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पेट्रोल-डीजल 10 दिनों में चौथी बार महंगा: राहुल गांधी और खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

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पेट्रोल-डीजल 10 दिनों में चौथी बार महंगा: राहुल गांधी और खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

सारांश

10 दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर कांग्रेस आक्रामक हुई। राहुल गांधी ने इसे 'किश्तों में जेब काटना' बताया, तो खड़गे ने 12 साल में ₹43 लाख करोड़ की 'ईंधन लूट' का दावा किया। चुनाव बाद ₹8 की बढ़ोतरी ने विपक्ष को सरकार घेरने का मौका दे दिया।

मुख्य बातें

25 मई 2026 को कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला।
कांग्रेस के अनुसार 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन महंगा हुआ; पेट्रोल ₹7.35 और डीजल ₹7.53 प्रति लीटर बढ़ा।
राहुल गांधी ने एक्स पर दावा किया कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल ₹8 रुपए महंगा कर दिया गया।
खड़गे के अनुसार 2014 से 2026 के बीच पेट्रोल ₹71.41 से ₹102.12 और डीजल ₹56.71 से ₹95.20 प्रति लीटर हो गया।
कांग्रेस का दावा — पिछले 12 वर्षों में ₹43 लाख करोड़ की ईंधन वसूली, यानी प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ ।
बढ़ोतरी वाले दिन HPCL 5.8%, BPCL 4.44%, IOC 3.90% ऊपर बंद हुए।

ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 25 मई 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर मोदी सरकार को महंगाई के मुद्दे पर घेरा। कांग्रेस के अनुसार, 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इज़ाफा किया गया है।

राहुल गांधी का आरोप

राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला। पेट्रोल-डीज़ल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे।' उन्होंने दावा किया कि चुनाव समाप्त होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम ₹8 रुपए बढ़ा दिए गए। राहुल ने आरोप लगाया कि यह बढ़ोतरी आगे भी जारी रहेगी और सरकार का एकमात्र काम 'चुनाव में वादे और बाकी समय जनता की जेब पर वार' है।

खड़गे के दावे और आँकड़े

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि ताज़ा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल में ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल में ₹7.53 प्रति लीटर की कुल वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में पेट्रोल ₹71.41 प्रति लीटर था, जो 2026 में बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गया — यानी 43.01% की वृद्धि। डीजल की कीमत ₹56.71 से बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर पहुँची, जो 67.87% की बढ़ोतरी है।

खड़गे ने यह भी दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने ईंधन के ज़रिए ₹43 लाख करोड़ की वसूली की है, जो उनके अनुसार प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ के बराबर है। उन्होंने यूपीए शासनकाल (2004–2014) से तुलना करते हुए तर्क दिया कि उस दौर में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 175% से अधिक बढ़ी थीं, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में क्रूड ऑयल में वैसी बढ़त नहीं हुई।

शेयर बाज़ार पर असर

खड़गे ने यह भी रेखांकित किया कि पेट्रोल-डीजल में चौथी बढ़ोतरी के दिन सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में उछाल आया — एचपीसीएल (HPCL) के शेयर 5.8%, बीपीसीएल (BPCL) के 4.44% और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के 3.90% चढ़े। कांग्रेस ने इसे 'जनता के हितों पर मुनाफे को तरजीह' देने का प्रमाण बताया।

व्यापक असर और कांग्रेस की माँग

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ईंधन की हर बढ़ोतरी घरेलू बजट पर सीधी मार है और इसका असर किसानों से लेकर MSME तक समाज के हर तबके पर पड़ता है। खड़गे ने सवाल उठाया — 'इस रोज़ाना की लूट से किसे फायदा हो रहा है?' यह ऐसे समय में आया है जब महंगाई पहले से ही आम परिवारों के बजट पर दबाव बना रही है और विपक्ष ईंधन करों में कटौती की माँग लंबे समय से करता रहा है। गौरतलब है कि चुनावी मौसम में कीमतें स्थिर रखने और बाद में बढ़ाने का यह पैटर्न पहले भी देखा जा चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसीलिए विपक्ष का आरोप राजनीतिक से ज़्यादा संरचनात्मक है। असली सवाल यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमतें स्थिर या गिरती हैं, तब भी उपभोक्ता को राहत क्यों नहीं मिलती — उत्पाद शुल्क की दर पारदर्शी नहीं रहती। खड़गे के ₹43 लाख करोड़ के दावे की स्वतंत्र पड़ताल ज़रूरी है, लेकिन यह आँकड़ा बहस को केंद्र में लाता है कि ईंधन कर राजस्व का उपयोग कल्याण में हुआ या नहीं। मुख्यधारा की कवरेज दोनों पक्षों के बयान तो दर्ज करती है, पर उत्पाद शुल्क की वास्तविक दर और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की मौजूदा कीमत का मिलान अक्सर छूट जाता है — वही तथ्य जो असली जवाबदेही तय करे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी कितनी है?
कांग्रेस के दावे के अनुसार 10 दिनों के भीतर चौथी बार हुई इस बढ़ोतरी में पेट्रोल ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल ₹7.53 प्रति लीटर महंगा हुआ है। राहुल गांधी ने दावा किया कि चुनाव के बाद कुल ₹8 की बढ़ोतरी की गई।
खड़गे ने ₹43 लाख करोड़ की 'ईंधन लूट' का दावा किस आधार पर किया?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने ईंधन करों के ज़रिए ₹43 लाख करोड़ वसूले, जो प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ के बराबर है। उन्होंने यूपीए काल (2004–2014) से तुलना करते हुए कहा कि तब क्रूड 175% महंगा होने के बावजूद उपभोक्ताओं पर इतना बोझ नहीं पड़ा था।
2014 से 2026 के बीच पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ?
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के अनुसार 2014 में पेट्रोल ₹71.41 प्रति लीटर था, जो 2026 में ₹102.12 प्रति लीटर हो गया — 43.01% की बढ़ोतरी। डीजल ₹56.71 से बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर पहुँचा, जो 67.87% की वृद्धि है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों से लेकर MSME तक हर क्षेत्र पर पड़ता है। कांग्रेस का कहना है कि किसान और छोटे व्यापारी इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने पर तेल कंपनियों के शेयरों पर क्या असर हुआ?
खड़गे के अनुसार चौथी बढ़ोतरी वाले दिन HPCL के शेयर 5.8%, BPCL के 4.44% और IOC के 3.90% चढ़े। कांग्रेस ने इसे जनहित पर कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता देने का संकेत बताया।
राष्ट्र प्रेस
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