मालदा मामले पर सियासी घमासान, कांग्रेस-सपा ने चुनाव आयोग और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया
सारांश
Key Takeaways
- मालदा मामले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
- कांग्रेस और सपा ने चुनाव आयोग और भाजपा पर आरोप लगाए हैं।
- प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई की मांग की है।
- धर्मेंद्र सिंह ने लोकतंत्र के लिए खतरे की बात की है।
- मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाया गया है।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मालदा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) मामले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में होती है।
उन्होंने कहा, "निष्पक्षता केवल दिखने के लिए नहीं, बल्कि वास्तव में मौजूद होनी चाहिए।" प्रमोद तिवारी ने यह आरोप लगाया कि जिस तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एसआईआर प्रक्रिया का संचालन किया जा रहा है, वह भाजपा के पक्ष में झुका हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने इस मुद्दे को पहले ही संसद में उठाया है, फिर भी ये गतिविधियाँ जारी हैं।
जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया, तब प्रमोद तिवारी ने इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा करता हूँ। आखिर कब तक चुप्पी बनी रहेगी? अब कार्रवाई का समय है।" प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग, विशेषकर मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की समीक्षा करनी चाहिए और कठोर कदम उठाने चाहिए।
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता धर्मेंद्र सिंह ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी पर कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन पश्चिम बंगाल में एसआईआर के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, केंद्रीय गृह मंत्री और चुनाव आयोग मिलकर इस प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं के पास से हजारों की संख्या में फॉर्म-6 मिलना यह दर्शाता है कि वे निष्पक्ष चुनाव नहीं चाहते और मतदाता सूची में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं।