12 वर्षों में भारत का रक्षा तंत्र: मोदी ने गिनाईं तेजस से ब्रह्मोस तक की उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जून 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर माईगव इंडिया की एक पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में भारत ने वायु, थल और समुद्री तीनों क्षेत्रों में स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को व्यापक रूप से सुदृढ़ किया है और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
स्वदेशी रक्षा की नींव
माईगव इंडिया के उस पोस्ट में कहा गया कि भविष्य उन्हीं देशों का होता है जो समय रहते क्षमता निर्माण, तकनीक और मजबूती पर निवेश करते हैं। पिछले 12 वर्षों की भारत की रक्षा यात्रा इस सोच का एक प्रभावशाली उदाहरण बताई गई। इस दौरान रणनीतिक तकनीकों के विकास को गति दी गई और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई।
वायु शक्ति: तेजस और आकाश की छलांग
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित तेजस लड़ाकू विमान भारत की एयरोस्पेस क्षमताओं और रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। तेजस एमके-1ए के शामिल होने और एमके-2 के विकास के साथ, भारत एक सशक्त स्वदेशी कॉम्बैट एविएशन इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है।
आकाश मिसाइल सिस्टम भारत के वायु रक्षा ढाँचे का अहम स्तंभ बन गया है। अगली पीढ़ी का आकाश-एनजी तेज प्रतिक्रिया, बेहतर टारगेट ट्रैकिंग और उन्नत अवरोधन क्षमता के साथ इसे और शक्तिशाली बनाता है। इसके साथ ही पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम ने अपनी गतिशीलता और सटीक निशानेबाजी से भारत की तोपखाना क्षमताओं को नई ऊँचाई दी है।
रणनीतिक और नौसैनिक शक्ति
अग्नि-वी बैलिस्टिक मिसाइल ने भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता में एक निर्णायक उपलब्धि दर्ज की है। आईएनएस अरिहंत — भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी — का शामिल होना देश की रणनीतिक रक्षा यात्रा का ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाता है। आईएनएस विक्रांत स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के उदय का जीवंत प्रमाण है।
नौसेना का आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट्स, प्रोजेक्ट 15बी डिस्ट्रॉयर्स और कलवरी-क्लास पनडुब्बियों जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के जरिए तेजी से आगे बढ़ा है। गौरतलब है कि यह आधुनिकीकरण केवल संख्या नहीं, बल्कि तकनीकी स्वावलंबन की दिशा में भी एक बड़ी छलांग है।
मिसाइल और एयरोस्पेस में नई पहचान
विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लेकर अस्त्र हवा-से-हवा मिसाइल और रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल तक, भारत ने एक सुदृढ़ घरेलू मिसाइल उत्पादन तंत्र खड़ा किया है। सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम को भारत के एयरोस्पेस सफर में एक नए अध्याय के रूप में रेखांकित किया गया है, जो स्वदेशी असेंबली और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को एक साथ आगे बढ़ाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखलाएँ दबाव में हैं और भारत अपनी आयात-निर्भरता घटाने के लिए रक्षा निर्यात को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले वर्षों में इन स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स की परिचालन सफलता ही भारत की 'आत्मनिर्भर रक्षा' की असली कसौटी होगी।