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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह: बढ़ती बिजली मांग से ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ा दबाव

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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह: बढ़ती बिजली मांग से ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ा दबाव

सारांश

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने MNERC के प्रथम स्थापना दिवस पर साफ़ कहा — बढ़ती जनसंख्या और उपभोक्ताओं की संख्या ने बिजली क्षेत्र पर दबाव बढ़ाया है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 'विकसित भारत 2047' से जोड़ते हुए निर्बाध आपूर्ति को विकास की शर्त बताया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 23 जुलाई को MNERC के प्रथम स्थापना दिवस पर बढ़ती बिजली माँग को राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताया।
घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक — तीनों स्तरों पर बिजली की माँग में वृद्धि से वितरण तंत्र पर अतिरिक्त दबाव।
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ते हुए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली को विकास की आधारशिला बताया।
MNERC का गठन बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 82 के तहत हुआ; दरें तय करना, लाइसेंस, नवीकरणीय ऊर्जा प्रोत्साहन और उपभोक्ता संरक्षण इसके प्रमुख दायित्व।
राज्य सरकार ने बिजली क्षेत्र को मज़बूत करने और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए आयोग को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार, 23 जुलाई को कहा कि राज्य में तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार इज़ाफे के चलते ऊर्जा क्षेत्र के सामने गंभीर नई चुनौतियाँ उभर रही हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास और आधुनिक जीवनशैली को बनाए रखने के लिए भरोसेमंद और निर्बाध बिजली आपूर्ति अनिवार्य है।

MNERC के प्रथम स्थापना दिवस पर संबोधन

मुख्यमंत्री इंफाल में आयोजित मणिपुर विद्युत विनियामक आयोग (MNERC) के प्रथम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल, आयोग के अध्यक्ष सौबाम इबोपिशक सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

खेमचंद सिंह ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों — तीनों स्तरों पर बिजली की माँग बढ़ रही है, जिससे वितरण तंत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि MNERC उपभोक्ताओं के हित में दूरदर्शी और प्रगतिशील निर्णय लेता रहेगा।

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र को सुदृढ़ करने, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आयोग को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य बिजली अवसंरचना की कमज़ोरियों से जूझ रहे हैं।

राज्यपाल का संदेश: 'विकसित भारत 2047' की नींव

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने आयोग के अध्यक्ष, सचिव, अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रथम स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि बिजली आधुनिक विकास की आधारशिला है और मणिपुर के आर्थिक उत्थान तथा नागरिकों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने के लिए सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और अविरल बिजली आपूर्ति अनिवार्य है।

राज्यपाल ने 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक आधुनिक, सशक्त और उपभोक्ता-केंद्रित ऊर्जा क्षेत्र देश की प्रगति का महत्वपूर्ण स्तंभ होगा। उन्होंने इंजीनियरों, तकनीशियनों और फील्ड कर्मचारियों की सराहना की जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति को सुचारु रखते हैं।

MNERC की भूमिका और अधिकार क्षेत्र

गौरतलब है कि मणिपुर विद्युत विनियामक आयोग का गठन बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 82 के तहत किया गया था। आयोग के दायित्वों में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण की दरें तय करना, बिजली कंपनियों को लाइसेंस जारी करना, बिजली खरीद की निगरानी, नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करना, हितधारकों के बीच विवादों का निपटारा और उपभोक्ता हितों की रक्षा शामिल है।

आयोग के अध्यक्ष सौबाम इबोपिशक सिंह के नेतृत्व में MNERC राज्य के भीतर बिजली पारेषण और व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है। आने वाले समय में आयोग से अपेक्षा की जा रही है कि वह पारदर्शिता और पेशेवर कार्यशैली के उच्च मानक बनाए रखते हुए मणिपुर के सतत विकास में योगदान देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नियामक ढाँचा उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे और टैरिफ़ युक्तिसंगतता में कितना प्रभावी साबित हुआ है। 'विकसित भारत 2047' का संदर्भ देना आसान है, लेकिन मणिपुर जैसे राज्य में जहाँ संघर्ष और अवसंरचना की कमी साथ-साथ चलती है, वहाँ निर्बाध बिजली आपूर्ति का वादा तब तक अधूरा रहेगा जब तक निवेश और जवाबदेही दोनों ज़मीन पर न दिखें।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर विद्युत विनियामक आयोग (MNERC) क्या है?
MNERC मणिपुर का स्वतंत्र बिजली नियामक निकाय है, जिसका गठन बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 82 के तहत किया गया था। यह बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण की दरें तय करने, लाइसेंस जारी करने, नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और उपभोक्ता हितों की रक्षा का दायित्व निभाता है।
मणिपुर में बिजली क्षेत्र के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, राज्य में बढ़ती जनसंख्या और उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि के कारण घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक — तीनों स्तरों पर बिजली की माँग बढ़ रही है। इससे वितरण तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना कठिन हो रहा है।
MNERC का प्रथम स्थापना दिवस कब और कहाँ मनाया गया?
MNERC का प्रथम स्थापना दिवस 23 जुलाई को इंफाल में आयोजित किया गया। इस समारोह में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल और आयोग के अध्यक्ष सौबाम इबोपिशक सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने बिजली क्षेत्र पर क्या कहा?
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कहा कि बिजली आधुनिक विकास की आधारशिला है और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने के लिए सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति अनिवार्य है। उन्होंने MNERC से पारदर्शिता और पेशेवर कार्यशैली के उच्च मानक बनाए रखने की अपेक्षा जताई।
मणिपुर सरकार बिजली क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र को सुदृढ़ करने, सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए MNERC को हरसंभव सहयोग देगी। आयोग नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और राज्य के भीतर बिजली पारेषण व व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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