11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल का बड़ा फैसला: सप्ताह में दो बार सुनी जाएंगी जनता की शिकायतें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल का बड़ा फैसला: सप्ताह में दो बार सुनी जाएंगी जनता की शिकायतें

सारांश

तमिलनाडु डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल ने राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हर बुधवार और शनिवार को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक जनता की शिकायतें सुनने का आदेश दिया है — पुलिस और नागरिकों के बीच भरोसे की खाई पाटने की एक ठोस कोशिश।

मुख्य बातें

तमिलनाडु डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल ने 24 जून को राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जन शिकायत सुनवाई का आदेश जारी किया।
बुधवार और शनिवार को 'जन शिकायत निवारण दिवस' घोषित; समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित।
डीएसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी और पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारी अपने कार्यालयों में उपस्थित रहेंगे।
नामित अधिकारी की अनुपस्थिति में उनके ठीक नीचे के वरिष्ठ अधिकारी शिकायतें सुनेंगे।
राज्य पुलिस मुख्यालय इस व्यवस्था के क्रियान्वयन और अधिकारियों के कामकाज की निगरानी करेगा।

तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) महेश कुमार अग्रवाल ने राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक सप्ताह दो निर्धारित दिनों पर आम नागरिकों से सीधे मिलकर उनकी शिकायतें सुनें। 24 जून को जारी इस आदेश का उद्देश्य पुलिस प्रशासन को अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाना है। यह पहल नागरिकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच भरोसे को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

जन शिकायत निवारण दिवस: क्या है व्यवस्था

डीजीपी के आदेश के अनुसार, बुधवार और शनिवार को 'जन शिकायत निवारण दिवस' घोषित किया गया है। इन दिनों डीएसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी और पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारियों को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपने-अपने कार्यालयों में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इस दौरान वे नागरिकों की शिकायतें व्यक्तिगत रूप से सुनेंगे और तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए

डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ताओं के साथ सम्मानजनक और मैत्रीपूर्ण व्यवहार किया जाए तथा किसी भी अनावश्यक देरी के बिना समस्याओं का समाधान किया जाए। यदि कोई नामित अधिकारी न्यायालय में पेशी, सरकारी बैठक, कानून-व्यवस्था ड्यूटी या किसी अन्य आवश्यक कार्य के कारण सत्र में उपस्थित न हो सके, तो उनके ठीक नीचे के वरिष्ठ अधिकारी को शिकायतें सुनने और कार्रवाई शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

निगरानी और जवाबदेही

डीजीपी ने यह भी निर्देश दिया है कि इन सत्रों के दौरान प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उचित समाधान होने तक उनकी नियमित निगरानी की जाए। राज्य पुलिस मुख्यालय इस शिकायत निवारण प्रणाली के क्रियान्वयन और अधिकारियों के कामकाज पर बारीकी से नज़र रखेगा। गौरतलब है कि यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि नागरिकों को लंबे समय तक प्रतीक्षा न करनी पड़े और शिकायत समाधान की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।

आम जनता पर असर

यह पहल उन नागरिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो अब तक छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए पुलिस तंत्र में उचित सुनवाई न मिलने की शिकायत करते रहे हैं। सीनियर अधिकारियों तक सीधी पहुँच का यह व्यवस्थित मंच शिकायतों के तेज़ी से समाधान और पुलिस बल के भीतर जवाबदेही बढ़ाने में सहायक होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में पुलिस-जन संबंधों को बेहतर बनाने की माँग लगातार उठ रही है।

आगे की राह

राज्य पुलिस मुख्यालय इस आदेश के अनुपालन की समीक्षा करेगा और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को ईमानदारी से लागू किया जाए, तो यह तमिलनाडु पुलिस की जन-सेवा छवि को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। देश के कई राज्यों में इस तरह की 'जन सुनवाई' व्यवस्थाएँ कागज़ पर रही हैं — अधिकारी 'अनुपस्थिति के वैध कारणों' की आड़ में सत्र से बचते रहे हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय की निगरानी की बात तो कही गई है, लेकिन यह निगरानी किस पैमाने पर होगी और शिकायत समाधान दर को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं — यह स्पष्ट नहीं है। जब तक शिकायत निवारण के आँकड़े पारदर्शी रूप से सामने नहीं आते, यह पहल जन-विश्वास की बहाली में कितनी कारगर होगी, यह कहना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु डीजीपी के जन शिकायत आदेश में क्या है?
डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल ने आदेश दिया है कि हर बुधवार और शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक डीएसपी से लेकर पुलिस कमिश्नर तक के अधिकारी अपने कार्यालयों में उपस्थित रहकर नागरिकों की शिकायतें सुनेंगे। इन दिनों को 'जन शिकायत निवारण दिवस' घोषित किया गया है।
यह आदेश किन पुलिस अधिकारियों पर लागू होगा?
यह आदेश तमिलनाडु के डीएसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी और पुलिस कमिश्नर स्तर के सभी वरिष्ठ अधिकारियों पर लागू होगा। यदि नामित अधिकारी उपस्थित न हो सकें, तो उनके ठीक नीचे के वरिष्ठ अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
अगर अधिकारी कोर्ट या बैठक में हों तो क्या होगा?
आदेश में यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय पेशी, सरकारी बैठक या कानून-व्यवस्था ड्यूटी जैसे वैध कारणों से नामित अधिकारी की अनुपस्थिति में उनके ठीक नीचे के वरिष्ठ अधिकारी शिकायतें सुनेंगे और आवश्यक कार्रवाई शुरू करेंगे, ताकि सुनवाई की प्रक्रिया बाधित न हो।
इस व्यवस्था की निगरानी कौन करेगा?
राज्य पुलिस मुख्यालय इस शिकायत निवारण प्रणाली के क्रियान्वयन और अधिकारियों के कामकाज पर बारीकी से नज़र रखेगा। डीजीपी ने यह भी निर्देश दिया है कि प्राप्त शिकायतों पर उचित कार्रवाई होने तक उनकी नियमित निगरानी की जाए।
इस पहल से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
इस व्यवस्था से नागरिकों को सीनियर पुलिस अधिकारियों तक सीधी पहुँच मिलेगी और शिकायतों का त्वरित समाधान संभव होगा। लंबे इंतज़ार और बिचौलियों की ज़रूरत के बिना लोग सीधे अपनी समस्याएँ रख सकेंगे, जिससे पुलिस और नागरिकों के बीच भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले