लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लॉन्च, यूपी में 6 नए डॉप्लर रडार और अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों के लिए मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी का प्रमुख केंद्र बनेगा।
मुख्य घटनाक्रम
उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार थे और कई राज्यों में एक भी रडार मौजूद नहीं था। आज यह संख्या बढ़कर 50 हो चुकी है। केंद्र सरकार के 'मिशन मौसम' के तहत अगले दो वर्षों में 50 नए रडार और स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में डॉप्लर रडारों की कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मौसम पूर्वानुमान सेवाएं अब व्यापक क्षेत्रीय अनुमानों से आगे बढ़कर अत्यधिक स्थानीय और अल्पकालिक पूर्वानुमानों तक पहुँच चुकी हैं, जिससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, विमानन क्षेत्र, पर्यटन उद्योग और आम नागरिकों को समय रहते निर्णय लेने में सहायता मिल रही है।
उत्तर प्रदेश में अवसंरचना विस्तार
उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान अवसंरचना का विस्तार उल्लेखनीय रहा है। 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, जो अब बढ़कर तीन हो गया है और छह नए रडार शीघ्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसी अवधि में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107, स्वचालित वर्षामापी यंत्रों की संख्या 132 से 140 और बिजली गिरने का पता लगाने वाले सेंसरों की संख्या शून्य से सात हो गई है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक विविधता — बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी घटनाओं की बारंबारता के कारण — इसे उन्नत मौसम सेवाओं के लिए विशेष रूप से संवेदनशील राज्य बनाती है।
विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा पर असर
डॉ. सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 11 हवाई अड्डों पर अब विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे राज्य के तेज़ी से विकसित हो रहे विमानन ढाँचे को मज़बूत समर्थन मिल रहा है। नए आरएमसी में भविष्य में अत्याधुनिक डॉप्लर मौसम रडार और विंड प्रोफाइलर जैसी तकनीकें भी जोड़ी जाएंगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, आंधी, बिजली गिरने और हिमस्खलन जैसी चरम मौसम घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
चेतावनी पर अमल ज़रूरी: मंत्री की अपील
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि मौसम सेवाओं की सफलता केवल पूर्वानुमान की सटीकता पर नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और नागरिकों द्वारा चेतावनियों पर समयबद्ध कार्रवाई पर भी निर्भर करती है। उन्होंने नागरिकों, स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से अपील की कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रारंभिक चेतावनियों को गंभीरता से लें और उन्हें योजना निर्माण का हिस्सा बनाएं।
आगे की राह
लखनऊ में स्थापित यह नया क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र कृषि, विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा — तीनों क्षेत्रों के लिए व्यापक लाभ का वाहक बनने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर भारत में अनियमित और चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ती जा रही है, और सटीक पूर्वानुमान प्रणाली की माँग पहले से कहीं अधिक है।