24 जुलाई 2026
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यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मियों को मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण

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यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मियों को मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण

सारांश

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप बना रही है — 10 जनपदों में 240 प्रशिक्षित कर्मी, 20 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और 14 अत्याधुनिक फायर वाहन। 2017 के बाद केंद्रों की संख्या 140 से 260 और वाहन 750 से 1,660 हो चुके हैं — यह उसी विस्तार की अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन होगा, पहले चरण में 10 जनपदों में स्थापना।
240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ सहित विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वर्ष 2026-27 में 20 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म (102, 90 व 72 मीटर क्षमता) और 100 मंजिल तक प्रभावी 14 अत्याधुनिक फायर वाहन खरीदे जाएंगे।
2017 से अब तक अग्निशमन केंद्र 140 से 260 और वाहन 750 से 1,660 हो गए; 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद जारी।
प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 में 326 स्थायी केंद्र सक्रिय; 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार, 47 की डीपीआर प्रक्रियाधीन।
अस्पतालों, स्कूलों, होटलों व औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की सख्त निगरानी और फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश।

उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन को नई धार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के अंतर्गत स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन किया जाएगा। यह विशेषज्ञ दल भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं, बहुमंजिला इमारतों में फंसे लोगों के बचाव और संकरे स्थानों में राहत अभियान जैसी जटिल परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होगा। 8 जून 2026 को लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बदलते शहरी और औद्योगिक परिवेश के अनुरूप आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक और सशक्त बनाया जाए। पहले चरण में प्रदेश के 10 जनपदों में एसआरजी की स्थापना होगी, जिसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेज़ी से शहरीकरण और औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए आपात सेवाओं को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानवबल से लैस करना अनिवार्य है।

अग्निशमन केंद्रों का विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण जारी है। इसके अतिरिक्त 47 नए अग्निशमन केंद्रों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी सेवाओं का विस्तार तेज़ करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से अग्निशमन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है और फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 तक पहुँच गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी बताई गई।

हाईराइज भवनों के लिए विशेष संसाधन

नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर क्षमता के 3 तथा 72 मीटर क्षमता के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। इसके साथ ही 100 मंजिल तक प्रभावी अग्निशमन क्षमता वाले 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहनों की खरीद भी प्रस्तावित है।

सुरक्षा मानक और जनजागरूकता

बैठक में फसलों में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, जनजागरूकता अभियान और नियमित फायर ऑडिट सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, स्कूलों, होटलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। निवेशकों की सुविधा के लिए फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी बल दिया गया। डायल-112 से एकीकरण और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के ज़रिए विभाग की कार्यक्षमता में लगातार वृद्धि का उल्लेख भी बैठक में किया गया।

आगे की राह

सरकार का मानना है कि स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप और आधुनिक अग्निशमन संसाधनों के ज़रिए प्रदेश में आपदा प्रबंधन क्षमता को नई मज़बूती मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शहरी आपदाओं — विशेषकर इमारत ध्वस्त होने और औद्योगिक दुर्घटनाओं — की आवृत्ति बढ़ रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, इसलिए यहाँ की आपात सेवाओं का सुदृढ़ होना राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — राज्य में पहले भी बड़े ढाँचागत ऐलान हुए हैं जो ज़मीन पर धीमे रहे। गौरतलब है कि अभी भी प्रदेश की 54 तहसीलों में कोई स्थायी अग्निशमन केंद्र नहीं है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कवरेज की गंभीर खाई दर्शाता है। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की खरीद महानगरों के लिए ज़रूरी है, परंतु छोटे शहरों और औद्योगिक कॉरिडोर में बुनियादी उपकरणों की कमी पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। यदि प्रशिक्षण कार्यक्रम और भर्ती प्रक्रिया समयसीमा में पूरी हो, तो यह देश के सबसे बड़े राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र में वास्तविक बदलाव ला सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) क्या है?
एसआरजी उत्तर प्रदेश के अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के अंतर्गत बनने वाली एक विशेषज्ञ बचाव टीम है, जो भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं और बहुमंजिला इमारतों में फंसे लोगों को बचाने जैसे जटिल अभियानों के लिए प्रशिक्षित होगी। पहले चरण में इसे 10 जनपदों में स्थापित किया जाएगा।
एसआरजी के लिए कर्मियों को कहाँ प्रशिक्षण दिया जाएगा?
240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण आधुनिक बचाव तकनीकों और उपकरणों के संचालन पर केंद्रित होगा।
वर्ष 2026-27 में यूपी के अग्निशमन विभाग के लिए कौन से नए वाहन खरीदे जाएंगे?
2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर के 3 और 72 मीटर के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। इसके अलावा 100 मंजिल तक प्रभावी 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहनों की खरीद भी प्रस्तावित है।
2017 के बाद से यूपी में अग्निशमन व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार 2017 के बाद अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 और फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 हो गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया अभी जारी है।
यूपी में कितनी तहसीलों में अग्निशमन केंद्र अभी भी नहीं हैं?
प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं, यानी अभी भी 54 तहसीलें इस सेवा से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में विस्तार की गति तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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