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रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में नंबर-1, टॉप 100 में यूपी के 17 जिले; 1,24,167 संयंत्र स्थापित

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रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में नंबर-1, टॉप 100 में यूपी के 17 जिले; 1,24,167 संयंत्र स्थापित

सारांश

उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर में देश की बाजी मारी — लखनऊ 1,24,167 संयंत्रों के साथ राष्ट्रीय सूची में पहले नंबर पर, टॉप 100 में प्रदेश के 17 जिले। सब्सिडी, सरल प्रक्रिया और जनजागरूकता ने मिलकर यूपी को स्वच्छ ऊर्जा की दौड़ में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

लखनऊ 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के साथ देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
केंद्र सरकार की ताज़ा सूची में देश के शीर्ष 100 जिलों में उत्तर प्रदेश के 17 जनपद शामिल हैं।
वाराणसी 48,829 संयंत्रों के साथ 10वें और कानपुर नगर 43,289 संयंत्रों के साथ 14वें स्थान पर है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जा रही है।
रूफटॉप सोलर से बिजली बिल में कमी के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर परिवार अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।
यूपी नेडा निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार, कानपुर का शीर्ष 15 में आना औद्योगिक क्षेत्र में हरित ऊर्जा अपनाने का संकेत है।

उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर स्थापना में पूरे देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। केंद्र सरकार की ताज़ा रैंकिंग के अनुसार, राजधानी लखनऊ 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के साथ राष्ट्रीय सूची में पहले स्थान पर बनी हुई है, जबकि देश के शीर्ष 100 जिलों में उत्तर प्रदेश के 17 जनपद शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्र सरकार द्वारा जारी सूची में लखनऊ लगातार देशभर में पहले नंबर पर है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपी नेडा) के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि लखनऊ में घरों और संस्थानों ने बड़ी संख्या में छत पर सोलर पैनल लगवाए हैं, जिसकी वजह से यह स्थान बरकरार है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी ने 48,829 संयंत्रों के साथ देश में 10वाँ स्थान प्राप्त किया है। औद्योगिक शहर कानपुर नगर 43,289 संयंत्रों के साथ 14वें स्थान पर है। इस प्रकार देश के शीर्ष 15 जिलों में यूपी के तीन जनपद — लखनऊ, वाराणसी और कानपुर — शामिल हैं।

टॉप 100 में यूपी के 17 जिले

शीर्ष 100 में शामिल उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों का विवरण इस प्रकार है: बरेली 28,315 संयंत्रों के साथ 24वें, आगरा 26,375 के साथ 29वें और प्रयागराज 23,773 के साथ 37वें स्थान पर है।

झाँसी 18,354 संयंत्रों के साथ 51वें, रायबरेली 17,532 के साथ 56वें और गोरखपुर 14,498 के साथ 70वें स्थान पर है। सहारनपुर 13,821 के साथ 73वें, मुज़फ्फरनगर 13,464 के साथ 75वें और मेरठ 13,137 के साथ 78वें स्थान पर रहा।

इसके अलावा बाराबंकी 13,126 के साथ 79वें, अलीगढ़ 12,925 के साथ 81वें, शाहजहाँपुर 12,158 के साथ 86वें, सीतापुर 12,008 के साथ 88वें और उन्नाव 11,779 संयंत्रों के साथ 90वें स्थान पर है।

आम जनता पर असर

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी ने आम परिवारों को सोलर ऊर्जा की ओर आकर्षित किया है। रूफटॉप सोलर संयंत्र लगने से घरों का बिजली बिल घटा है और दिन में उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर परिवार अतिरिक्त आमदनी भी कर पा रहे हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण है — सौर ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है और वायु गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

यूपी नेडा निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार, वाराणसी में सोलर अभियान का असर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वहाँ लोगों में इस योजना को लेकर विशेष उत्साह है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर का शीर्ष 15 में आना इस बात का संकेत है कि अब कारखाने और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हरित ऊर्जा को अपना रहे हैं।

सरकार की रणनीति

राज्य सरकार ने रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं — जनजागरूकता अभियान, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, डिस्कॉम और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजना। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप लाखों परिवार अब सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं।

क्या होगा आगे

अधिकारियों का कहना है कि जिस गति से उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, उससे आने वाले वर्षों में प्रदेश देश का सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा केंद्र बनकर उभर सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिकाधिक घरों की छतों पर सोलर पैनल लगें, ताकि परिवार बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हों और प्रदेश प्रदूषण मुक्त बने। गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब देश भर में सौर ऊर्जा क्षमता विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षण यह है कि क्या ये संख्याएँ वास्तविक ऊर्जा उत्पादन और बिजली बिल में मापनीय कटौती में तब्दील हो रही हैं — या केवल पंजीकृत संयंत्रों की गिनती है। यूपी के 17 जिलों का टॉप 100 में होना राज्य की प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है, परंतु ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पहुँच अभी भी सीमित दिखती है — सूची में शामिल अधिकांश जिले बड़े शहरी केंद्र हैं। सब्सिडी-आधारित प्रोत्साहन टिकाऊ तभी होगा जब ग्रिड एकीकरण, नेट मीटरिंग निपटान और रखरखाव की व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से मज़बूत हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है जिसके तहत घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने पर सब्सिडी दी जाती है। इसका उद्देश्य आम परिवारों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना और बिजली बिल कम करना है।
रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में नंबर-1 क्यों है?
केंद्र सरकार की ताज़ा सूची के अनुसार लखनऊ में 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हैं, जो किसी भी अन्य जिले से अधिक है। यूपी नेडा निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार, घरों और संस्थानों की बड़ी भागीदारी तथा सरकारी जनजागरूकता अभियानों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।
उत्तर प्रदेश के कौन-से 17 जिले टॉप 100 में शामिल हैं?
लखनऊ (1वाँ), वाराणसी (10वाँ), कानपुर नगर (14वाँ), बरेली (24वाँ), आगरा (29वाँ), प्रयागराज (37वाँ), झाँसी (51वाँ), रायबरेली (56वाँ), गोरखपुर (70वाँ), सहारनपुर (73वाँ), मुज़फ्फरनगर (75वाँ), मेरठ (78वाँ), बाराबंकी (79वाँ), अलीगढ़ (81वाँ), शाहजहाँपुर (86वाँ), सीतापुर (88वाँ) और उन्नाव (90वाँ) शामिल हैं।
रूफटॉप सोलर लगवाने से आम परिवारों को क्या फायदा होता है?
रूफटॉप सोलर पैनल से घर का बिजली बिल कम होता है और दिन में बनी अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी होती है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने जनजागरूकता अभियान चलाए, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया, डिस्कॉम और एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर किया और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था की।
राष्ट्र प्रेस
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