कैलाश विजयवर्गीय ने पार्षद संध्या यादव पर टिप्पणी के लिए माफी माँगी, कांग्रेस पर लगाया 'गलत तरीके से उठाने' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 22 सितंबर 2026 को एक वीडियो बयान जारी कर इंदौर के एक कार्यक्रम में पार्षद संध्या यादव की तंदुरुस्ती को लेकर दी गई अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया। उनके मूल बयान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे महिला का अपमान करार दिया था, जिसके बाद विजयवर्गीय को सार्वजनिक रूप से सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मंत्री ने वीडियो में क्या कहा
विजयवर्गीय ने अपने वीडियो बयान में कहा कि पार्षद संध्या यादव के वार्ड में बड़े पैमाने पर विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा, 'संध्या मेरी बेटी के समान है। मैंने उन्हें बचपन में बेटी की तरह खिलाया है — न तो उनके मन में कुछ है और न ही मेरे मन में कुछ है।' मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस ने जानबूझकर यह मुद्दा उठाया, जिससे वे दुखी हैं। उन्होंने जोड़ा, 'मेरी बेटी भी संध्या की उम्र की है — इस संबंध में मैं खेद व्यक्त करता हूँ।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पार्षद संध्या यादव की तंदुरुस्ती पर एक टिप्पणी की। कांग्रेस ने इस बयान को तुरंत पकड़ लिया और इसे महिला की गरिमा के विरुद्ध बताया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिलाओं को लेकर नेताओं की बयानबाज़ी पहले से ही सियासी संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने विजयवर्गीय के मूल बयान को महिला-विरोधी करार देते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी के नेताओं ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर भी निशाना साधा और माँग की कि मंत्री सार्वजनिक रूप से जवाब दें। विजयवर्गीय का यह खेद-प्रकटन कांग्रेस के दबाव के बाद ही सामने आया, हालाँकि मंत्री ने यह कहते हुए खुद को बचाने की कोशिश की कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में महिलाओं पर नेताओं की टिप्पणियाँ बार-बार सियासी माहौल को गर्मा चुकी हैं। यह पहली बार नहीं है कि किसी वरिष्ठ भाजपा नेता को ऐसे बयान के लिए सार्वजनिक खेद व्यक्त करना पड़ा हो। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ विपक्ष को सत्तारूढ़ दल के खिलाफ आसान मुद्दा थमा देती हैं। आगे देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे को और आगे ले जाती है या विजयवर्गीय का खेद-प्रकटन इस विवाद पर पर्दा डालने में कामयाब रहता है।