-डीजल में चौथी बढ़ोतरी के दिन सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में उछाल आया — एचपीसीएल (HPCL) के शेयर 5.8%, बीपीसीएल (BPCL) के 4.44% और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के 3.90% चढ़े। कांग्रेस ने इसे 'जनता के हितों पर मुनाफे को तरजीह' देने का प्रमाण बताया।
व्यापक असर और कांग्रेस की माँग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ईंधन की हर बढ़ोतरी घरेलू बजट पर सीधी मार है और इसका असर किसानों से लेकर MSME तक समाज के हर तबके पर पड़ता है। खड़गे ने सवाल उठाया — 'इस रोज़ाना की लूट से किसे फायदा हो रहा है?' यह ऐसे समय में आया है जब महंगाई पहले से ही आम परिवारों के बजट पर दबाव बना रही है और विपक्ष ईंधन करों में कटौती की माँग लंबे समय से करता रहा है। गौरतलब है कि चुनावी मौसम में कीमतें स्थिर रखने और बाद में बढ़ाने का यह पैटर्न पहले भी देखा जा चुका है।