तमिलनाडु DGP: 1994 बैच के IPS महेश कुमार अग्रवाल बने राज्य के 34वें पुलिस महानिदेशक
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ IPS अधिकारी महेश कुमार अग्रवाल ने 3 जून को बुधवार सुबह तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) का पदभार ग्रहण कर लिया, और वह राज्य पुलिस बल का नेतृत्व करने वाले 34वें अधिकारी बन गए। 1994 बैच के इस अधिकारी ने सुबह 10:45 बजे चेन्नई के कामराजर सलाई स्थित DGP मुख्यालय में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाला।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
अग्रवाल की नियुक्ति हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद की गई है। चुनाव के दौरान भारतीय चुनाव आयोग के निर्देश पर वरिष्ठ IPS अधिकारी संदीप राय राठौर को राज्य पुलिस का प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। TVK के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद पूर्णकालिक DGP की चयन प्रक्रिया शुरू हुई।
UPSC की मंज़ूरी और चयन
राज्य सरकार ने राजीव कुमार, संदीप राय राठौर और महेश कुमार अग्रवाल के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा था। नई दिल्ली में हुई बैठक में UPSC ने इस पैनल को मंज़ूरी दी, जिसके बाद राज्य सरकार ने अग्रवाल को तमिलनाडु पुलिस के सर्वोच्च पद के लिए चुना।
तीन दशक का सेवा अनुभव
अग्रवाल के पास पुलिस सेवा का तीन दशक से अधिक का अनुभव है और वह तमिलनाडु में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। पंजाब में जन्मे अग्रवाल ने कानून की पढ़ाई की है तथा एक योग्य अधिवक्ता भी हैं। उन्हें तमिल, अंग्रेज़ी, हिंदी और पंजाबी भाषाओं का अच्छा ज्ञान है।
उन्होंने चेन्नई में तीन वर्षों तक पुलिस उपायुक्त (DCP) के रूप में सेवा दी है। इसके अलावा वह चेन्नई में ट्रैफिक DCP और तूतीकोरिन ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) भी रह चुके हैं।
तकनीक-आधारित पुलिसिंग पर ज़ोर
चेन्नई में CCTV निगरानी नेटवर्क के विस्तार में अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। माना जाता है कि इससे शहर में अपराधों का पता लगाने और सार्वजनिक सुरक्षा को मज़बूत करने में मदद मिली। उन्होंने ‘नाइट क्राइम टू ज़ीरो’ पहल भी शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रात के समय होने वाले अपराधों को कम करना था।
उन्होंने कई बड़े और चर्चित मामलों की जाँच और निगरानी की है, जिनमें चर्चित सेलम ट्रेन डकैती मामला भी शामिल है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
आगे क्या
अग्रवाल की नियुक्ति को तमिलनाडु पुलिस में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि उनका व्यापक अनुभव और तकनीक-आधारित पुलिसिंग पर ज़ोर राज्य में कानून-व्यवस्था तथा सार्वजनिक सुरक्षा को और मज़बूत करेगा।