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मध्य प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में जलभराव 89.32%, पिछले साल से 5.81% कम — समीक्षा में खुलासा

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मध्य प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में जलभराव 89.32%, पिछले साल से 5.81% कम — समीक्षा में खुलासा

सारांश

मध्य प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में इस साल जलभराव 89.32% है — पिछले साल से करीब 6 प्रतिशत अंक कम। पश्चिमी MP में बारिश औसत से 12% कम रही, जिससे उज्जैन और नर्मदा-ताप्ती बेसिन में रबी सीजन की सिंचाई पर दबाव बढ़ सकता है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत , जो पिछले वर्ष के 95.13 प्रतिशत से कम है।
राज्य में कुल वर्षा 908.30 मिमी — दीर्घावधि औसत 949.50 मिमी से 4 प्रतिशत कम ।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा औसत से 12 प्रतिशत कम ; पूर्वी मध्य प्रदेश में 4 प्रतिशत अधिक ।
नर्मदा-ताप्ती बेसिन में सबसे कम 57 प्रतिशत जलभराव; गंगा बेसिन में सर्वाधिक 99 प्रतिशत ।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने रबी सीजन के लिए बेसिनवार जल बजट तैयार करने और 35 बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए।

मध्य प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में इस वर्ष औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 95.13 प्रतिशत था। राज्य में 30 सितंबर 2026 तक कुल 908.30 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो दीर्घावधि औसत 949.50 मिलीमीटर से लगभग 4 प्रतिशत कम है। यह जानकारी जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट द्वारा प्रदेश में वर्षा एवं जलाशयों की स्थिति की समीक्षा के दौरान सामने आई।

बांधों में जलभराव की मौजूदा स्थिति

राज्य के बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के आँकड़ों के अनुसार, 35 बांध अभी 90 प्रतिशत से अधिक भरे हुए हैं। 9 बांधों में 75 से 90 प्रतिशत, 5 में 50 से 75 प्रतिशत, 4 में 25 से 50 प्रतिशत तथा एक बांध में केवल 10 से 25 प्रतिशत जलभराव है। विगत पाँच वर्षों का औसत जलभराव 88.45 प्रतिशत रहा है, जो यह दर्शाता है कि वर्तमान स्थिति पाँच वर्षीय औसत के करीब है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा का असंतुलन

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 773.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो दीर्घावधि औसत से 12 प्रतिशत कम है — यह राज्य का सबसे चिंताजनक क्षेत्र है। इसके विपरीत, पूर्वी मध्य प्रदेश में 1,083.60 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो औसत से 4 प्रतिशत अधिक है। यह असंतुलन उज्जैन और नर्मदा-ताप्ती बेसिन में विशेष रूप से महसूस किया जा रहा है, जहाँ जलभराव क्रमशः 71 प्रतिशत और 57 प्रतिशत ही है।

बेसिनवार जलभराव का विवरण

समीक्षा में सामने आए बेसिनवार आँकड़ों के अनुसार, गंगा बेसिन में 99 प्रतिशत, यमुना बेसिन में 94 प्रतिशत और नर्मदा बेसिन में 95 प्रतिशत जलभराव है। चंबल-बेतवा एवं सागर बेसिन में 82-82 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 81 प्रतिशत तथा वैनगंगा में 80 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। सबसे कम जलभराव नर्मदा-ताप्ती बेसिन में 57 प्रतिशत है, जो आगामी रबी सीजन के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

मंत्री सिलावट के निर्देश और कार्ययोजना

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले 35 बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बांध में जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की नियमित समीक्षा की जाए तथा बांधों के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दलों के साथ समन्वय बनाए रखा जाए।

मंत्री ने पश्चिमी मध्य प्रदेश, विशेषकर उज्जैन और नर्मदा-ताप्ती बेसिन में उपलब्ध जल की विशेष समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि आगामी रबी सीजन में सिंचाई, पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए बेसिनवार एवं परियोजनावार जल बजट तैयार किया जाए।

आम जनता और किसानों पर असर

गौरतलब है कि रबी सीजन की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है और सिंचाई के लिए बांधों का जलस्तर निर्णायक भूमिका निभाता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के किसानों के लिए कम जलभराव की स्थिति चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि इस क्षेत्र में औसत से 12 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। मंत्री सिलावट ने स्पष्ट किया कि अधिकांश जलाशयों में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे महज प्रशासनिक समीक्षा की भाषा में दबाया नहीं जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनिश्चितता बढ़ रही है और राज्य में सिंचाई का बुनियादी ढाँचा अभी भी मानसून-निर्भर है। 'संतोषजनक' जैसे शब्द समग्र औसत को तो छुपा लेते हैं, लेकिन क्षेत्रीय असमानता को नहीं — और यही असमानता किसानों की फसल योजना और पेयजल आपूर्ति दोनों को प्रभावित करेगी। जल बजट की घोषणा सही दिशा में कदम है, बशर्ते उसे कागज़ों तक सीमित न रखा जाए।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश के बांधों में इस साल कितना पानी है?
राज्य के 54 प्रमुख बांधों में 30 सितंबर 2026 तक औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 95.13 प्रतिशत से कम है। पाँच वर्षों का औसत 88.45 प्रतिशत रहा है।
मध्य प्रदेश में इस साल कम बारिश क्यों हुई?
राज्य में कुल 908.30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो दीर्घावधि औसत 949.50 मिलीमीटर से लगभग 4 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी 12 प्रतिशत तक रही, जबकि पूर्वी क्षेत्र में औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
कौन-से बेसिन में सबसे कम पानी है?
नर्मदा-ताप्ती बेसिन में सबसे कम 57 प्रतिशत जलभराव है। उज्जैन बेसिन में भी केवल 71 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है, जो रबी सीजन की सिंचाई के लिए चिंता का विषय है।
रबी सीजन की सिंचाई पर क्या असर पड़ेगा?
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए हैं कि रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बेसिनवार जल बजट तैयार किया जाए। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कम जलभराव के कारण किसानों को सीमित जल आवंटन का सामना करना पड़ सकता है।
90 प्रतिशत से अधिक भरे बांधों की निगरानी क्यों जरूरी है?
35 बांध 90 प्रतिशत से अधिक भरे हैं, जिससे अतिरिक्त वर्षा की स्थिति में बाढ़ का खतरा बन सकता है। मंत्री सिलावट ने इन बांधों में जलस्तर, आवक और निकासी की नियमित समीक्षा और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन व आपदा प्रबंधन दलों से समन्वय के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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