यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मी होंगे प्रशिक्षित
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन किया जाएगा, जो भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं और ऊँची इमारतों में फँसे लोगों के बचाव जैसे जटिल अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होगी। 8 जून को लखनऊ में आयोजित अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिए।
एसआरजी की संरचना और प्रशिक्षण
पहले चरण में प्रदेश के 10 जनपदों में एसआरजी की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह टीम संकरे स्थानों में राहत कार्य, रासायनिक आपदाओं और बहुमंजिला भवनों में बचाव अभियानों के लिए आधुनिक संसाधनों से लैस होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नागरिकों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
अग्निशमन ढाँचे का विस्तार
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त 47 नए केंद्रों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार 2017 के बाद से अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है और फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 तक पहुँच गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी है।
हाईराइज भवनों के लिए विशेष संसाधन
नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर के 3 तथा 72 मीटर के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। साथ ही 100 मंजिल तक प्रभावी 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहन भी प्रस्तावित हैं।
सुरक्षा मानक और फायर एनओसी सुधार
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, स्कूलों, होटलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। फसलों में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, जनजागरूकता और नियमित फायर ऑडिट पर भी विशेष बल दिया गया। निवेशकों की सुविधा के लिए फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का भी निर्देश दिया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश तेज़ शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के दौर से गुज़र रहा है, जिससे आपदा प्रबंधन की माँग पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। एसआरजी के गठन और आधुनिक संसाधनों की खरीद से प्रदेश की आपात प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।