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लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लॉन्च, यूपी में 6 नए डॉप्लर रडार और अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली

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लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लॉन्च, यूपी में 6 नए डॉप्लर रडार और अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली

सारांश

लखनऊ में नए आरएमसी का उद्घाटन महज़ एक इमारत का लोकार्पण नहीं — यह उत्तर भारत के सबसे बड़े और जलवायु-संवेदनशील राज्य को वास्तविक समय की चेतावनी प्रणाली से जोड़ने की कोशिश है। 2014 में एक रडार से आज तीन और जल्द नौ — यह विस्तार तब आया है जब चरम मौसम घटनाएं यूपी में हर साल जानें ले रही हैं।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ.
जितेंद्र सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का उद्घाटन किया।
यूपी में डॉप्लर रडार 1 से 3 हुए; 6 नए रडार शीघ्र स्थापित होंगे — कुल 9 हो जाएंगे।
राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशन 59 से बढ़कर 107 ; बिजली सेंसर शून्य से 7 हुए।
'मिशन मौसम' के तहत देशभर में अगले दो वर्षों में 50 नए रडार लगेंगे — कुल संख्या लगभग 100 होगी।
राज्य के 11 हवाई अड्डों पर विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं उपलब्ध।
नया केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए मौसम सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों के लिए मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी का प्रमुख केंद्र बनेगा।

मुख्य घटनाक्रम

उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार थे और कई राज्यों में एक भी रडार मौजूद नहीं था। आज यह संख्या बढ़कर 50 हो चुकी है। केंद्र सरकार के 'मिशन मौसम' के तहत अगले दो वर्षों में 50 नए रडार और स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में डॉप्लर रडारों की कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मौसम पूर्वानुमान सेवाएं अब व्यापक क्षेत्रीय अनुमानों से आगे बढ़कर अत्यधिक स्थानीय और अल्पकालिक पूर्वानुमानों तक पहुँच चुकी हैं, जिससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, विमानन क्षेत्र, पर्यटन उद्योग और आम नागरिकों को समय रहते निर्णय लेने में सहायता मिल रही है।

उत्तर प्रदेश में अवसंरचना विस्तार

उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान अवसंरचना का विस्तार उल्लेखनीय रहा है। 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, जो अब बढ़कर तीन हो गया है और छह नए रडार शीघ्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसी अवधि में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107, स्वचालित वर्षामापी यंत्रों की संख्या 132 से 140 और बिजली गिरने का पता लगाने वाले सेंसरों की संख्या शून्य से सात हो गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक विविधता — बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी घटनाओं की बारंबारता के कारण — इसे उन्नत मौसम सेवाओं के लिए विशेष रूप से संवेदनशील राज्य बनाती है।

विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा पर असर

डॉ. सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 11 हवाई अड्डों पर अब विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे राज्य के तेज़ी से विकसित हो रहे विमानन ढाँचे को मज़बूत समर्थन मिल रहा है। नए आरएमसी में भविष्य में अत्याधुनिक डॉप्लर मौसम रडार और विंड प्रोफाइलर जैसी तकनीकें भी जोड़ी जाएंगी।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, आंधी, बिजली गिरने और हिमस्खलन जैसी चरम मौसम घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

चेतावनी पर अमल ज़रूरी: मंत्री की अपील

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि मौसम सेवाओं की सफलता केवल पूर्वानुमान की सटीकता पर नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और नागरिकों द्वारा चेतावनियों पर समयबद्ध कार्रवाई पर भी निर्भर करती है। उन्होंने नागरिकों, स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से अपील की कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रारंभिक चेतावनियों को गंभीरता से लें और उन्हें योजना निर्माण का हिस्सा बनाएं।

आगे की राह

लखनऊ में स्थापित यह नया क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र कृषि, विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा — तीनों क्षेत्रों के लिए व्यापक लाभ का वाहक बनने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर भारत में अनियमित और चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ती जा रही है, और सटीक पूर्वानुमान प्रणाली की माँग पहले से कहीं अधिक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये चेतावनियाँ ज़िला और पंचायत स्तर तक समय पर पहुँचती हैं। उत्तर प्रदेश में हर मानसून में बाढ़ और बिजली गिरने से सैकड़ों मौतें होती हैं, जबकि अक्सर चेतावनी जारी हो चुकी होती है — समस्या पूर्वानुमान की नहीं, अंतिम-मील संचार और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया की है। रडारों की संख्या दोगुनी करना ज़रूरी कदम है, पर जब तक ग्राम स्तर पर चेतावनी-से-कार्रवाई की श्रृंखला मज़बूत नहीं होती, तकनीकी निवेश अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाएगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में नया क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र क्या है?
यह 8 जून 2026 को लखनऊ में उद्घाटित एक नया आरएमसी है, जो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों के लिए मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी का केंद्रीय केंद्र बनेगा। भविष्य में इसमें अत्याधुनिक डॉप्लर रडार और विंड प्रोफाइलर भी जोड़े जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में अब कितने डॉप्लर मौसम रडार हैं?
वर्तमान में यूपी में 3 डॉप्लर मौसम रडार हैं, जबकि 2014 में केवल 1 था। 6 नए रडार शीघ्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में कुल 9 रडार हो जाएंगे।
'मिशन मौसम' क्या है और इससे क्या बदलेगा?
'मिशन मौसम' केंद्र सरकार की पहल है जिसके तहत अगले दो वर्षों में देशभर में 50 नए डॉप्लर रडार स्थापित किए जाएंगे, जिससे कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी। इससे वास्तविक समय में मौसम निगरानी और अल्पकालिक पूर्वानुमान क्षमता में व्यापक सुधार होगा।
नए आरएमसी से आम नागरिकों और किसानों को क्या फायदा होगा?
अधिक सटीक और स्थानीय पूर्वानुमान से किसान, आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ, विमानन क्षेत्र और आम नागरिक समय रहते ज़रूरी निर्णय ले सकेंगे। बाढ़, बादल फटने, आंधी और बिजली गिरने जैसी चरम घटनाओं के लिए पहले से चेतावनी मिलने से जान-माल की क्षति कम हो सकेगी।
उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान अवसंरचना में और क्या बदलाव हुए हैं?
2014 से अब तक यूपी में स्वचालित मौसम स्टेशन 59 से बढ़कर 107, स्वचालित वर्षामापी यंत्र 132 से 140 और बिजली सेंसर शून्य से 7 हो गए हैं। राज्य के 11 हवाई अड्डों पर विमानन मौसम सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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