मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन का नया रिकॉर्ड: 365.11 लाख मीट्रिक टन, देश के निर्यात में 35-40% हिस्सेदारी

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मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन का नया रिकॉर्ड: 365.11 लाख मीट्रिक टन, देश के निर्यात में 35-40% हिस्सेदारी

सारांश

मध्य प्रदेश ने इस वर्ष 365.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। देश के कुल गेहूं निर्यात में 35-40% हिस्सेदारी के साथ राज्य अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी छाया हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में उपार्जन लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया गया है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में इस वर्ष गेहूं उत्पादन 365.11 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
उत्पादकता बढ़कर 3,780 किलो प्रति हेक्टेयर ; गेहूं का रकबा 96.58 लाख हेक्टेयर हुआ।
भारत के कुल गेहूं निर्यात में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत ।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के आग्रह पर उपार्जन लक्ष्य 78 लाख से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया।
किसानों को ₹2,625 प्रति क्विंटल (समर्थन मूल्य + बोनस) की दर से भुगतान; उपार्जन 23 मई तक जारी।
राज्य देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक; 3 लाख से अधिक किसान बीज उत्पादन कंपनियों से जुड़े।

मध्य प्रदेश में इस वर्ष 365.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन दर्ज किया गया है, जो राज्य के इतिहास में एक नया कीर्तिमान है। बढ़ते सिंचाई संसाधनों और विस्तारित कृषि रकबे के चलते मध्य प्रदेश अब देश के कुल गेहूं उत्पादन में 18 प्रतिशत की भागीदारी के साथ 'गेहूं प्रदेश' के रूप में स्थापित हो चुका है। 12 मई 2026 को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, उत्पादकता बढ़कर 3,780 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई है।

उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल

राज्य में गेहूं की खेती का रकबा वर्ष 2004-05 में मात्र 42 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह दो दशकों में लगभग 130 प्रतिशत की वृद्धि है। सिंचाई नेटवर्क के विस्तार को इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अनिश्चित मानसून के कारण कृषि उत्पादन पर दबाव बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मध्य प्रदेश के गेहूं की माँग

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत से विदेशों को निर्यात होने वाले गेहूं में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत है। राज्य के शरबती और डयूरम गेहूं की प्राकृतिक मिठास के कारण जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में विशेष माँग बनी हुई है। इसके अतिरिक्त ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, मलेशिया और इंडोनेशिया भी मध्य प्रदेश के गेहूं के प्रमुख आयातक देश हैं। राज्य का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता निर्माण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।

सरकारी उपार्जन और किसानों को समर्थन मूल्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव के आग्रह पर इस वर्ष गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। किसानों से ₹2,585 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार द्वारा ₹40 प्रति क्विंटल बोनस राशि जोड़कर कुल ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर पूरे इंतजाम किए गए हैं और यह प्रक्रिया 23 मई तक जारी रहेगी।

बीज उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता

मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में राज्य पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। बीज उत्पादन कंपनियों से 3 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। ये कंपनियाँ अब भंडारण, विपणन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही हैं। फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों को और सशक्त बनाने की दिशा में काम जारी है।

आगे की राह

राज्य सरकार के अनुसार इन सभी प्रयासों से मध्य प्रदेश न केवल गेहूं बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में भी राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है। यदि उपार्जन का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन पूरा होता है, तो यह राज्य की कृषि नीति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उपार्जन तंत्र की क्षमता और किसानों तक समय पर भुगतान पहुँचाने में है। देश के गेहूं निर्यात में 35-40% हिस्सेदारी होने के बावजूद, निर्यात नीति में केंद्र सरकार के प्रतिबंधात्मक रुख ने अतीत में मध्य प्रदेश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय मूल्यों का पूरा लाभ लेने से रोका है। उपार्जन लक्ष्य बढ़ाना स्वागतयोग्य है, लेकिन भंडारण क्षमता और समय पर भुगतान की व्यवस्था पर ध्यान न दिया गया तो रिकॉर्ड उत्पादन का लाभ किसान तक पहुँचने की बजाय बिचौलियों तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में इस वर्ष गेहूं उत्पादन कितना हुआ है?
इस वर्ष मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचा है, जो राज्य का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन है। उत्पादकता भी बढ़कर 3,780 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई है।
मध्य प्रदेश के गेहूं की विदेशों में इतनी माँग क्यों है?
मध्य प्रदेश के शरबती और डयूरम गेहूं में प्राकृतिक मिठास होती है, जो ब्रेड, बिस्किट और पास्ता निर्माण के लिए आदर्श मानी जाती है। इसी कारण जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके और खाड़ी देशों में इसकी विशेष माँग बनी रहती है।
गेहूं उपार्जन में किसानों को कितनी कीमत मिल रही है?
किसानों को ₹2,585 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार का ₹40 प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर कुल ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह उपार्जन 23 मई तक चलेगा।
मध्य प्रदेश में गेहूं का रकबा कितना बढ़ा है?
वर्ष 2004-05 में राज्य में गेहूं की खेती केवल 42 लाख हेक्टेयर में होती थी, जो अब बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर हो गई है — यानी दो दशकों में लगभग 130% की वृद्धि।
मध्य प्रदेश का गेहूं उत्पादन में राष्ट्रीय योगदान कितना है?
देश के कुल गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है। वहीं भारत के कुल गेहूं निर्यात में राज्य का योगदान 35 से 40 प्रतिशत है, जो इसे देश का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक राज्य बनाता है।
राष्ट्र प्रेस