मंगलुरु में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार: इलेक्ट्रीशियन से मारपीट और जबरन वसूली का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मंगलुरु में 7 नवंबर 2026 को मंगलुरु दक्षिण पुलिस स्टेशन से संबद्ध दो पुलिसकर्मियों को एक इलेक्ट्रीशियन के साथ कथित मारपीट और जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपी होयसला पुलिस वाहन में गश्त पर तैनात थे — यानी जिस वाहन का उद्देश्य आमजन की सुरक्षा है, वही अपराध का माध्यम बना।
गिरफ्तार पुलिसकर्मी और शिकायतकर्ता
गिरफ्तार पुलिसकर्मियों की पहचान शिवराज और हिरन्ना बेन्नी के रूप में हुई है। अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला विट्ठल निवासी इलेक्ट्रीशियन रविराज की शिकायत पर पाण्डेश्वर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर सामने आया।
मुख्य घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, रविराज मंगलुरु के नेहरू मैदान में टहलकर घर लौट रहे थे, तभी होयसला वाहन में सवार दो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उन्हें रोका, उनके साथ मारपीट की और उनका मोबाइल फोन छीनकर उसके कवर में रखे ₹300 निकाल लिए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाली दी और धमकी देकर मौके से फरार हो गए।
अगले दिन, हिरन्ना बेन्नी और शिवराज कथित तौर पर फिर होयसला वाहन में लौटे और रविराज को और परेशान किया। रविराज का आरोप है कि इस बार उनके कर्नाटक बैंक और यूनियन बैंक के दो एटीएम कार्ड, ₹1,000 नकद और मोटरसाइकिल की चाबी छीन ली गई।
आरोपों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने रविराज का मोबाइल पासवर्ड लेकर उनका बैंक बैलेंस भी जाँचा और ₹2,000 की मांग करते हुए धमकी दी कि रकम न देने पर झूठा मामला दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा।
शिकायत में एक अन्य पुलिसकर्मी उमानाथ पर भी रविराज की मोटरसाइकिल जब्त करने और पैसे माँगने का आरोप है। उमानाथ के विरुद्ध जाँच अभी जारी है।
पुलिस आयुक्त की कार्रवाई
मंगलुरु पुलिस आयुक्त सुधीर रेड्डी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपी कर्मियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसके बाद शिवराज और हिरन्ना बेन्नी को गिरफ्तार किया गया। यह कदम उच्चाधिकारी की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया का संकेत देता है, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्वत: जवाबदेही तंत्र की कमी चिंताजनक है।
आम जनता पर असर
यह घटना इसलिए विशेष ध्यान खींचती है क्योंकि जनसुरक्षा के लिए तैनात होयसला वाहन में गश्त करते पुलिसकर्मी ही कथित अपराधी बने। गौरतलब है कि होयसला योजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख पुलिस गश्त पहल है, और इस प्रकार के आरोप नागरिकों के भरोसे को सीधे प्रभावित करते हैं। आगे मामले की सुनवाई और तीसरे आरोपी उमानाथ के संदर्भ में जाँच के नतीजे इस प्रकरण की दिशा तय करेंगे।