मणिपुर बंद: एनआरसी अपडेट की मांग पर इंफाल घाटी में 48 घंटे ठप, महिला प्रदर्शनकारी घायल
सारांश
मुख्य बातें
इंफाल घाटी में 18 अगस्त 2026 को 48 घंटे के आम बंद के दौरान व्यापार, परिवहन और दैनिक जनजीवन लगभग पूरी तरह ठप हो गया। 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन' (जेएफडी) द्वारा आहूत इस बंद की मूल मांग है कि 2027 की जनगणना से पहले मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) को अद्यतन किया जाए। बंद सोमवार आधी रात से शुरू होकर बुधवार आधी रात तक जारी रहा।
बंद का असर: सुनसान सड़कें, बंद बाज़ार
इंफाल घाटी के छह जिलों — इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर, काकचिंग और जिरीबाम — में दुकानें बंद रहीं और सड़कें सुनसान नज़र आईं। बंद समर्थकों ने कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही रोकी, जिसकी चपेट में वीआईपी काफिले, डॉक्टर, सरकारी कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी आए। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं सहित प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे।
हिंसा और घायल: पुलिस कार्रवाई में महिलाएं चोटिल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ स्थानों पर तनाव की खबरें आईं। पोरोमपट, इंफाल ईस्ट में पुलिस कार्रवाई के दौरान कम से कम चार महिला प्रदर्शनकारी घायल हो गईं, जिन्हें जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जेएनआईएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य घटना में सुरक्षा बलों के काफिले ने बंद समर्थकों के एक समूह के विरुद्ध कथित तौर पर नकली बम (मॉक बम) का इस्तेमाल किया, जिसमें एक महिला घायल बताई गई।
काकचिंग और जिरीबाम में प्रदर्शन
काकचिंग जिले में 'अपुनबा नुपी लुप' के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने हियांगलाम-वाबागाई स्थित एमा मार्केट और लमखाई केइथेल पर धरना दिया और वीआईपी गाड़ियों सहित सभी वाहनों की आवाजाही रोकी। सिविल सोसाइटी संगठनों, छात्र संगठनों और 'मीरा पाइबी' ने नेशनल हाईवे-37 (एनएच-37) को अवरुद्ध कर दिया, जिससे जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण राजमार्ग पर आवाजाही ठप हो गई।
बीरेन सिंह का दिल्ली दौरा और केंद्र का रुख
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह विधायकों के साथ सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले और इंफाल लौटे। मीडिया से बात करते हुए सिंह ने कहा, "हमने गृह मंत्री को एनआरसी, हड़ताल और आंदोलन से जुड़ी स्थिति के बारे में जानकारी दी है। मुझे विश्वास है कि गृह मंत्री इस अहम मुद्दे पर कोई सकारात्मक कदम उठाएंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में मणिपुर में जनसंख्या असंतुलन सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई, और जनगणना से पहले एनआरसी कराने की मांग पर शाह का रुख सकारात्मक रहा।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही दीर्घकालिक जातीय तनाव से जूझ रहा है। गौरतलब है कि एनआरसी अपडेट की मांग घाटी-समुदायों की लंबे समय से चली आ रही माँग है, जो अवैध प्रवासन को लेकर गहरी चिंता से उपजी है। केंद्र का अगला कदम — और उसकी समयसीमा — इस आंदोलन की दिशा तय करेगा।