खूंटी में स्कूल प्राचार्य फादर बेनेदिक्त बारला पर जानलेवा हमले के खिलाफ मौन जुलूस, न्याय की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के खूंटी जिला मुख्यालय में आरसी मिशन स्कूल के प्राचार्य और संत मिखाइल चर्च के पादरी फादर बेनेदिक्त बारला पर हुए कातिलाना हमले के विरोध में शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में लोगों ने मौन जुलूस निकाला और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। 20 अक्टूबर की रात हुई इस वारदात के बाद से ईसाई समुदाय और स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है।
हमले का घटनाक्रम
फादर बारला को बुधवार की सुबह स्कूल परिसर में खून से लथपथ अवस्था में पाया गया था। पुलिस द्वारा जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्यों के अनुसार, चार से पाँच नकाबपोश व्यक्तियों ने उन पर हमला किया था। गंभीर रूप से घायल फादर बारला का उपचार अभी रांची के पल्स अस्पताल में जारी है। अब तक किसी भी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
मौन जुलूस का विवरण
शुक्रवार को निकाला गया मौन जुलूस कचहरी मैदान से शुरू हुआ, जिसमें ईसाई समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस मेन रोड से होता हुआ भगत सिंह चौक पहुँचा और वापस लौटकर लोयोला इंटर कॉलेज के मैदान में संपन्न हुआ। वहाँ उपस्थित लोगों ने सामूहिक प्रार्थना कर फादर बारला के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियाँ थीं, जिन पर 'शांति, प्रेम और न्याय, यही है हमारी आवाज़' और 'हमारा मौन विरोध नहीं, न्याय की पुकार है' जैसे संदेश अंकित थे। प्रदर्शनकारियों ने मौन रहकर अपना विरोध दर्ज कराया।
पहले भी उठा था रोष
यह ऐसे समय में आया है जब बुधवार को ही सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए थे और जिला मुख्यालय के मुख्य चौराहे को करीब छह घंटे तक जाम रखा था। गौरतलब है कि इस घटना ने खूंटी जिले में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और स्थानीय नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
समुदाय और प्रशासन से माँग
मौन जुलूस में शामिल लोगों ने प्रशासन से माँग की कि मामले की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाए और हमले में संलिप्त सभी आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ शहर में सांप्रदायिक सौहार्द और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए चिंताजनक हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है, हालाँकि हमलावरों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। समुदाय का दबाव बढ़ने के साथ ही प्रशासन पर जल्द कार्रवाई के लिए दबाव भी तेज हो रहा है। फादर बारला की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार और आरोपियों की गिरफ्तारी पर सभी की नज़रें टिकी हैं।