मन की बात में PM मोदी ने की प्रतापगढ़ के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह की सराहना, आंवला उत्पादों को मिली पहचान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में 27 सितंबर 2026 को प्रतापगढ़ के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह का विशेष उल्लेख किया और समूह की महिलाओं द्वारा आंवले से तैयार किए जा रहे उत्पादों की खुलकर तारीफ की। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में नाम आने से समूह की सदस्य महिलाओं में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई है।
समूह का परिचय और कार्य
सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह की स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी। इस समूह की अध्यक्ष कमलेश कुमारी और सचिव सुषमा देवी हैं। दोनों ने मिलकर गाँव की नौ अन्य महिलाओं — अमिता, आशा, मीना, कविता, ज्योति, मालती, लता, रेखा और सुमित्रा — को समूह से जोड़ा।
समूह में कुल 11 महिलाएँ शामिल हैं जो गाँव में रहकर घर से ही आंवले का मुरब्बा, कैंडी और जूस समेत कई उत्पाद तैयार करती हैं। सरकारी सहायता से उत्पादन शुरू किया गया और उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग कर बाजार में बेचा जाता है। मेलों और सरकारी कार्यक्रमों में स्टॉल लगाकर भी बिक्री होती है।
कमलेश कुमारी की प्रतिक्रिया
समूह की अध्यक्ष कमलेश कुमारी ने बताया कि रविवार को उन्होंने मोबाइल पर 'मन की बात' सुना, जब प्रधानमंत्री ने उनके समूह का नाम लेकर आंवला उत्पादों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री द्वारा हमारी छोटी-सी संस्था का जिक्र करना पूरे समूह के लिए गौरव की बात है।'
कमलेश कुमारी ने यह भी बताया कि वे पिछले पाँच वर्षों से गाँव में इस समूह का संचालन कर रही हैं। समूह की महिलाएँ कई कुंतल आंवले से उत्पाद तैयार करती हैं और होने वाली आय को सभी सदस्यों के बीच समान रूप से बाँटा जाता है।
सचिव सुषमा देवी ने जताई कृतज्ञता
समूह की सचिव सुषमा देवी ने कहा कि 'पहले हम प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हैं क्योंकि उन्होंने हमारे समूह का नाम लिया। हम बैंक का भी आभार जताते हैं कि उन्होंने हमें ऋण दिया और हमारा काम आगे बढ़ सका। आज हमारा काम अच्छा चल रहा है।'
गौरतलब है कि बैंक ऋण की सुविधा मिलने के बाद ही समूह आंवला मुरब्बा और कैंडी उत्पादन को व्यावसायिक स्तर पर ले जा सका। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबता राष्ट्रीय नीति की केंद्र में है।
सरकार से माँग
समूह की अध्यक्ष कमलेश कुमारी ने सरकार से माँग की है कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की सीधी सरकारी खरीद की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि इससे महिलाओं को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आमदनी में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि उचित बाजार व्यवस्था मिलने पर समूह की महिलाएँ और अधिक मेहनत से काम कर सकती हैं।
आगे की राह
'मन की बात' में राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान से इस समूह के उत्पादों की माँग बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के हजारों स्वयं सहायता समूह बेहतर बाजार पहुँच और सरकारी समर्थन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राष्ट्रीय मंच पर मिली यह सराहना प्रतापगढ़ की इन महिलाओं के संघर्ष और समर्पण को नई दिशा देने में सहायक हो सकती है।