कोडरमा में 22 वर्षीय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, परिजनों ने ससुराल पर ₹5 लाख दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के लतबेधवा गाँव की 22 वर्षीय सजना कुमारी का शव मंगलवार, 23 जून की सुबह उसके मायके के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर ₹5 लाख अतिरिक्त दहेज की माँग को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
घटनाक्रम: कैसे हुई मौत
परिजनों के अनुसार, 18 जून को सजना को एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए ससुराल से मायके लाया गया था। सोमवार रात समारोह से लौटने के बाद वह घर पर थी। इसी दौरान उसके पति का फोन आया और दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। रात में सभी परिजन अपने-अपने कमरों में सो गए।
मंगलवार सुबह जब परिवार के सदस्य उसे जगाने पहुँचे तो कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज़ देने पर भी कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर दरवाज़ा तोड़ा गया। अंदर सजना का शव पंखे से लटका मिला। उसे तत्काल नीचे उतारा गया, परंतु तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी।
परिजनों के आरोप
मृतका के पिता बसंत नारायण सिंह ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को ₹5 लाख अतिरिक्त दहेज की माँग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने अपने दामाद अमर सिंह, समधी महेंद्र सिंह और समधिन आशा देवी को इस प्रताड़ना के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। यह आरोप अभी तक न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं और जाँच जारी है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
जयनगर थाना पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार परिजनों के आरोपों और अन्य तथ्यों की बारीकी से जाँच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
व्यापक संदर्भ: दहेज हिंसा की चिंताजनक तस्वीर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार देश में दहेज से जुड़ी मौतों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। झारखंड में भी ऐसे मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि दहेज निषेध अधिनियम के बावजूद ज़मीनी स्तर पर इसका प्रभाव सीमित रहा है। इस मामले में पुलिस की जाँच और अभियोजन की दिशा यह तय करेगी कि न्याय की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।