दिल्ली पुलिस का 'थाना दिवस-जन सुनवाई' कार्यक्रम: 29 थानों में नागरिकों की शिकायतें सुनी गईं
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 20 जून 2026 को 'थाना दिवस-जन सुनवाई' नामक एक नई नागरिक-केंद्रित पहल का शुभारंभ किया, जिसके तहत सेंट्रल रेंज के सभी 29 पुलिस स्टेशनों में आम नागरिकों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष सीधे अपनी शिकायतें, सुझाव और सुरक्षा संबंधी मुद्दे रखने का अवसर दिया गया। इस पहल का उद्देश्य पुलिस तंत्र में पारदर्शिता लाना और शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करना है।
पहल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
यह कार्यक्रम दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के विजन और पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के नेतृत्व में आरंभ किया गया है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि जनता और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित होने से न केवल शिकायतों का अधिक प्रभावी समाधान होगा, बल्कि पुलिस के प्रति आम नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होगा। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और सुलभता को लेकर देशभर में बहस जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
इस पहले चरण में सेंट्रल जिले के 15 और नॉर्थ जिले के 14 पुलिस स्टेशन शामिल रहे। डीसीपी, अतिरिक्त डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों ने विभिन्न थानों का दौरा कर नागरिकों से सीधी बातचीत की। जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई आवश्यक थी, उन्हें मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया, जबकि जटिल मामलों को आगे की जाँच के लिए अग्रेषित किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी
संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रेंज), आईपीएस अधिकारी मधुर वर्मा ने स्वयं नॉर्थ जिले के सिविल लाइंस थाना और सेंट्रल जिले के दरियागंज थाना में आयोजित जन सुनवाई में भाग लिया। उन्होंने नागरिकों से सीधी बातचीत करते हुए शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की और निष्पक्ष, त्वरित एवं नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग की आवश्यकता पर बल दिया।
आम जनता पर असर
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस कार्यक्रम को जनता की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और बड़ी संख्या में नागरिकों ने अपनी समस्याएं एवं सुझाव अधिकारियों के समक्ष रखे। नागरिकों को पुलिस कार्यप्रणाली, सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विषयों से जुड़े मुद्दे उठाने का सीधा मंच मिला — जो पहले केवल औपचारिक शिकायत प्रक्रियाओं तक सीमित था।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह पहल अभी केवल सेंट्रल रेंज में आरंभ हुई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, पहले चरण की सफलता के आधार पर इसे दिल्ली की अन्य रेंजों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो यह नागरिक-पुलिस संवाद के लिए एक स्थायी संस्थागत ढाँचे की नींव बन सकता है।