ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार: उज्जवल निकम बोले — 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गतिरोध का प्रयास'

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ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार: उज्जवल निकम बोले — 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गतिरोध का प्रयास'

सारांश

चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार पश्चिम बंगाल में एक असाधारण राजनीतिक नाटक को जन्म दे रहा है। BJP सांसद उज्जवल निकम ने इसे संविधान-विरोधी गतिरोध बताया है, जबकि संवैधानिक विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 8 मई को नई विधानसभा के गठन के साथ यह विवाद अपने आप सुलझ जाएगा।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 5 मई को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार किया।
BJP सांसद उज्जवल निकम ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गतिरोध का प्रयास और कानूनी आधारहीन कदम बताया।
भवानीपुर सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त होगा और 8 मई को नई विधानसभा का गठन होगा।
संवैधानिक विशेषज्ञ विराग गुप्ता के अनुसार पत्र या ईमेल से दिया गया इस्तीफा भी संवैधानिक रूप से मान्य होगा।
त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा कि 8 मई के बाद यह मुद्दा स्वतः निरर्थक हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार, 5 मई को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने दावा किया कि वे "जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हारी हैं" और इसलिए राजभवन जाकर इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। इस बयान के बाद देशभर में संवैधानिक और राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।

उज्जवल निकम का कड़ा बयान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम ने ममता बनर्जी के रुख को संविधान-विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, "हमारे देश में यह पहली बार है कि चुनाव हारने के बाद कोई मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर रहा है। यह स्पष्ट रूप से एक गतिरोध पैदा करने का प्रयास है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।" निकम ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए एक खतरनाक मिसाल बताया।

संवैधानिक स्थिति क्या कहती है

सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत का संविधान स्पष्ट करता है कि यदि कोई पार्टी विधानसभा चुनाव हार जाती है तो स्थापित प्रथा के अनुसार मौजूदा मुख्यमंत्री राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा देते हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है और 8 मई को नई विधानसभा का गठन होगा, जिसके बाद एक नए मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।

अधिवक्ता विराग गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा नहीं देती हैं तो इससे तत्काल संवैधानिक संकट उत्पन्न नहीं होगा, क्योंकि पत्र या ईमेल के माध्यम से भेजा गया इस्तीफा भी वैध माना जाता है, यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार कर लिया जाए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 172 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के बाद नई विधानसभा का गठन और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति अवश्यंभावी है।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने ममता बनर्जी द्वारा हार के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराने पर कहा कि ऐसे बयान परिणाम आने के बाद जिम्मेदारी दूसरों पर डालने का प्रयास हैं। उन्होंने भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी द्वारा ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराने को पश्चिम बंगाल की जनता का स्पष्ट जनादेश बताया।

पश्चिम बंगाल BJP के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, "ममता बनर्जी जाने से पहले तमाशा कर रही हैं। उनके इस्तीफा न देने से कुछ नहीं होगा।" BJP की विजयी उम्मीदवार रूपा गांगुली ने कहा, "अगर आप हारती हैं तो आपको हार स्वीकार करनी होगी। इन सबको देखने के लिए राज्यपाल, चुनाव आयोग और देश का संविधान है।"

पूर्व राज्यपाल का तंज

त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है? 8 मई को विधानसभा सत्र तो वैसे भी समाप्त हो जाएगा। उसके बाद वह क्या करेंगी? वह बस सड़कों पर बैठ जाएंगी।" गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर पूरे देश की नज़रें टिकी हुई हैं।

आगे क्या होगा

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, 8 मई को नई विधानसभा के गठन के साथ ही ममता बनर्जी की मुख्यमंत्री के रूप में कानूनी स्थिति स्वतः समाप्त हो जाएगी। राज्यपाल तब नई विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन की यह प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में निर्णायक मोड़ पर पहुँचने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संवैधानिक रूप से यह महज एक विलंब की रणनीति है — क्योंकि 8 मई को नई विधानसभा के गठन के साथ उनकी कानूनी स्थिति स्वतः समाप्त हो जाएगी। असली सवाल यह है कि क्या यह 'साजिश' का आरोप भविष्य में किसी बड़े आंदोलन की भूमिका है, या केवल एक हारे हुए नेता की राजनीतिक छवि बचाने की कोशिश। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में चुनावी हार के बाद सत्ता-हस्तांतरण की परंपराओं पर सवाल उठाना एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से क्यों इनकार किया?
ममता बनर्जी ने 5 मई को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वे 'जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हारी हैं', इसलिए वे राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी हार का दोष मढ़ा।
क्या ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना संवैधानिक संकट पैदा करेगा?
संवैधानिक विशेषज्ञ विराग गुप्ता के अनुसार, व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न देने से तत्काल संवैधानिक संकट नहीं होगा, क्योंकि पत्र या ईमेल से दिया गया इस्तीफा भी वैध है। इसके अलावा, 8 मई को नई विधानसभा के गठन के साथ उनका कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा।
पश्चिम बंगाल में नई विधानसभा का गठन कब होगा?
पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है और 8 मई को नई विधानसभा का गठन होगा। इसके बाद नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को किसने और कितने मतों से हराया?
भवानीपुर विधानसभा सीट पर BJP के सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराया। BJP के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने इसे पश्चिम बंगाल की जनता का स्पष्ट जनादेश बताया।
उज्जवल निकम ने ममता बनर्जी के रुख पर क्या कहा?
BJP सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम ने कहा कि यह देश में पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद पद छोड़ने से इनकार कर रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गतिरोध पैदा करने का प्रयास बताया जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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