हांगकांग एयरपोर्ट पर फंसा तेलुगु परिवार: मंत्री नारा लोकेश ने विदेश मंत्री जयशंकर से की तत्काल मदद की अपील
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने 6 जुलाई 2025 को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से हांगकांग अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर फंसे एक तेलुगु परिवार को तत्काल सहायता दिलाने की अपील की। यह परिवार 2 जुलाई से हांगकांग एयरपोर्ट पर अटका हुआ है, क्योंकि उनके पासपोर्ट कैथे पैसिफिक की फ्लाइट में खो गए थे।
कैसे शुरू हुई मदद की गुहार
राजेश्वरी बोल्ला नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर मंत्री लोकेश को टैग करते हुए अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उनका परिवार कैथे पैसिफिक एयरलाइंस की फ्लाइट CX672 से हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से 2 जुलाई को रात 2:43 बजे रवाना हुआ था। परिवार हांगकांग होते हुए शिकागो जाने की योजना में था, लेकिन हांगकांग पहुँचने पर पता चला कि उनके पासपोर्ट वाला बैग गायब हो गया।
राजेश्वरी बोल्ला ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मेरे परिवार को 2 जुलाई को कैथे पैसिफिक एयरलाइंस से हैदराबाद से शिकागो होते हुए हांगकांग जाना था, लेकिन हमारे पासपोर्ट हवाई जहाज में खो गए। हम पिछले 52 घंटों से हांगकांग एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। हमारे साथ 5 साल और 3 साल के छोटे बच्चे हैं और हम सच में बहुत मुश्किल में हैं।'
खोए दस्तावेज़ों का ब्यौरा
रिपोर्टों के अनुसार, जिस बैग में दस्तावेज़ थे उसमें दो भारतीय पासपोर्ट और दो अमेरिकी पासपोर्ट थे। परिवार ने उसी फ्लाइट में यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों से भी अपील की कि यदि किसी ने कोई बैग या दस्तावेज़ देखे हों तो सूचित करें। राजेश्वरी बोल्ला ने एयरपोर्ट पर इंतज़ार करते हुए अपनी और परिवार की तस्वीरें तथा बोर्डिंग पास की फोटो भी पोस्ट की।
मंत्री लोकेश की प्रतिक्रिया
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के पुत्र और मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर परिवार की अपील का जवाब देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से सीधे हस्तक्षेप की माँग की। लोकेश ने लिखा कि परिवार की इस मुश्किल के बारे में जानकर उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्होंने जयशंकर से आग्रह किया, 'कृपया इस मामले को देखें और परिवार को तुरंत मदद दें।'
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना विदेश यात्रा के दौरान दस्तावेज़ खोने की उन स्थितियों की ओर ध्यान दिलाती है जहाँ परिवारों — विशेषकर छोटे बच्चों के साथ — को एयरपोर्ट पर घंटों या दिनों तक फंसे रहना पड़ता है। गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय की 'मदद' हेल्पलाइन और दूतावास सेवाएँ ऐसे मामलों में आपातकालीन यात्रा दस्तावेज़ जारी करने का प्रावधान रखती हैं, लेकिन प्रक्रिया में लगने वाला समय अक्सर परिवारों के लिए कठिनाई का कारण बनता है।
आगे क्या
राजेश्वरी बोल्ला ने अनुरोध किया कि उन्हें सही अधिकारियों तक पहुँचने और आपातकालीन रिप्लेसमेंट पासपोर्ट जारी करवाने में मदद मिले। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की ओर से इस अपील पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय वाणिज्य दूतावास हांगकांग इस मामले में कितनी तेज़ी से कार्रवाई करता है।