महिलाओं को मार्शल आर्ट्स के साथ 'पावर ऑफ लॉजिक' पर भी ध्यान देना चाहिए: राकेश सिन्हा

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महिलाओं को मार्शल आर्ट्स के साथ 'पावर ऑफ लॉजिक' पर भी ध्यान देना चाहिए: राकेश सिन्हा

सारांश

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित सम्मेलन में राकेश सिन्हा ने महिलाओं के विकास पर चर्चा की। उन्होंने मार्शल आर्ट्स और तर्कशीलता की आवश्यकता पर जोर दिया।

Key Takeaways

  • महिलाओं का सशक्तीकरण आवश्यक है।
  • मार्शल आर्ट्स से आत्मरक्षा में सुधार होता है।
  • पावर ऑफ लॉजिक से तर्कशीलता बढ़ती है।

नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में 'भारती: नारी से नारायणी' शीर्षक से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन महिलाओं के विकास पर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पैनल चर्चा आयोजित की गई।

इस पैनल चर्चा में पूर्व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, और कलारीपयट्टू के गुरु व अगस्त्यम फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. एस. महेश शामिल हुए।

राकेश सिन्हा ने कहा, "आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, इस अवसर पर मैं महिलाओं की प्रगति को रेखांकित करना चाहूंगा। 1921 की जनगणना में बाल विधवाओं के आंकड़े चौंकाने वाले थे, जिसने स्वामी श्रद्धानंद को गहन शोध के लिए प्रेरित किया। उस समय एक वर्ष की आयु की 597 बच्चियों को विधवा घोषित किया गया था, जबकि 2 से 4 वर्ष की विधवा बच्चियों की संख्या 494 थी। आज हम इस स्थिति से बाहर निकल कर यहां तक पहुंचे हैं। आज की पीढ़ी तर्कशील बन गई है। बच्चियों को मार्शल आर्ट्स सीखना चाहिए और पावर ऑफ लॉजिक पर भी ध्यान देना चाहिए।"

डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा, "शाश्वत सत्य यह है कि अच्छे लोग, समाज और कला-ये तीनों ही महिलाओं की शक्ति के बिना अधूरे हैं। हमारी परंपरा में इस भावना को 'नारी, तुम नारायणी हो' वाक्यांश में व्यक्त किया गया है। हमारा लक्ष्य कला को तकनीक के रूप में सिखाना नहीं है, बल्कि लोगों में संवेदनशीलता विकसित करना है। आज की पीढ़ी को कला एवं संस्कृति का सम्मान करना सीखना आवश्यक हो गया है।"

कलारीपयट्टू के उस्ताद डॉ. एस. महेश ने कहा, "हम जिस विषय पर चर्चा कर रहे हैं, वह यह है कि हम नारी को नारायणी में कैसे रूपांतरित करेंगे। आप नारी और नारायणी की छवि में क्या अंतर पाते हैं? दोनों की छवियां भिन्न हैं। हमारे सभी देवी-देवताओं के हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं, चाहे वह महाकाली हों या भगवान शिव। सभी शस्त्रों के साथ हैं, जो एक योद्धा की शक्ति को दर्शाता है, लेकिन वर्तमान में हमारे भीतर छिपी योद्धा की शक्ति डर के साए में खो गई है। हमारा इतिहास युद्ध से भरा है और ऐसी कई रानियां रही हैं, जिन्होंने युद्ध के मैदान में दुश्मनों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।"

Point of View

जहाँ राकेश सिन्हा और अन्य विशेषज्ञों ने नारी की शक्ति और उसके विकास के लिए आवश्यक पहलुओं पर प्रकाश डाला। यह सम्मेलन महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है।
मार्शल आर्ट्स सीखने के क्या फायदे हैं?
मार्शल आर्ट्स आत्मरक्षा, आत्मविश्वास, और शारीरिक फिटनेस को बढ़ाने में मदद करता है।
पावर ऑफ लॉजिक का क्या मतलब है?
पावर ऑफ लॉजिक का अर्थ है तर्क शक्ति का उपयोग कर सही निर्णय लेना और समस्याओं को सुलझाना।
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