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कुल्लू में अवैध भांग खेती के खिलाफ NCB-ITBP-HP पुलिस का संयुक्त अभियान, विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 के तहत कार्रवाई

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कुल्लू में अवैध भांग खेती के खिलाफ NCB-ITBP-HP पुलिस का संयुक्त अभियान, विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 के तहत कार्रवाई

सारांश

कुल्लू के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में NCB, ITBP, HP पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें अवैध भांग की खेती नष्ट कर रही हैं। यह कार्रवाई गृह मंत्री अमित शाह के विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 का हिस्सा है, जो उत्पादन के स्तर पर नशे की सप्लाई काटने की रणनीति पर केंद्रित है।

मुख्य बातें

NCB चंडीगढ़ जोनल यूनिट , ITBP , HP पुलिस और HP वन विभाग कुल्लू के ऊँचे पहाड़ी इलाकों में संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
अभियान गृह मंत्री अमित शाह के नशीले पदार्थ नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029) के तहत चलाया जा रहा है।
विजन डॉक्यूमेंट 26 जून 2026 को NCORD की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक में जारी किया गया था।
पूरी कार्रवाई की जियो-टैगिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जा रही है; वन विभाग विनाश प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
अवैध खेती में संलिप्त पाए गए लोगों पर NDPS एक्ट, 1985 के तहत कार्रवाई होगी।
नागरिक टोल-फ्री नंबर 1933 (मानस हेल्पलाइन) पर सूचना दे सकते हैं; पहचान गुप्त रखी जाएगी।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), हिमाचल प्रदेश पुलिस और हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने मिलकर कुल्लू जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध भांग की खेती के खिलाफ संयुक्त अभियान शुरू किया है। यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी नशीले पदार्थों पर नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029) के अंतर्गत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उत्पादन के स्तर पर ही नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को काटना है।

अभियान की पृष्ठभूमि

यह विजन डॉक्यूमेंट 26 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने जारी किया था। इस दस्तावेज़ में 'नशा मुक्त भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप तय किया गया है। दस्तावेज़ का मूल जोर केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय से अवैध खेती को उत्पत्ति के स्थान पर ही नष्ट करने पर है।

मुख्य घटनाक्रम

NCB की चंडीगढ़ जोनल यूनिट के नेतृत्व में संयुक्त टीमें कुल्लू के ऊँचे और दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में भांग के पौधों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने में जुटी हैं। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैगिंग के साथ-साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के ज़रिए विस्तृत रिकॉर्ड बनाया जा रहा है। अभियान पूर्ण होने पर वन विभाग आधिकारिक विनाश प्रमाण-पत्र जारी करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिले — विशेषतः कुल्लू — लंबे समय से अवैध भांग उत्पादन के केंद्र के रूप में चिह्नित रहे हैं। गौरतलब है कि इन इलाकों की भौगोलिक दुर्गमता अब तक प्रभावी कार्रवाई में बाधा बनती रही है।

कानूनी कार्रवाई का प्रावधान

अभियान के दौरान अवैध खेती के लिए जिम्मेदार पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह कदम सप्लाई चेन की जड़ें काटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है — केवल तस्करों तक सीमित न रहते हुए खेती में संलिप्त लोगों को भी दायरे में लाया जा रहा है।

आम जनता से अपील

अधिकारियों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे नशीले पदार्थों की तस्करी अथवा अवैध खेती की सूचना मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर दें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।

आगे की राह

अधिकारियों के मुताबिक अभियान अभी जारी है और आने वाले दिनों में नष्ट किए जाने के लिए अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। यह बहु-एजेंसी मॉडल, जिसमें सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय नशा-रोधी एजेंसी, राज्य पुलिस और वन विभाग एक साथ काम करते हैं, आगे चलकर देश के अन्य नशा-प्रभावित पहाड़ी ज़िलों में भी अपनाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा निरंतरता की है — कुल्लू और मणिकर्ण जैसे इलाकों में हर साल मौसमी अभियान होते हैं, फिर भी अगले सीजन में खेती फिर शुरू हो जाती है। जियो-टैगिंग और विनाश प्रमाण-पत्र जैसे तंत्र पारदर्शिता तो देते हैं, पर जब तक किसानों के लिए वैकल्पिक आजीविका की ठोस योजना नहीं आती, आपूर्ति-पक्ष की कार्रवाई अधूरी रहती है। विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 इस मांग-पक्ष की कमी को कितना संबोधित करता है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुल्लू में भांग की खेती के खिलाफ संयुक्त अभियान क्या है?
यह NCB चंडीगढ़ जोनल यूनिट, ITBP, हिमाचल प्रदेश पुलिस और HP वन विभाग का साझा अभियान है, जो कुल्लू के दूर-दराज और ऊँचे पहाड़ी इलाकों में अवैध भांग की खेती की पहचान कर उसे नष्ट करने के लिए चलाया जा रहा है। यह नशीले पदार्थ नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 के तहत है।
नशीले पदार्थ नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026–29 क्या है और इसे किसने जारी किया?
यह दस्तावेज़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में NCORD की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक के दौरान जारी किया था। इसमें 'नशा मुक्त भारत' के लक्ष्य के तहत केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के समन्वय से अवैध खेती को उत्पत्ति-स्तर पर नष्ट करने की रणनीति तय की गई है।
अवैध भांग उगाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
अभियान के दौरान अवैध खेती के लिए जिम्मेदार पाए गए व्यक्तियों पर NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट, 1985 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई केवल तस्करों तक नहीं, बल्कि खेती में सीधे संलिप्त लोगों तक भी विस्तारित होगी।
नागरिक नशे की तस्करी की सूचना कैसे दे सकते हैं?
नागरिक मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर कॉल करके सूचना दे सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
अभियान में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
पूरी कार्रवाई की जियो-टैगिंग के साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जा रही है। अभियान समाप्त होने पर वन विभाग आधिकारिक विनाश प्रमाण-पत्र जारी करेगा, जो रिकॉर्ड के तौर पर दर्ज रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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