सीजेआई को राजनीति में न घसीटें, राहुल गांधी परिपक्वता दिखाएं: केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 12 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को राजनीतिक विवादों में खींचना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। उन्होंने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से अपील की कि वे राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दें और संवैधानिक पदों पर आसीन अधिकारियों के प्रति उचित सम्मान बनाए रखें।
कांग्रेस पर सीजेआई से मुलाकात को लेकर सवाल
कुमारस्वामी ने कांग्रेस नीत इंडिया गठबंधन द्वारा चुनावी मुद्दों पर मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय माँगे जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं और उनसे जुड़े प्रोटोकॉल का सम्मान करती है। उनके अनुसार, राजनीतिक नेताओं को यह समझना चाहिए कि कौन से विषय संवैधानिक अधिकारियों के समक्ष उठाए जा सकते हैं और स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करना उनकी ज़िम्मेदारी है।
मंत्री ने तर्क दिया कि जब कांग्रेस केवल अपनी माँगें सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाती है, तो यह उम्मीद करना उचित नहीं कि मुख्य न्यायाधीश राजनीतिक नेताओं से व्यक्तिगत भेंट करें। उन्होंने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले नेताओं को संवैधानिक मर्यादाओं का भी पालन करना होगा।
एसआईआर विवाद: कुमारस्वामी का जवाबी तर्क
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर कांग्रेस की आपत्तियों को कुमारस्वामी ने खारिज करते हुए कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पिछले कई वर्षों से यह नियमित रूप से होती आई है। उन्होंने पूछा कि जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार खुद अपनी गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है, तो मतदाता सूची के सत्यापन को राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूचियों से कुछ समुदाय विशेष के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। कुमारस्वामी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए नकारा।
गारंटी योजनाओं में अनियमितता के आरोप
कुमारस्वामी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह लक्ष्मी योजना, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों की संख्या में 16 से 20 लाख की कमी आई है। उन्होंने सरकार से माँग की कि इन कटौतियों के कारण और सूची से नाम हटाने के मापदंड सार्वजनिक किए जाएं।
उन्होंने उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनके अनुसार 79 मृत लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹79 करोड़ जमा किए गए थे और अब वह राशि वापस ली जा रही है। कुमारस्वामी ने कहा कि ऐसे में यह सत्यापन ज़रूरी हो जाता है कि सरकारी धन अपात्र या मृत व्यक्तियों के नाम पर न जाए।
मुख्यमंत्री शिवकुमार पर व्यंग्यात्मक निशाना
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन विवाद से जुड़े सवालों का जवाब देने की बजाय मुख्यमंत्री मैसूर पैलेस में फोटोशूट कराने में व्यस्त हैं। शिवकुमार की शाही सिंहासन के सामने बैठी तस्वीरों का संदर्भ देते हुए कुमारस्वामी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में संस्कृत की कहावत 'अति विनयं धूर्त लक्षणम्' — अर्थात अत्यधिक विनम्रता कभी-कभी किसी अवांछनीय गुण का संकेत होती है — का उल्लेख किया।
आगे क्या होगा
कुमारस्वामी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब कर्नाटक में BJP-JD(S) गठबंधन और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। एसआईआर प्रक्रिया और गारंटी योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।