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मांड्या में ARAI भूमि आवंटन पर कुमारस्वामी और शिवकुमार आमने-सामने, केंद्र ने माँगा स्पष्टीकरण

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मांड्या में ARAI भूमि आवंटन पर कुमारस्वामी और शिवकुमार आमने-सामने, केंद्र ने माँगा स्पष्टीकरण

सारांश

मांड्या में ARAI परीक्षण केंद्र के लिए भूमि आवंटन का मामला केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच सीधे टकराव में बदल गया है। कुमारस्वामी के कार्यालय ने राज्य के 100 एकड़ आवंटन के दावे को 'झूठा' बताया, जबकि शिवकुमार ने कहा — जमीन चुनें, हम देंगे।

मुख्य बातें

मांड्या में ARAI के तहत CIE और EV परीक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन पर केंद्र और कर्नाटक सरकार में विवाद।
मंत्री चेलुवरयास्वामी ने दावा किया कि 100 एकड़ भूमि ARAI को सौंपी जा चुकी है और ज़रूरत पड़ने पर 500 एकड़ तक देने की तैयारी है।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के सचिव ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर इन दावों को 'पूरी तरह झूठा' बताया और आधिकारिक स्वीकृति आदेश माँगा।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा — 100 एकड़ का प्रस्ताव पहले ही दिया था, कुमारस्वामी ने अस्वीकार किया; वे जमीन चुनें, राज्य देने को तैयार है।
कांग्रेस नेताओं ने कुमारस्वामी पर मांड्या में बड़ा उद्योग लाने में विफलता का आरोप लगाया है।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मांड्या में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की परीक्षण सुविधाओं के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद और गहरा गया है। 31 अक्टूबर को सामने आए इस टकराव में केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने राज्य सरकार के दावों को सिरे से नकारते हुए कर्नाटक की मुख्य सचिव से तत्काल स्पष्टीकरण माँगा है।

विवाद की जड़ क्या है

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत मांड्या में दो परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं — एक निर्माण और अवसंरचना उपकरण (CIE) परीक्षण केंद्र और एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) परीक्षण केंद्र। कुमारस्वामी मांड्या लोकसभा सीट से सांसद हैं, और इन परियोजनाओं को उनके निर्वाचन क्षेत्र में लाना उनकी प्राथमिकता रही है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता लंबे समय से कुमारस्वामी पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि वे मांड्या में कोई बड़ा उद्योग लाने में विफल रहे हैं — और यह विवाद उसी राजनीतिक संघर्ष की नई कड़ी है।

राज्य सरकार के दावे और केंद्र का खंडन

मांड्या में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उपस्थिति में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसभा में जल संसाधन मंत्री तथा मांड्या जिले के प्रभारी एन. चेलुवरयास्वामी ने दावा किया था कि ARAI को 100 एकड़ भूमि पहले ही सौंप दी जा चुकी है और ज़रूरत पड़ने पर 500 एकड़ तक देने की तैयारी है।

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के सचिव केआर रघुकुमार ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को भेजे पत्र में इन दावों को 'पूरी तरह से झूठा और जनता को गुमराह करने वाला' बताया। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि ARAI, केंद्रीय मंत्री और उनके कार्यालय को राज्य सरकार या जिला प्रशासन से 100 एकड़ भूमि आवंटन की कोई सूचना या स्वीकृति आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

पत्र में तत्काल स्पष्टीकरण और यदि वास्तव में भूमि आवंटित की गई है तो आधिकारिक स्वीकृति आदेश की प्रति माँगी गई है।

शिवकुमार का पलटवार

असहयोग के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार फाइलों को सक्रियता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, 'हमने 100 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन्होंने (कुमारस्वामी) इसे अस्वीकार कर दिया और अधिक जमीन माँगी। वे पिछले दो-तीन वर्षों से पुराने मामलों पर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें जमीन चुनने और प्रस्ताव रखने दीजिए, हम उन्हें जमीन उपलब्ध करा देंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर)–भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच केंद्र-राज्य सहयोग पर पहले से तनाव बना हुआ है।

आम जनता और उद्योग पर असर

मांड्या मुख्यत: एक कृषि-प्रधान जिला है और यहाँ औद्योगिक निवेश की माँग लंबे समय से है। प्रस्तावित ARAI परीक्षण केंद्र न केवल रोज़गार के अवसर पैदा कर सकते हैं, बल्कि EV और ऑटोमोटिव क्षेत्र में कर्नाटक की स्थिति को भी मज़बूत कर सकते हैं।

हालाँकि, केंद्र और राज्य के बीच इस सार्वजनिक खींचतान से परियोजना की प्रगति पर प्रश्नचिह्न लग गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष भूमि आवंटन की औपचारिक प्रक्रिया पर सहमत नहीं होते, तब तक निवेशकों की दिलचस्पी प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश के जवाब पर टिकी हैं। यदि राज्य सरकार आधिकारिक स्वीकृति आदेश प्रस्तुत करती है तो केंद्र को अपना रुख स्पष्ट करना होगा; और यदि नहीं, तो मंत्री चेलुवरयास्वामी के दावे राजनीतिक रूप से कमज़ोर पड़ सकते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में एक नई बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्र-राज्य सहयोग की उस खोखली होती परंपरा का प्रतीक है जहाँ परियोजनाएँ फाइलों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में जन्म लेती हैं और राजनीतिक अहंकार की भेंट चढ़ जाती हैं। मांड्या जैसे कृषि-प्रधान जिले में EV और CIE परीक्षण केंद्र वास्तविक औद्योगिक परिवर्तन ला सकते थे — लेकिन जब केंद्र और राज्य के बीच 100 एकड़ जमीन की बुनियादी पुष्टि पर सहमति नहीं है, तो परियोजना की व्यावहारिक प्रगति संदिग्ध हो जाती है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कर्नाटक खुद को दक्षिण भारत के EV हब के रूप में स्थापित करने की होड़ में है — और इस तरह की सार्वजनिक खींचतान निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुँचाती है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मांड्या में ARAI को लेकर विवाद क्या है?
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के तहत मांड्या में ARAI के लिए CIE और EV परीक्षण केंद्र प्रस्तावित हैं। कर्नाटक सरकार के मंत्री ने 100 एकड़ भूमि आवंटन का दावा किया, जिसे केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के कार्यालय ने झूठा बताते हुए मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण माँगा है।
कुमारस्वामी और शिवकुमार के बीच इस विवाद में किसका पक्ष सही है?
दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं। राज्य सरकार का कहना है कि 100 एकड़ का प्रस्ताव दिया गया था जिसे कुमारस्वामी ने अस्वीकार किया, जबकि केंद्रीय मंत्री के कार्यालय का कहना है कि कोई आधिकारिक स्वीकृति आदेश प्राप्त नहीं हुआ। मुख्य सचिव के जवाब के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ARAI परीक्षण केंद्र मांड्या के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
मांड्या एक कृषि-प्रधान जिला है जहाँ औद्योगिक रोज़गार की कमी है। ARAI के तहत CIE और EV परीक्षण केंद्र स्थापित होने से रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और कर्नाटक को EV क्षेत्र में मज़बूत स्थान मिलेगा।
केंद्र ने कर्नाटक को क्या पत्र लिखा है?
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के सचिव केआर रघुकुमार ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर 100 एकड़ भूमि आवंटन के दावों को झूठा बताया और तत्काल स्पष्टीकरण के साथ आधिकारिक स्वीकृति आदेश की प्रति माँगी है।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह विवाद कांग्रेस और JDS-BJP गठबंधन के बीच केंद्र-राज्य संबंधों की लड़ाई को और तेज़ कर सकता है। कांग्रेस पहले से कुमारस्वामी पर मांड्या में उद्योग लाने में विफलता का आरोप लगाती रही है, और यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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