मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी ने किया प्रतापगढ़ के आंवले का जिक्र, ODOP से महिलाओं और किसानों को नई आय
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के आंवले की चर्चा की और बताया कि किस प्रकार यह पारंपरिक फल आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को नई ऊर्जा दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सफलता को रेखांकित किया, जो आंवला प्रसंस्करण के जरिये आत्मनिर्भर बन रही हैं।
आंवले और प्रतापगढ़ का पुराना नाता
मोदी ने कहा, 'आंवला हम सभी के लिए बहुत जाना-पहचाना है। ज्यादातर घरों में इससे बने आचार और मुरब्बे का प्रयोग होता है। बहुत से लोग आंवले का जूस पसंद करते हैं और सर्दियों में च्यवनप्राश हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाता है।' उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ और आंवले का संबंध पीढ़ियों पुराना है और यही पुरानी पहचान अब यहाँ के किसानों और महिलाओं के लिए नए अवसर लेकर आ रही है।
ODOP योजना से मिली नई रफ़्तार
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के माध्यम से आंवले से जुड़े स्थानीय उद्यमों को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। वर्तमान में प्रतापगढ़ में आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी लगभग 100 इकाइयाँ सक्रिय हैं। इन इकाइयों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। गौरतलब है कि ODOP योजना का उद्देश्य देश के हर जिले की विशिष्ट पहचान वाले उत्पाद को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ार से जोड़ना है।
सावित्री फुले सेल्फ हेल्प ग्रुप की सफलता
मोदी ने दो महिला समूहों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'देवगढ़ कमासिन गाँव का सावित्री फुले सेल्फ हेल्प ग्रुप एक प्रेरक उदाहरण है। इससे जुड़ी महिलाएँ आंवले से कैंडी, मुरब्बा और जूस बना रही हैं। ODOP के ज़रिये नए बाज़ारों तक पहुँच मिलने से उनकी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।' इसी तरह एक अन्य गाँव के स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ आंवले का आचार और डाइजेस्टिव पाउडर सहित कई उत्पाद तैयार कर रही हैं।
इन महिलाओं को प्रसंस्करण के लिए आधुनिक मशीनरी, ऋण सुविधा और स्थानीय व्यापार मेलों से जुड़ने का अवसर मिला, जिससे वे तेज़ी से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
वोकल फॉर लोकल का संदेश
मोदी ने कहा कि देश के हर क्षेत्र में कोई न कोई विशेषता अवश्य है — कहीं कोई खास फल, कहीं पारंपरिक कला, तो कहीं अनोखा हुनर। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि गाँवों और छोटे शहरों की यह पहचान केवल स्थानीय बाज़ार तक सीमित न रहे, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचे। यह वोकल फॉर लोकल अभियान को बल देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को भी साकार करता है।
अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले त्योहारों में भी वोकल फॉर लोकल के मंत्र को ध्यान में रखना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए GI टैग और निर्यात प्रोत्साहन पर ज़ोर दे रही है।