केरल चुनाव: मानालूर सीट पर दिग्गज नेताओं के बीच संघर्ष

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केरल चुनाव: मानालूर सीट पर दिग्गज नेताओं के बीच संघर्ष

सारांश

केरल की मानालूर विधानसभा सीट इस बार दिग्गज नेताओं के बीच एक कड़ा मुकाबला बन गई है, जिसमें सीपीआई(एम) और कांग्रेस के बीच रोचक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। क्या भाजपा भी इस बार कुछ कर पाएगी?

Key Takeaways

  • केरल की मानालूर सीट पर दिग्गज नेताओं का मुकाबला।
  • सीपीआई(एम) और कांग्रेस के बीच कड़ा संघर्ष।
  • भाजपा ने नए चेहरे केके अनीश कुमार को उतारा।
  • सुरेश गोपी की जीत का प्रभाव भाजपा पर होगा।
  • राजनीतिक विरासत का ख्याल रखते हुए चुनावी रणनीतियाँ।

त्रिशूर, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल की मानालूर विधानसभा सीट एक बार फिर से उच्च-स्तरीय मुकाबले का केंद्र बन गई है। यह सीट राज्य की राजनीतिक धरोहर, नेताओं की छवि और राजनीतिक दलों की रणनीतियों का संगम है, जहाँ इस बार की प्रतिस्पर्धा काफी रोचक हो गई है।

मानालूर की पहचान राज्य के पहले शिक्षा मंत्री जोसेफ मुंडासेरी से जुड़ी हुई है, जिन्होंने ईएमएस नंबूदिरीपाट की ऐतिहासिक 1957 सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह राजनीतिक धरोहर आज भी इस सीट के चुनावी वातावरण को प्रभावित करती है।

इस धरोहर को आगे बढ़ाने की कोशिश सीपीआई(एम) के उम्मीदवार सी. रवींद्रनाथ कर रहे हैं, जो पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। 70 वर्षीय रवींद्रनाथ, एक रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर हैं और अपनी सादगी और प्रशासनिक समझ के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि, उन्हें 2024 लोकसभा चुनाव में चलाकुडी सीट से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी को विश्वास है कि उनकी साफ छवि और शांत स्वभाव मतदाताओं को आकर्षित करेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले दो चुनावों में यहाँ सीपीआई(एम) के मुरली पेरुन्नल्ली ने जीत दर्ज की थी।

वहीं, कांग्रेस की ओर से अनुभवी नेता टीएन प्रथापन चुनावी मैदान में हैं, जो संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। मानालूर सीट का इतिहास कांग्रेस के पक्ष में रहा है, जहाँ 15 में से 11 बार पार्टी को जीत मिली है। इस परंपरा को मजबूत बनाने में वरिष्ठ नेता वीएम सुधीरन की बड़ी भूमिका रही है। सुधीरन और प्रथापन के बीच की सहयोगात्मकता कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

इस बीच, भाजपा भी चुनावी मैदान में है, लेकिन इस बार पार्टी के प्रमुख चेहरे एएन राधाकृष्णन नहीं हैं, जिन्होंने पिछले दो चुनावों में लगभग 22 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे। उनकी जगह पार्टी ने स्थानीय नेता केके अनीश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जो पार्टी का जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा को उम्मीद है कि त्रिशूर लोकसभा सीट से अभिनेता-राजनेता सुरेश गोपी की ऐतिहासिक जीत का प्रभाव इस क्षेत्र में भी देखने को मिलेगा। मानालूर इसी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है, और गोपी के प्रचार से पार्टी को लाभ मिलने की उम्मीद है।

Point of View

बल्कि पूरे राज्य की राजनीति की दिशा को प्रभावित करेगा।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

मानालूर सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
मानालूर सीट का इतिहास कांग्रेस के पक्ष में रहा है, जहाँ 15 में से 11 बार पार्टी ने जीत हासिल की है।
सीपीआई(एम) के उम्मीदवार कौन हैं?
सीपीआई(एम) के उम्मीदवार सी. रवींद्रनाथ हैं, जो पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
भाजपा का उम्मीदवार कौन है?
भाजपा ने स्थानीय नेता केके अनीश कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है।
क्या भाजपा को त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र में कोई लाभ मिलेगा?
भाजपा को उम्मीद है कि अभिनेता सुरेश गोपी की जीत का असर इस क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
कांग्रेस के नेता कौन हैं?
कांग्रेस की ओर से अनुभवी नेता टीएन प्रथापन मैदान में हैं।
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