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मणिपुर सरकार ने NRC अपडेट आंदोलन वापस लेने की अपील की, CJFD से दफ्तर बंदी रोकने का आग्रह

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मणिपुर सरकार ने NRC अपडेट आंदोलन वापस लेने की अपील की, CJFD से दफ्तर बंदी रोकने का आग्रह

सारांश

मणिपुर सरकार ने NRC अपडेट माँग पर CJFD के सरकारी दफ्तर बंदी आंदोलन को वापस लेने की अपील की। सरकार का कहना — विधानसभा प्रस्ताव पारित, केंद्र को सूचित; फिर भी CJFD ने आंदोलन तेज किया। गृह मंत्री दिल्ली में केंद्र पर दबाव बनाने में लगे हैं।

मुख्य बातें

मणिपुर सरकार ने 13 सितंबर 2026 को CJFD सहित सिविल सोसाइटी संगठनों से NRC अपडेट माँग पर जारी विरोध-प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।
BJP विधायक एवं प्रवक्ता थोकचोम राधेश्याम सिंह और सपम रंजन सिंह ने कहा कि सरकारी दफ्तर बंद होने से आम जनता को परेशानी हो रही है।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने NRC अपडेट की जनभावना केंद्र तक पहुँचाई; 2027 की जनगणना से पहले NRC पूरी करने का प्रस्ताव विधानसभा में दोहराया गया।
NRC के लिए 1951 को आधार वर्ष मानने पर चर्चा हुई और मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुँचाया गया।
गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह और कुछ विधायक केंद्र पर दबाव बनाने के लिए नई दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फिलहाल जनगणना प्रक्रिया टाल दी है।

मणिपुर सरकार ने 13 सितंबर 2026 को सिविल सोसाइटी संगठनों (CSO) से आग्रह किया कि वे नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को अपडेट करने की माँग को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन वापस लें, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तरों को बंद करना भी शामिल है। सरकारी प्रवक्ताओं ने कहा कि इस आंदोलन से आम नागरिकों को गंभीर असुविधा हो रही है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह और सपम रंजन सिंह ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह अपील की। उन्होंने कहा कि 'कैंपेन फॉर जस्टिस एंड फेयर डेलिमिटेशन' (CJFD) के आह्वान पर सरकारी दफ्तर बंद होने से आम जनता की रोज़मर्रा की ज़रूरतें प्रभावित हो रही हैं।

राधेश्याम सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार CJFD की माँग से पूरी तरह अवगत है और खुद भी चाहती है कि 2027 की जनगणना से पहले NRC का काम पूरा हो। उन्होंने कहा कि आंदोलन तेज करने से कई 'अवांछित घटनाएँ' हो सकती हैं।

विधानसभा और केंद्र सरकार तक पहुँचाया मामला

राधेश्याम सिंह ने बताया कि मणिपुर विधानसभा के हालिया सत्र में 2027 की जनगणना से पहले NRC अपडेट करने का प्रस्ताव फिर से दोहराया गया। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस विषय में केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है।

गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन में NRC के लिए 1951 को आधार वर्ष (बेस ईयर) मानने पर चर्चा हुई और यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुँचाया जा चुका है। प्रवक्ताओं ने यह भी बताया कि इस पहल के परिणामस्वरूप केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है।

सरकार की प्रतिक्रिया और दिल्ली में लॉबिंग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह और कुछ अन्य विधायक पिछले कुछ दिनों से नई दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, ताकि NRC 1951 को अपडेट करने के मामले में केंद्र पर दबाव बनाया जा सके। राधेश्याम सिंह ने यह भी बताया कि नई दिल्ली में मणिपुर विधायकों के अभियान के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नेताओं को राज्य की जनभावना से अवगत कराया।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही जातीय तनाव और सामाजिक अशांति के दौर से गुज़र रहा है। ऐसे में NRC अपडेट की माँग को लेकर लंबे समय से जारी आंदोलन राज्य में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।

आम जनता पर असर

सरकारी दफ्तरों की बंदी से सरकारी सेवाओं, दस्तावेज़ीकरण और अन्य आवश्यक कार्यों में व्यवधान आ रहा है। प्रवक्ताओं ने जनता के सभी वर्गों से अपील की कि वे 'मणिपुर में शांति को मौका दें' और राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन करें।

राधेश्याम सिंह ने CJFD से आग्रह किया कि वे इस तरह की गतिविधियाँ लंबे समय तक न चलाएँ, क्योंकि दीर्घकालिक आंदोलन से राज्य के कामकाज और लोगों की परेशानी दोनों बढ़ेंगे।

क्या होगा आगे

सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार राज्य की जनभावना के अनुरूप NRC अपडेट के संदर्भ में जल्द निर्णय लेगी। गृह मंत्री और विधायकों की दिल्ली में जारी लॉबिंग के नतीजे आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे — और यही तय करेगा कि CJFD का आंदोलन जारी रहेगा या समाप्त होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी आंदोलन रोकने की अपील कर रही है। असली सवाल यह है कि जब सरकार खुद मानती है कि 2027 से पहले NRC होनी चाहिए, तो केंद्र पर प्रभावी दबाव बनाने में इतनी देरी क्यों हुई कि नागरिक समाज को सड़क पर उतरना पड़ा। गृह मंत्री की दिल्ली यात्रा एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिना ठोस समयसीमा के यह केवल आश्वासन की राजनीति बनकर रह सकती है। मणिपुर में लंबे समय से जारी अशांति के बीच NRC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर टकराव टालना सरकार की प्राथमिकता समझ में आती है, लेकिन इसके लिए ज़मीनी कार्रवाई की माँग बढ़ती रहेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में NRC अपडेट को लेकर विरोध-प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
'कैंपेन फॉर जस्टिस एंड फेयर डेलिमिटेशन' (CJFD) सहित सिविल सोसाइटी संगठन 2027 की जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को अपडेट करने की माँग कर रहे हैं। इस माँग के समर्थन में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तरों को बंद करने का आह्वान किया है।
मणिपुर सरकार की NRC अपडेट पर क्या स्थिति है?
मणिपुर सरकार खुद भी NRC अपडेट की पक्षधर है। विधानसभा के हालिया सत्र में 2027 की जनगणना से पहले NRC पूरी करने का प्रस्ताव दोहराया गया और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस बारे में केंद्र सरकार को अवगत कराया है।
NRC के लिए 1951 का आधार वर्ष क्यों माँगा जा रहा है?
मणिपुर विधानसभा के हालिया सत्र में 1951 को NRC का आधार वर्ष मानने पर चर्चा हुई, जो असम के NRC (1971 आधार वर्ष) से अलग है। यह माँग मणिपुर की जनसांख्यिकीय संवेदनशीलता और अवैध प्रवासन की चिंताओं से जुड़ी है; इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी अवगत कराया गया है।
केंद्र सरकार ने NRC अपडेट माँग पर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फिलहाल जनगणना प्रक्रिया को टाल दिया है। मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह और कुछ विधायक NRC अपडेट के लिए केंद्र पर दबाव बनाने हेतु नई दिल्ली में हैं, लेकिन केंद्र की ओर से कोई ठोस समयसीमा अभी घोषित नहीं हुई है।
CJFD का आंदोलन मणिपुर में सामान्य जनजीवन को कैसे प्रभावित कर रहा है?
CJFD के आह्वान पर सरकारी दफ्तर बंद होने से सरकारी सेवाएँ, दस्तावेज़ीकरण और अन्य आवश्यक कार्य बाधित हो रहे हैं। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि दीर्घकालिक आंदोलन से 'अवांछित घटनाएँ' हो सकती हैं और राज्य के कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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