श्रीलंकाई नौसेना द्वारा 50+ भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी पर मणिकम टैगोर ने लोकसभा में उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने 13 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों की लगातार गिरफ्तारी का मुद्दा संसद में उठाने की माँग की है। उन्होंने नियम 197 के तहत नोटिस देते हुए विदेश मंत्री से गुरुवार को सदन में इस विषय पर बयान देने का आग्रह किया है।
ताज़ा गिरफ्तारी का घटनाक्रम
12 अगस्त को श्रीलंकाई नौसेना ने उरुमालेई पॉइंट, तालैमन्नार के निकट 9 भारतीय मछुआरों और उनकी ट्रॉलर को हिरासत में लिया। आरोप है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार कर श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकड़ रहे थे। इससे पहले 6 अगस्त को रामेश्वरम के 11 मछुआरों को भी गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक महीने में रामेश्वरम के 50 से अधिक मछुआरे श्रीलंकाई अधिकारियों की हिरासत में जा चुके हैं।
संसद में रखे गए आँकड़े
मणिकम टैगोर ने राज्यसभा में 23 जुलाई को दी गई सरकारी जानकारी का हवाला दिया, जिसके अनुसार इस समय 30 भारतीय मछुआरे और 171 मछली पकड़ने वाली नावें श्रीलंका की हिरासत में हैं। इसके अलावा 2023 से अब तक 1,306 भारतीय मछुआरे गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 179 नावें जब्त की गई हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि यह समस्या छिटपुट नहीं, बल्कि एक गंभीर और लंबे समय से चली आ रही द्विपक्षीय चुनौती है।
भौगोलिक और मानवीय पहलू
सांसद ने नोटिस में स्पष्ट किया कि पाक जलडमरूमध्य का क्षेत्र अत्यंत संकरा और नौवहन की दृष्टि से कठिन है। इंजन खराब होने, प्रतिकूल मौसम, तेज समुद्री धाराओं, कम दृश्यता या नेविगेशन की तकनीकी खामियों के कारण मछुआरे अनजाने में आईएमबीएल पार कर जाते हैं। उनका तर्क है कि ऐसी आकस्मिक सीमा उल्लंघन की घटनाओं को जानबूझकर की गई अवैध मछली पकड़ने की गतिविधि से अलग करके देखा जाना चाहिए।
सांसद की प्रमुख माँगें
मणिकम टैगोर ने सरकार से तीन ठोस कदम उठाने की माँग की है। पहली, एक स्थायी द्विपक्षीय तंत्र का गठन जिसके तहत गलती से सीमा पार करने वाले मछुआरों को गिरफ्तार करने के बजाय चेतावनी देकर सुरक्षित वापस भेजा जाए। दूसरी, भारतीय तटरक्षक बल और श्रीलंकाई नौसेना के बीच 24 घंटे का संचार तंत्र स्थापित किया जाए। तीसरी, हिरासत में लिए गए सभी मछुआरों और नावों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए ताकि तटीय मछुआरा समुदायों की आजीविका और सम्मान की रक्षा हो सके।
व्यापक संदर्भ
यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत-श्रीलंका संबंधों में कूटनीतिक सक्रियता देखी जा रही है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के तटीय जिलों — विशेषकर रामेश्वरम — के मछुआरे दशकों से इस समस्या से जूझ रहे हैं, और इस विषय पर संसद में बार-बार आवाज़ उठाई जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी स्थायी द्विपक्षीय ढाँचे के यह चक्र जारी रहेगा।