3 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अकाल तख्त के सामने झुके थे महाराजा रणजीत सिंह, पंजाब BJP अध्यक्ष ढिल्लों ने CM मान को दी इतिहास की सीख

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अकाल तख्त के सामने झुके थे महाराजा रणजीत सिंह, पंजाब BJP अध्यक्ष ढिल्लों ने CM मान को दी इतिहास की सीख

सारांश

पंजाब BJP अध्यक्ष ढिल्लों ने CM मान को महाराजा रणजीत सिंह का उदाहरण देकर चेताया — जो शासक अफगानों और मुगलों में खौफ पैदा करते थे, वे भी अकाल तख्त के सामने नतमस्तक हुए। मान का रवैया इस परंपरा के विपरीत है, और इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा।

मुख्य बातें

पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 17 जून को चंडीगढ़ में CM भगवंत मान को इतिहास से सीख लेने की सलाह दी।
महाराजा रणजीत सिंह को जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह ने 'तनखैया' घोषित किया था; महाराजा ने विनम्रतापूर्वक दंड स्वीकार किया था।
ढिल्लों के अनुसार, अकाल तख्त साहिब ने CM मान को गुरु-द्रोही और खालसा पंथ-विरोधी घोषित किया, जिसे मान ने राजनीतिक साजिश बताकर खारिज किया।
BJP ने आरोप लगाया कि मान ने जत्थेदार पर सवाल उठाए और सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी की रिपोर्ट को नकारने की कोशिश की।
ढिल्लों ने चेतावनी दी कि श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने वालों को इतिहास में कभी राजनीतिक या सामाजिक लाभ नहीं मिला।

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बुधवार, 17 जून को मुख्यमंत्री भगवंत मान को इतिहास से सबक लेने की कड़ी सलाह दी। चंडीगढ़ में दिए अपने बयान में ढिल्लों ने कहा कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह जैसे महान शासक भी श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष नतमस्तक हुए थे, और राजनीतिक सत्ता का अहंकार कभी भी गुरु की संस्था की पवित्रता से बड़ा नहीं हो सकता।

ऐतिहासिक संदर्भ: महाराजा रणजीत सिंह और अकाल तख्त

ढिल्लों ने स्मरण कराया कि महाराजा रणजीत सिंह, जिनके नेतृत्व में पंजाब एक अजेय साम्राज्य बना था और जिनका खौफ अफगानों व मुगलों तक में था, उन्हें एक बार श्री अकाल तख्त साहिब ने तलब किया था। तत्कालीन जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह ने महाराजा को 'तनखैया' — अर्थात धार्मिक कदाचार का दोषी — घोषित किया था।

ढिल्लों के अनुसार, महाराजा ने बिना किसी प्रतिरोध के यह दंड स्वीकार किया और विनम्रतापूर्वक अपना शीश झुकाया। उन्होंने कहा, 'उनकी असाधारण विनम्रता को देखकर संगत ने उन्हें माफ कर दिया। यही शेर-ए-पंजाब की असली पहचान थी — एक ऐसा नेता जिसके लिए आस्था और पंथ किसी भी राजनीतिक या शाही सत्ता से ऊपर थे।'

BJP का CM मान पर आरोप

ढिल्लों ने आरोप लगाया कि जब अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु-द्रोही और खालसा पंथ-विरोधी घोषित किया, तो मान ने विनम्रता दिखाने के बजाय इस निर्णय को राजनीतिक साजिश करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मान ने जत्थेदार पर सवाल उठाए और सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी की रिपोर्ट को नकारने की कोशिश की।

ढिल्लों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'श्री अकाल तख्त साहिब का दर्जा और अधिकार किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ऊंचा है — आज, कल और हमेशा।'

राजनीतिक सत्ता और धार्मिक संस्था का टकराव

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव की खबरें लगातार चर्चा में हैं। गौरतलब है कि अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च अस्थायी और धार्मिक सत्ता मानी जाती है, और इसके फैसलों को सिख समुदाय में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात समाप्त करते हुए चेतावनी दी कि इतिहास गवाह है — जो भी श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देता है, उसे राजनीतिक या सामाजिक स्तर पर कोई लाभ नहीं मिलता।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद पंजाब की राजनीति में धर्म और सत्ता के संबंध को लेकर एक बड़ी बहस की शुरुआत कर सकता है, जिसकी गूंज आगामी चुनावी माहौल में भी सुनाई दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पंजाब में अल्पमत में है, इस मुद्दे का उपयोग AAP की 'पंथ-विरोधी' छवि बनाने के लिए कर रही है — एक ऐसी रणनीति जो अकाली दल के परंपरागत वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। असली सवाल यह है कि क्या मान सरकार इस धार्मिक-राजनीतिक दबाव को संवाद से सुलझाएगी या टकराव की राह पर बनी रहेगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाल तख्त साहिब ने CM भगवंत मान के बारे में क्या कहा?
BJP के आरोपों के अनुसार, अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु-द्रोही और खालसा पंथ-विरोधी घोषित किया। मान ने कथित तौर पर इस निर्णय को राजनीतिक साजिश बताकर खारिज कर दिया।
महाराजा रणजीत सिंह और अकाल तख्त का ऐतिहासिक प्रसंग क्या है?
जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह ने महाराजा रणजीत सिंह को 'तनखैया' (धार्मिक कदाचार का दोषी) घोषित किया था। महाराजा ने बिना किसी विरोध के दंड स्वीकार किया और विनम्रतापूर्वक शीश झुकाया, जिसके बाद संगत ने उन्हें माफ कर दिया।
केवल सिंह ढिल्लों ने भगवंत मान को क्या सलाह दी?
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मान को सलाह दी कि वे इतिहास से सीखें और श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति विनम्रता दिखाएँ। उन्होंने कहा कि जो भी अकाल तख्त को चुनौती देता है, उसे राजनीतिक या सामाजिक लाभ नहीं मिलता।
'तनखैया' का क्या अर्थ है?
'तनखैया' सिख धर्म में उस व्यक्ति को कहा जाता है जिस पर धार्मिक कदाचार या मर्यादा के उल्लंघन का दोष लगाया जाए। ऐसे व्यक्ति को अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होकर दंड स्वीकार करना होता है।
इस विवाद का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद पंजाब में AAP सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव को उजागर करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, धार्मिक भावनाओं से जुड़ा यह मुद्दा भविष्य के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले