लिकटेंस्टीन के युवराज प्रिंस एलॉइस नई दिल्ली पहुंचे, मंगलवार को PM मोदी से होगी द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
लिकटेंस्टीन के युवराज प्रिंस एलॉइस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इस आधिकारिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-लिकटेंस्टीन द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देना है।
यात्रा का कार्यक्रम
प्रिंस एलॉइस रविवार को मुंबई पहुंचे थे, जहाँ से उन्होंने वडोदरा का भी दौरा किया। उनके साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफिया सहित वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल है। मंगलवार को प्रिंस एलॉइस का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत होगा, इसके बाद वे राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे।
उसी दिन वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी से भी मुलाकात करेंगे। मंगलवार की शाम हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। दौरे के समापन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में एक राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
वार्ता के एजेंडे में क्या है
दोनों देशों के नेता व्यापार और निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब 2025 में भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हो चुका है, जिसने दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को एक नई संस्थागत रूपरेखा दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा इसी ढाँचे के तहत नए क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने का अवसर है।
दोनों देशों के संबंधों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह 2026 में प्रिंस एलॉइस की भारत की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने आए थे। इसके पूर्व उन्होंने 2010 और 2018 में भी भारत का दौरा किया था। राज्य मंत्री जयंत सिंह ने कहा कि दावोस में हुई पिछली मुलाकात के बाद वे भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों को और मज़बूत करने और आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर उत्सुक हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच संबंध साझा मूल्यों और आपसी सम्मान की नींव पर टिके हैं। यह दौरा इन संबंधों को नई गहराई देने का काम करेगा।
आगे क्या होगा
मंगलवार की बैठकों के नतीजों पर सभी की निगाह रहेगी, खासकर व्यापार और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में किसी ठोस घोषणा की संभावना के मद्देनज़र। भारत-ईएफटीए समझौते के लागू होने के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।