योगी आदित्यनाथ का निर्देश: नागरिक सुरक्षा विभाग अब सभी 75 जनपदों में, 7,500 नए स्वयंसेवक तैनात
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जून 2025 को लखनऊ में नागरिक सुरक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि विभाग की भूमिका अब केवल युद्धकालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगी — आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव, जनजागरूकता और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया इसकी नई प्राथमिकताएँ हैं। मुख्यमंत्री ने विभाग को मई 2025 से प्रदेश के सभी 75 जनपदों तक विस्तारित किए जाने की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए इसे और अधिक आधुनिक एवं सक्षम बनाने के निर्देश दिए।
मुख्य घटनाक्रम
समीक्षा बैठक में बताया गया कि पूर्व में नागरिक सुरक्षा की इकाइयाँ केवल 15 जनपदों तक सीमित थीं, जिन्हें मई 2025 से बढ़ाकर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में स्थापित कर दिया गया है। नवसृजित जनपदों में 7,500 स्वयंसेवकों की भर्ती पूरी हो चुकी है और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त उपनियंत्रक के 61 नए पद और सहायक उपनियंत्रक के 60 नए पद सृजित किए गए हैं।
गौरतलब है कि नागरिक सुरक्षा की स्थापना भारत-चीन युद्ध के बाद 1962 में हुई थी और 1968 में नागरिक सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया था। नागरिक सुरक्षा संशोधित अधिनियम-2009 के अंतर्गत विभाग को आपदा-पूर्व, आपदा के दौरान और आपदा-उपरांत कार्यों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की 'स्कीम फॉर ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ सिविल डिफेंस इन स्टेट्स' के अंतर्गत 17 जनपदों में लगभग 5,000 वार्डनों एवं स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 72,438 छात्र-छात्राओं को नागरिक सुरक्षा का सामान्य प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। होमगार्ड के 7,502 स्वयंसेवकों और 4,633 नागरिकों को आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है।
वार्डन सेवा, अग्निशमन सेवा और प्राथमिक चिकित्सा सेवा सहित विभिन्न सेवाओं में कुल 6,695 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि NCC और NSS के स्वयंसेवकों को भी सिविल डिफेंस प्रशिक्षण के साथ-साथ CPR और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जाए। उन्होंने सेना से सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने पर विशेष बल दिया।
सरकार के निर्देश और भविष्य की योजना
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवसृजित जनपदों में नागरिक सुरक्षा की महायोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नागरिक सुरक्षा जनपद में वर्ष में कम से कम दो बार सभी हितधारकों की सहभागिता के साथ वृहद मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। आपदा से पूर्व जनजागरूकता के लिए सायरन के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया।
विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए। स्वयंसेवकों के ड्यूटी भत्ते और प्रशिक्षण भत्ते की दरों में भी वृद्धि की गई है।
आम जनता पर असर
विभाग के विस्तार का सीधा अर्थ है कि अब प्रदेश के हर ज़िले में आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित स्वयंसेवक उपलब्ध होंगे। विद्यालयों, महाविद्यालयों, रेलवे और महत्वपूर्ण संस्थानों को 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में तैयार करने के लिए विशेष कार्यक्रम पहले से संचालित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिक सुरक्षा विभाग को जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत, आधुनिक और सक्षम संस्था के रूप में विकसित किया जाएगा — और इसके लिए स्वयंसेवकों की क्षमता, दक्षता और संख्या तीनों में एक साथ वृद्धि की जाएगी।