मांड्या में ARAI भूमि आवंटन पर कुमारस्वामी और शिवकुमार आमने-सामने, केंद्र ने माँगा स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मांड्या में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की परीक्षण सुविधाओं के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद और गहरा गया है। 31 अक्टूबर को सामने आए इस टकराव में केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने राज्य सरकार के दावों को सिरे से नकारते हुए कर्नाटक की मुख्य सचिव से तत्काल स्पष्टीकरण माँगा है।
विवाद की जड़ क्या है
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत मांड्या में दो परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं — एक निर्माण और अवसंरचना उपकरण (CIE) परीक्षण केंद्र और एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) परीक्षण केंद्र। कुमारस्वामी मांड्या लोकसभा सीट से सांसद हैं, और इन परियोजनाओं को उनके निर्वाचन क्षेत्र में लाना उनकी प्राथमिकता रही है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता लंबे समय से कुमारस्वामी पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि वे मांड्या में कोई बड़ा उद्योग लाने में विफल रहे हैं — और यह विवाद उसी राजनीतिक संघर्ष की नई कड़ी है।
राज्य सरकार के दावे और केंद्र का खंडन
मांड्या में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उपस्थिति में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसभा में जल संसाधन मंत्री तथा मांड्या जिले के प्रभारी एन. चेलुवरयास्वामी ने दावा किया था कि ARAI को 100 एकड़ भूमि पहले ही सौंप दी जा चुकी है और ज़रूरत पड़ने पर 500 एकड़ तक देने की तैयारी है।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के सचिव केआर रघुकुमार ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को भेजे पत्र में इन दावों को 'पूरी तरह से झूठा और जनता को गुमराह करने वाला' बताया। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि ARAI, केंद्रीय मंत्री और उनके कार्यालय को राज्य सरकार या जिला प्रशासन से 100 एकड़ भूमि आवंटन की कोई सूचना या स्वीकृति आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
पत्र में तत्काल स्पष्टीकरण और यदि वास्तव में भूमि आवंटित की गई है तो आधिकारिक स्वीकृति आदेश की प्रति माँगी गई है।
शिवकुमार का पलटवार
असहयोग के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार फाइलों को सक्रियता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, 'हमने 100 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन्होंने (कुमारस्वामी) इसे अस्वीकार कर दिया और अधिक जमीन माँगी। वे पिछले दो-तीन वर्षों से पुराने मामलों पर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें जमीन चुनने और प्रस्ताव रखने दीजिए, हम उन्हें जमीन उपलब्ध करा देंगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर)–भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच केंद्र-राज्य सहयोग पर पहले से तनाव बना हुआ है।
आम जनता और उद्योग पर असर
मांड्या मुख्यत: एक कृषि-प्रधान जिला है और यहाँ औद्योगिक निवेश की माँग लंबे समय से है। प्रस्तावित ARAI परीक्षण केंद्र न केवल रोज़गार के अवसर पैदा कर सकते हैं, बल्कि EV और ऑटोमोटिव क्षेत्र में कर्नाटक की स्थिति को भी मज़बूत कर सकते हैं।
हालाँकि, केंद्र और राज्य के बीच इस सार्वजनिक खींचतान से परियोजना की प्रगति पर प्रश्नचिह्न लग गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष भूमि आवंटन की औपचारिक प्रक्रिया पर सहमत नहीं होते, तब तक निवेशकों की दिलचस्पी प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश के जवाब पर टिकी हैं। यदि राज्य सरकार आधिकारिक स्वीकृति आदेश प्रस्तुत करती है तो केंद्र को अपना रुख स्पष्ट करना होगा; और यदि नहीं, तो मंत्री चेलुवरयास्वामी के दावे राजनीतिक रूप से कमज़ोर पड़ सकते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में एक नई बहस का केंद्र बन सकता है।