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महिला आरक्षण विधेयक गिरने पर संतों की तीखी प्रतिक्रिया, बोले- 'महिलाओं के सम्मान के खिलाफ साजिश'

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महिला आरक्षण विधेयक गिरने पर संतों की तीखी प्रतिक्रिया, बोले- 'महिलाओं के सम्मान के खिलाफ साजिश'

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न होने पर अयोध्या के संतों ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के खिलाफ एक साजिश बताया।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का गिरना महत्वपूर्ण मुद्दा है।
संतों ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
महिलाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता है।
राजनीति में महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए।
सरकार का प्रयास था कि 2029 तक यह आरक्षण प्रभावी हो सके।

अयोध्या, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने पर अयोध्या के प्रमुख संतों और धार्मिक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के खिलाफ राजनीतिक खेल खेलने का आरोप लगाया।

साकेत भवन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लाने का प्रयास किया था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे रोकने की कोशिश की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और आप जैसे दलों ने हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ काम किया है। हमारी परंपरा कहती है, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता'—अर्थात् जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां दैवीय शक्तियां निवास करती हैं। इस विधेयक का विरोध करके उन्होंने महिलाओं और देश के मूल्यों के प्रति अपनी नकारात्मक मानसिकता का प्रदर्शन किया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि प्रधानमंत्री राष्ट्र और इसकी संस्कृति के लिए निरंतर कार्य करते रहें। भविष्य में एक सशक्त जनादेश के साथ इस विधेयक को पुनः प्रस्तुत किया जाएगा और पारित भी कराया जाएगा।"

तपस्वी छावनी के प्रमुख परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान और उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दलों ने महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया है। वे महिलाओं के वोट तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें आगे बढ़ते हुए या सम्मान पाते हुए नहीं देखना चाहते। जब मैंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना तो वे बहुत भावुक और आहत नजर आए। उनका सपना सभी क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त देखना था, लेकिन वह सपना अब टल गया है।"

आर्य संत वरुण दास ने इस मुद्दे पर कहा, "संसद में महिला आरक्षण विधेयक गिर गया है। इससे पहले भी कई प्रयास किए गए थे, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से लोकतंत्र और मजबूत होगा।"

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, "हमारे देश की परंपराएं, कानून और व्यवस्थाएं—ये सभी इस बात पर जोर देते हैं कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। महिलाओं को राजनीति में समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकें।"

यह विधेयक महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ाने से संबंधित था। सरकार का प्रयास था कि 2029 तक यह आरक्षण प्रभावी हो सके, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह विफल हो गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में महिलाओं के स्थान और सम्मान का भी सवाल है। संतों ने इसे गंभीरता से लिया है, और यह दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर हमें और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
यह विधेयक महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संबंधित है।
क्यों यह विधेयक गिर गया?
यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया।
संतों की प्रतिक्रिया क्या थी?
संतों ने विपक्षी दलों पर महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
महिला आरक्षण का महत्व क्या है?
महिला आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे लोकतंत्र मजबूत होगा।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का क्या कहना था?
प्रधानमंत्री ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास करने की बात की।
राष्ट्र प्रेस
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