यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मियों को मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन को नई धार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के अंतर्गत स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन किया जाएगा। यह विशेषज्ञ दल भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं, बहुमंजिला इमारतों में फंसे लोगों के बचाव और संकरे स्थानों में राहत अभियान जैसी जटिल परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होगा। 8 जून 2026 को लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बदलते शहरी और औद्योगिक परिवेश के अनुरूप आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक और सशक्त बनाया जाए। पहले चरण में प्रदेश के 10 जनपदों में एसआरजी की स्थापना होगी, जिसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेज़ी से शहरीकरण और औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए आपात सेवाओं को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानवबल से लैस करना अनिवार्य है।
अग्निशमन केंद्रों का विस्तार
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण जारी है। इसके अतिरिक्त 47 नए अग्निशमन केंद्रों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी सेवाओं का विस्तार तेज़ करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से अग्निशमन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है और फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 तक पहुँच गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी बताई गई।
हाईराइज भवनों के लिए विशेष संसाधन
नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर क्षमता के 3 तथा 72 मीटर क्षमता के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। इसके साथ ही 100 मंजिल तक प्रभावी अग्निशमन क्षमता वाले 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहनों की खरीद भी प्रस्तावित है।
सुरक्षा मानक और जनजागरूकता
बैठक में फसलों में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, जनजागरूकता अभियान और नियमित फायर ऑडिट सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, स्कूलों, होटलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। निवेशकों की सुविधा के लिए फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी बल दिया गया। डायल-112 से एकीकरण और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के ज़रिए विभाग की कार्यक्षमता में लगातार वृद्धि का उल्लेख भी बैठक में किया गया।
आगे की राह
सरकार का मानना है कि स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप और आधुनिक अग्निशमन संसाधनों के ज़रिए प्रदेश में आपदा प्रबंधन क्षमता को नई मज़बूती मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शहरी आपदाओं — विशेषकर इमारत ध्वस्त होने और औद्योगिक दुर्घटनाओं — की आवृत्ति बढ़ रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, इसलिए यहाँ की आपात सेवाओं का सुदृढ़ होना राष्ट्रीय महत्व का विषय है।