25 जुलाई 2026
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यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मी होंगे प्रशिक्षित

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यूपी में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन, 10 जनपदों में 240 कर्मी होंगे प्रशिक्षित

सारांश

उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन की नई इबारत लिखी जा रही है — 10 जनपदों में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप, 240 प्रशिक्षित कर्मी और 2026-27 में 20 से अधिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म। योगी सरकार का यह कदम तेज़ शहरीकरण के बीच बहुमंजिला इमारतों और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारी का संकेत है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन होगा।
पहले चरण में 10 जनपदों में एसआरजी स्थापित होगी; 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी व सीआईएसएफ में प्रशिक्षण मिलेगा।
2017 के बाद से अग्निशमन केंद्र 140 से 260 और फायर वाहन 750 से 1,660 हो गए; 400 अतिरिक्त वाहन खरीद प्रक्रिया में।
2026-27 में 102 मीटर, 90 मीटर और 72 मीटर क्षमता के कुल 20 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म तथा 14 अत्याधुनिक फायर वाहन खरीदे जाएँगे।
47 नए अग्निशमन केंद्रों की डीपीआर तैयार; 26 केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार और 25 केंद्रों का निर्माण जारी।
फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध बनाने और नियमित फायर ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन किया जाएगा, जो भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं और ऊँची इमारतों में फँसे लोगों के बचाव जैसे जटिल अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होगी। 8 जून को लखनऊ में आयोजित अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिए।

एसआरजी की संरचना और प्रशिक्षण

पहले चरण में प्रदेश के 10 जनपदों में एसआरजी की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह टीम संकरे स्थानों में राहत कार्य, रासायनिक आपदाओं और बहुमंजिला भवनों में बचाव अभियानों के लिए आधुनिक संसाधनों से लैस होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नागरिकों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

अग्निशमन ढाँचे का विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त 47 नए केंद्रों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार 2017 के बाद से अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है और फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 तक पहुँच गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी है।

हाईराइज भवनों के लिए विशेष संसाधन

नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर के 3 तथा 72 मीटर के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। साथ ही 100 मंजिल तक प्रभावी 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहन भी प्रस्तावित हैं।

सुरक्षा मानक और फायर एनओसी सुधार

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, स्कूलों, होटलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। फसलों में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, जनजागरूकता और नियमित फायर ऑडिट पर भी विशेष बल दिया गया। निवेशकों की सुविधा के लिए फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का भी निर्देश दिया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश तेज़ शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के दौर से गुज़र रहा है, जिससे आपदा प्रबंधन की माँग पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। एसआरजी के गठन और आधुनिक संसाधनों की खरीद से प्रदेश की आपात प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — राज्य में अभी भी 54 तहसीलें स्थायी अग्निशमन केंद्र से वंचित हैं। गौरतलब है कि 2017 से वाहनों की संख्या दोगुनी से अधिक होने के बावजूद औद्योगिक और बहुमंजिला भवन दुर्घटनाओं में जनहानि की घटनाएँ सामने आती रही हैं। एसआरजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से होती है, न कि केवल बैठकों में घोषणाओं तक सीमित रहती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) क्या है?
एसआरजी उत्तर प्रदेश के अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के अंतर्गत गठित होने वाली एक विशेष बचाव टीम है, जो भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं और ऊँची इमारतों में बचाव जैसे जटिल अभियानों के लिए प्रशिक्षित होगी। पहले चरण में 10 जनपदों में इसकी स्थापना की जाएगी।
एसआरजी के लिए कितने कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और कहाँ?
240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें जटिल और बहु-आयामी आपदा परिदृश्यों के लिए तैयार करेगा।
2026-27 में यूपी में कौन-से नए अग्निशमन उपकरण खरीदे जाएँगे?
वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर के 3 और 72 मीटर के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदे जाएँगे। इसके अलावा 100 मंजिल तक प्रभावी 14 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग वाहनों की खरीद भी प्रस्तावित है।
2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में अग्निशमन व्यवस्था में क्या बदलाव आया है?
अधिकारियों के अनुसार 2017 के बाद से अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है और फायर वाहनों की संख्या 750 से 1,660 तक पहुँच गई है। 400 अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी है।
यूपी में अभी कितने अग्निशमन केंद्र हैं और कितने नए बनेंगे?
प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, 25 का निर्माण जारी है और 47 नए केंद्रों की डीपीआर तैयार की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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