ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर यूपी के तीन मंत्रियों का हमला, 'जनादेश का सम्मान करें'

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ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर यूपी के तीन मंत्रियों का हमला, 'जनादेश का सम्मान करें'

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर उत्तर प्रदेश के तीन कैबिनेट मंत्रियों ने एक साथ मोर्चा खोला। विजय लक्ष्मी गौतम, दानिश आजाद अंसारी और अनिल राजभर ने संविधान और जनादेश की दुहाई देते हुए ममता बनर्जी को घेरा — और इसे लोकतंत्र के खिलाफ 'फैशन' करार दिया।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने 6 मई 2026 को ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार को संवैधानिक नियमों का उल्लंघन बताया।
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश का अपमान कर रही हैं।
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति को 'फैशन' बताते हुए आलोचना की।
गौतम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों और असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ा।
तीनों मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत को जनता का स्पष्ट जनादेश करार दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनावी हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार करने पर 6 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि जनता ने स्पष्ट रूप से सत्ता परिवर्तन के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया है और मुख्यमंत्री को संवैधानिक नियमों का पालन करना चाहिए। यह मामला उस समय और गरमा गया जब यूपी के दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने भी ममता बनर्जी के रवैये की कड़ी आलोचना की।

मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम का बयान

मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र संविधान के अनुसार संचालित होता है और हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह उसके प्रावधानों का पालन करे। उनके अनुसार, ममता बनर्जी फिलहाल राजनीतिक परिस्थितियों से विचलित हैं और हार को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा लगता है — पश्चिम बंगाल की जीत को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की कोशिश। गौरतलब है कि संविधान में किसी मुख्यमंत्री के लिए चुनाव हारने के बाद तत्काल इस्तीफे की कोई स्पष्ट बाध्यता नहीं है, जिससे 'संवैधानिक उल्लंघन' का तर्क कानूनी रूप से कमज़ोर पड़ता है। साथ ही, बांग्लादेशी घुसपैठ और TMC पर अराजकता के आरोप बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन के लगाए गए हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता हस्तांतरण की वास्तविक संवैधानिक प्रक्रिया और समयसीमा क्या है — यह सवाल इस पूरी बहस में अनुत्तरित रह गया है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से क्यों इनकार किया?
स्रोत के अनुसार, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं। यूपी के मंत्रियों ने इसे जनादेश का अपमान बताया है, हालाँकि ममता बनर्जी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
यूपी के किन मंत्रियों ने ममता बनर्जी की आलोचना की?
उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर — तीनों ने 6 मई 2026 को ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार की आलोचना की। तीनों ने इसे संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध बताया।
अनिल राजभर ने ईवीएम पर क्या कहा?
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि जब भी विपक्षी दल चुनाव हारते हैं, ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना एक पुरानी प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने इसे जनादेश का अनादर करने का 'फैशन' बताया और कहा कि यह संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर यूपी मंत्रियों ने क्या कहा?
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा पर भरोसा जताते हुए भारी मतों से जीत दिलाई है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया।
विजय लक्ष्मी गौतम ने TMC शासन पर क्या आरोप लगाए?
विजय लक्ष्मी गौतम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में कई ग्राम पंचायतों में बांग्लादेशी घुसपैठियों और TMC से जुड़े असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ा। उन्होंने कहा कि इसी कारण राज्य की जनता ने इस बार भाजपा के पक्ष में मतदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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