क्या एलसीए तेजस की ऐतिहासिक और पहली उड़ान को 25 वर्ष पूरे हो गए?
सारांश
Key Takeaways
- तेजस की पहली उड़ान ने भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को नया आयाम दिया।
- यह स्वदेशी विमान राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
- तेजस के विकास में कई प्रमुख संस्थानों का योगदान है।
- जेट इंजन की आपूर्ति से तेजस की क्षमता में और वृद्धि होगी।
- भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत को और मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों के इतिहास में आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। दरअसल रविवार को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) की पहली उड़ान को 25 वर्ष पूरे हो गए। इस उपल्ब्धि को भारतीय वायुसेना ने गर्व के साथ याद किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस कार्यक्रम भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रतीक है। भारतीय वायुसेना ने इस स्वदेशी लड़ाकू विमान के विकास में शामिल सभी संस्थानों और व्यक्तियों को विशेष रूप से सराहा है। इस अवसर पर एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के वैज्ञानिकों को बधाई दी गई। साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कुशल इंजीनियर्स और भारतीय वायुसेना व नौसेना के टेस्ट पायलटों को भी सराहा गया।
इस खास मौके पर स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण के इस सपने को साकार करने में वर्षों तक समर्पण दिखाने वाले सभी वायुसेना कर्मियों के योगदान को भी याद किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजस केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। आज इसकी उपलब्धियां वैज्ञानिक और सामरिक आत्मविश्वास को और मजबूत करती हैं। भारतीय वायुसेना ने अपने संदेश में कहा है, 'स्काई इज दी लिमिट'।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस की उड़ान और भारत की तकनीकी प्रगति अब अनंत संभावनाओं की ओर अग्रसर है। हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने तेजस लड़ाकू विमानों का निर्माण किया है। समय के साथ भारतीय फाइटर जेट एलसीए एमके-1ए के निर्माण में तेजी आ रही है। इस श्रेणी के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एलसीए एमके-1ए के लिए भारत के एचएएल को अमेरिकी कंपनी से जीई-404 जेट इंजन मिल रहे हैं।
एचएएल को इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 जीई-404 जेट इंजन मिलने की संभावना है। ये सभी इंजन भारतीय लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए में लगाए जाएंगे। अमेरिकी कंपनी भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को जेट इंजन सप्लाई कर रही है। एचएएल और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के बीच 7 नवंबर को एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। यह समझौता भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों के इंजन को लेकर था। अमेरिकी कंपनी इस समझौते के तहत भारत को 113 जेट इंजन सप्लाई करेगी। यह सप्लाई वर्ष 2032 तक पूरी होने की संभावना है।
इस समझौते में कुल 113 एफ 404‑जीई‑आईएन 20 इंजन एवं 97 एलसीए एमके 1ए कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु स्पोर्ट पैकेज शामिल है। यह समझौता भारत के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, एलसीए एमके 1ए कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए है। गौरतलब है कि इससे पहले 2021 में दोनों कंपनियों के बीच 99 इंजन का एक समझौता हुआ था, लेकिन नया समझौता (113 इंजन) उसका फॉलो-ऑन ऑर्डर है। हाल ही में भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए एक नया अनुबंध किया गया था।
इस करार के अनुसार 62 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भारतीय वायु सेना को 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। इन लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके-1ए की खरीद हेतु 62,370 करोड़ रुपये का यह अनुबंध किया है।