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कोटा में चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज की चाकू गोदकर हत्या, साधु-संतों ने शव उठाने से किया इनकार

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कोटा में चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज की चाकू गोदकर हत्या, साधु-संतों ने शव उठाने से किया इनकार

सारांश

राजस्थान के कोटा में 1,100 साल पुराने चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज की सोते वक्त चाकू से हत्या कर दी गई। पुलिस मठ के भीतर ट्रस्ट और पद-विवाद के एंगल से जाँच कर रही है, जबकि साधु-संतों ने गिरफ्तारी तक शव उठाने से इनकार कर दिया है।

मुख्य बातें

कोटा के चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज की 6 जून 2026 की देर रात चाकू से हत्या कर दी गई।
हमलावरों ने सोते वक्त महंत की गर्दन और पीठ पर ताबड़तोड़ वार किए; इलाज के दौरान एमबीएस अस्पताल में मृत्यु।
महंत मायापुरी अखाड़े से जुड़े थे और पिछले 4 वर्षों से इस मठ में रह रहे थे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा के अनुसार प्रथम दृष्टया मठ के भीतर ट्रस्ट और पद-विवाद का मामला हो सकता है।
साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने हत्यारों की गिरफ्तारी तक शव उठाने से इनकार किया।
पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए; अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं।

राजस्थान के कोटा जिले के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज की 6 जून 2026 की देर रात अज्ञात बदमाशों ने चाकू से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। गंभीर रूप से घायल महंत को एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और साधु-संत तथा हिंदू संगठनों में गहरा आक्रोश है।

घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या

पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने देवानंद महाराज पर उस वक्त धारदार हथियार से हमला किया जब वे सो रहे थे। उनकी गर्दन और पीठ पर कई वार किए गए। सुबह ग्रामीणों ने उन्हें लहूलुहान हालत में पड़ा पाया और तत्काल अस्पताल पहुँचाया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे।

महंत का परिचय और मठ का इतिहास

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, देवानंद महाराज मायापुरी अखाड़े के महंत थे और मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले के रजवाना के निवासी थे। वे पिछले 4 वर्षों से कोटा स्थित चंद्रसाल मठ में रह रहे थे। यह मठ कथित तौर पर लगभग 1,100 साल पुराना बताया जाता है और इसके नाम पर काफी भूमि भी दर्ज है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच के सूत्र

कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला मठ के भीतर आपसी विवाद से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा, 'संतों का एक ट्रस्ट बना हुआ है, जिसके नाम पर काफी ज़मीन है। मठ में पदों को लेकर भी आपसी विवाद रहा होगा। फिलहाल हम हर एंगल से घटना की जाँच कर रहे हैं।' अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

साधु-संतों का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना से आहत साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हत्यारे गिरफ्तार नहीं होते, वे शव को मुर्दाघर से नहीं उठाएँगे। एक महंत ने कहा, 'मठ में महात्मा का निधन हुआ है। हमारी माँग है कि जब तक अपराधी नहीं पकड़े जाते, हम शव नहीं ले जाएँगे।' वहीं पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।'

आगे क्या होगा

पुलिस ने मठ के ट्रस्ट सदस्यों, निवासी साधुओं और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। ज़मीन विवाद और पदों को लेकर आपसी खींचतान की कड़ियाँ खंगाली जा रही हैं। प्रशासन पर दबाव है कि शीघ्र गिरफ्तारी हो ताकि स्थिति को और तनावपूर्ण होने से रोका जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 साल पुराने मठ के नाम पर दर्ज ज़मीन और ट्रस्ट-पद की आपसी खींचतान — यह सब बताता है कि धार्मिक निकायों में पारदर्शी प्रशासन और कानूनी निगरानी की कितनी ज़रूरत है। राजस्थान में साधु-संतों द्वारा शव उठाने से इनकार एक सांकेतिक दबाव है, लेकिन असली परीक्षा पुलिस की जाँच की गति और निष्पक्षता की होगी — खासकर जब मामले में आंतरिक विवाद और संभावित एकाधिक संदिग्ध शामिल हों।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा के चंद्रसाल मठ में क्या हुआ?
6 जून 2026 की देर रात अज्ञात बदमाशों ने चंद्रसाल मठ के महंत देवानंद महाराज पर सोते वक्त चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल महंत को एमबीएस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
महंत देवानंद महाराज कौन थे?
देवानंद महाराज मायापुरी अखाड़े के महंत थे और मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले के रजवाना के निवासी थे। वे पिछले 4 वर्षों से कोटा स्थित चंद्रसाल मठ में रह रहे थे।
पुलिस ने हत्या के पीछे क्या कारण बताया है?
कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला मठ के भीतर ट्रस्ट की ज़मीन और पदों को लेकर आपसी विवाद से जुड़ा हो सकता है। पुलिस हर एंगल से जाँच कर रही है और अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
साधु-संतों ने शव उठाने से इनकार क्यों किया?
साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने माँग की है कि जब तक हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे शव को मुर्दाघर से नहीं उठाएँगे। उनका कहना है कि यह उनका विरोध-प्रदर्शन है ताकि पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बना रहे।
चंद्रसाल मठ कितना पुराना है और इसका विवाद क्या है?
चंद्रसाल मठ कथित तौर पर लगभग 1,100 साल पुराना बताया जाता है। पुलिस के अनुसार मठ के नाम पर काफी ज़मीन दर्ज है और संतों के ट्रस्ट में पद व संपत्ति को लेकर आपसी विवाद रहा है, जो इस हत्याकांड की जाँच का प्रमुख सूत्र है।
राष्ट्र प्रेस
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